टोल नहीं भरा तो होगा भारी नुकसान, वाहन ट्रांसफर और बिक्री पर लगेगी रोक; सरकार ने बदले नियम
केंद्र सरकार ने सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स, 2026 के तहत टोल भुगतान से जुड़े नियमों को सख्त कर दिया है. अब अगर किसी वाहन पर नेशनल हाईवे का टोल बकाया है, तो वाहन की बिक्री या राज्य बदलकर ट्रांसफर संभव नहीं होगा. बकाया रहने की स्थिति में NOC जारी नहीं किया जाएगा और फिटनेस सर्टिफिकेट का रिन्यू भी अटक सकता है.
Central Motor Vehicles Rules 2026: केंद्र सरकार ने सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स, 2026 के जरिए वाहन मालिकों के लिए टोल भुगतान से जुड़े नियमों को और सख्त कर दिया है. अब अगर किसी वाहन पर नेशनल हाईवे के टोल प्लाजा की यूजर फीस बकाया है, तो उस वाहन को न तो बेचा जा सकेगा और न ही एक राज्य से दूसरे राज्य में ट्रांसफर किया जा सकेगा. सरकार का साफ कहना है कि जब तक लंबित टोल शुल्क का भुगतान नहीं किया जाएगा, तब तक वाहन से जुड़े कई अहम कानूनी काम पूरे नहीं हो पाएंगे. ये बदलाव सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स, 1989 में किए गए दूसरे संशोधन के तहत लागू किए गए हैं.
टोल बकाया होने पर क्यों अटकेगा वाहन ट्रांसफर
नए नियमों के मुताबिक, अगर किसी वाहन पर नेशनल हाईवे की यूजर फीस बकाया है, तो उस स्थिति में वाहन मालिक को NOC नहीं दिया जाएगा. NOC वाहन के ओनरशिप ट्रांसफर या एक राज्य से दूसरे राज्य में वाहन शिफ्ट करने के लिए जरूरी दस्तावेज होता है. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, जब तक बकाया यूजर फीस का भुगतान नहीं हो जाता, तब तक NOC जारी नहीं किया जाएगा. अगर कोई वाहन तीन महीने से ज्यादा समय के लिए किसी दूसरे राज्य में रखा जाना है, तो NOC अनिवार्य होता है.
‘Unpaid User Fee’ की नई परिभाषा
संशोधित नियमों में ‘Unpaid User Fee’ की एक नई परिभाषा जोड़ी गई है. इसके तहत, अगर इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन सिस्टम यानी FASTag के जरिए किसी वाहन का नेशनल हाईवे से गुजरना रिकॉर्ड हो गया है, लेकिन संबंधित टोल शुल्क नेशनल हाईवे एक्ट, 1956 के अनुसार प्राप्त नहीं हुआ है, तो उसे ‘Unpaid User Fee’ माना जाएगा. इसका सीधा मतलब है कि FASTag में बैलेंस की कमी या भुगतान विफल रहने की स्थिति अब वाहन मालिक के लिए बड़ी परेशानी बन सकती है.
फिटनेस सर्टिफिकेट पर भी पड़ेगा असर
नए नियम केवल वाहन ट्रांसफर तक सीमित नहीं हैं. अगर किसी वाहन के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट का रिन्यू या नया सर्टिफिकेट बनवाना है, तो वह भी तब तक संभव नहीं होगा, जब तक सभी बकाया टोल शुल्क का भुगतान नहीं किया जाता. इससे खास तौर पर कमर्शियल वाहनों और पुराने वाहनों के मालिकों पर असर पड़ने की संभावना है.
फॉर्म 28 में बड़ा बदलाव
सरकार ने फॉर्म 28 में भी अहम संशोधन किया है. अब NOC के लिए आवेदन करते समय वाहन मालिक को यह जानकारी देनी होगी कि वाहन पर कोई ‘Unpaid User Fee’ बकाया है या नहीं. इसके साथ ही फॉर्म 28 के संबंधित हिस्सों को ऑनलाइन पोर्टल के जरिए इलेक्ट्रॉनिक रूप से जारी करने की व्यवस्था भी की गई है. फॉर्म 28 वह दस्तावेज होता है, जिससे यह प्रमाणित होता है कि वाहन पर कोई बकाया टैक्स, चालान या कानूनी अड़चन नहीं है.
MLFF सिस्टम की तैयारी
इन बदलावों को भविष्य में लागू होने वाले MLFF टोलिंग सिस्टम से भी जोड़कर देखा जा रहा है. नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अनुसार, बैरियर-लेस टोलिंग व्यवस्था में यूजर फीस की वसूली और अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए ऐसे सख्त नियम जरूरी थे.
कुल मिलाकर, सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स, 2026 का यह संशोधन वाहन मालिकों को साफ संदेश देता है कि टोल भुगतान में लापरवाही अब सीधे उनके वाहन के ट्रांसफर, बिक्री और फिटनेस सर्टिफिकेट पर असर डालेगी. ऐसे में समय पर FASTag और टोल भुगतान सुनिश्चित करना अब पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है.