भारत के ‘काले सोने’ पर संकट, हाथ से निकलेगा 48 करोड़ डॉलर का बाजार?
भारत में बड़ी इलायची की खेती बीमारी और बदलते मौसम से संकट में है. नेपाल उत्पादन में आगे निकल गया है, जबकि वैश्विक बाजार 2033 तक 48 करोड़ डॉलर का होने का अनुमान है.
Highlights
- वैश्विक उत्पादन में नेपाल की हिस्सेदारी करीब 68%, भारत की 22% है
- बीमारी और जलवायु परिवर्तन से सिक्किम के किसानों की पैदावार प्रभावित हुई
- बड़ी इलायची का वैश्विक बाजार 2033 तक 48 करोड़ डॉलर पहुंच सकता है
भारत में कभी ‘काला सोना’ कही जाने वाली बड़ी इलायची की खेती अब संकट से गुजर रही है. एक ओर दुनिया में बड़ी इलायची की मांग बढ़ने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर भारत में किसानों को कम पैदावार, फसल की बीमारियों और बदलते मौसम जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. बड़ी इलायची का वैश्विक बाजार 2033 तक 48 करोड़ डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. ऐसे में भारत के लिए इस कारोबार में अपनी स्थिति मजबूत करना बड़ी चुनौती है.
बड़ी इलायची क्यों है खास?
बड़ी इलायची एक प्रमुख मसाला है, जिसका इस्तेमाल बिरयानी, पुलाव, मांसाहारी व्यंजनों और कई दूसरे पकवानों में किया जाता है. इसकी तेज खुशबू और खास स्वाद के कारण घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी मांग बनी रहती है.
सिक्किम और पूर्वी हिमालय के दूसरे इलाकों में इसकी खेती हजारों किसानों की आमदनी का प्रमुख साधन है. कई परिवारों की आर्थिक स्थिति इस फसल की पैदावार और बाजार में मिलने वाली कीमत पर निर्भर करती है.
उत्पादन में नेपाल से पिछड़ा भारत
बड़ी इलायची के उत्पादन में भारत की स्थिति पहले काफी मजबूत थी, लेकिन अब नेपाल इस कारोबार में आगे निकल गया है. अनुमान के मुताबिक, वैश्विक उत्पादन में नेपाल की हिस्सेदारी करीब 68% है, जबकि भारत की हिस्सेदारी लगभग 22% रह गई है. भूटान भी बड़ी इलायची का प्रमुख उत्पादक है.
भारत में उत्पादन और निर्यात से जुड़ी चुनौतियों के कारण किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में मुश्किल हो रही है. उत्पादन बढ़ाने और फसल की गुणवत्ता सुधारने पर ध्यान देना जरूरी हो गया है.
बीमारी और बदलता मौसम बढ़ा रहे परेशानी
बड़ी इलायची की खेती में पौधों की बीमारियां बड़ी समस्या बन गई हैं. पत्तियों में झुलसा रोग, वायरस संक्रमण और जड़ों के सड़ने से पौधों की बढ़वार और उत्पादन प्रभावित होता है.
इसके अलावा, तापमान में बदलाव, बारिश के अनियमित पैटर्न और लंबे समय तक सूखा रहने से भी फसल को नुकसान पहुंचता है. पौधे कमजोर होने के कारण किसानों को नई पौध लगाने पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है. बड़ी इलायची के पौधों से सामान्य तौर पर कुछ साल बाद उत्पादन शुरू होता है, इसलिए नई पौध लगाने के बाद कमाई के लिए इंतजार करना पड़ता है.
2033 तक कितना बढ़ेगा बाजार?
बड़ी इलायची के वैश्विक बाजार का आकार 2025 में करीब 25 करोड़ डॉलर आंका गया था. अनुमान है कि 2033 तक यह बढ़कर 48 करोड़ डॉलर हो सकता है. इस दौरान बड़ी इलायची की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखी गई है.
बाजार में बढ़ती मांग भारतीय किसानों के लिए कमाई का अवसर बन सकती है. हालांकि, इसका फायदा उठाने के लिए उत्पादन बढ़ाना, फसल की गुणवत्ता बनाए रखना और खेती की लागत कम करना जरूरी होगा.
किसानों को राहत देने के लिए क्या जरूरी?
बड़ी इलायची की खेती को दोबारा मजबूत बनाने के लिए बीमारी से लड़ने वाली किस्मों, बेहतर पौध सामग्री और वैज्ञानिक खेती के तरीकों पर ध्यान देना होगा. किसानों को मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने, उचित छाया बनाए रखने और फसल की देखभाल से जुड़ी तकनीकी जानकारी भी उपलब्ध करानी होगी.
अगर इन समस्याओं का समाधान होता है, तो भारत बढ़ते वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकता है. लेकिन इसके लिए किसानों को समय पर सहायता और खेती से जुड़ी बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी है.
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