Budget 2026 में शेयर बायबैक टैक्स नियम बदला, डिविडेंड नहीं… अब माना जायेगा कैपिटल गेन, 30% तक देना होगा टैक्स
बजट 2026 में सरकार ने शेयर बायबैक से जुड़े टैक्स नियमों में बड़ा बदलाव किया है. अब बायबैक से मिलने वाली रकम को डिविडेंड की जगह कैपिटल गेन माना जाएगा, जिससे निवेशकों को अपनी लागत घटाने और सिर्फ असली मुनाफे पर टैक्स देने का फायदा मिलेगा.
Budget 2026 share buyback tax: केंद्रीय बजट 2026 में सरकार ने शेयर बाजार और निवेशकों से जुड़े एक लंबे समय से विवादित टैक्स नियम में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में ऐलान किया कि अब शेयर बायबैक से मिलने वाली रकम को डिविडेंड नहीं, बल्कि कैपिटल गेन माना जाएगा. अगर प्रमोटर एक घरेलू कंपनी है, तो कैपिटल गेन्स टैक्स और अतिरिक्त टैक्स मिलाकर कुल टैक्स 22% होगा. प्रमोटर घरेलू कंपनी नहीं है तो कुल टैक्स 30% तक पहुंच जाएगा. सरकार का कहना है कि इस फैसले से प्रमोटर्स द्वारा टैक्स आर्बिट्राज के गलत इस्तेमाल को रोका जा सकेगा और माइनॉरिटी निवेशकों को बड़ी राहत मिलेगी
अब तक क्या था नियम
1 अक्टूबर 2024 से लागू नियम के तहत, किसी कंपनी पर लगने वाला बायबैक टैक्स खत्म कर दिया गया और निवेशकों को मिलने वाली पूरी रकम को ‘डीम्ड डिविडेंड’ माना गया. यानी निवेशक को यह फर्क नहीं पड़ता था कि उसने शेयर मुनाफे में बेचा या नुकसान में, उन्हें टैक्स स्लैब के हिसाब से पूरी राशि पर टैक्स देना पड़ता था. इसके साथ ही, शेयरहोल्डर्स को शेयर खरीदने की लागत यानी कॉस्ट ऑफ एग्जिक्विशन को टैक्स में घटाने की अनुमति नहीं थी. नतीजा यह हुआ कि निवेशक को अपनी ही पूंजी पर टैक्स देना पड़ रहा था.
बजट 2026 में क्या बदला
अब बजट 2026 के तहत शेयर बायबैक से मिलने वाली रकम को कैपिटल गेन माना जाएगा. इससे निवेशक को अपनी बायबैक प्राइस में से अपने शेयर की खरीद कीमत घटाने का फायदा मिलेगा और टैक्स सिर्फ असली मुनाफे पर लगेगा. सरकार का मानना है कि इससे टैक्स का बोझ ज्यादा तार्किक और संतुलित होगा. वित्त मंत्री ने कहा, इस नियम से शेयर बायबैक को फिर से एक कैपिटल ट्रांजैक्शन की तरह ट्रीट किया जाएगा, न कि प्रॉफिट डिस्ट्रीब्यूशन के तरीके के रूप में.
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सरकार ने यह भी साफ किया है कि कुछ प्रमोटर्स बायबैक का इस्तेमाल टैक्स बचाने के लिए करते थे. इसी को रोकने के लिए प्रमोटर्स पर अतिरिक्त बायबैक टैक्स लगाया गया है. गैर-कॉरपोरेट प्रमोटर्स जैसे कोई फर्म, LLP या व्यक्ति है तो बायबैक से होने वाले कैपिटल गेन पर 30 फीसदी का स्पेशल टैक्स लगेगा, ताकि वे बायबैक को मुनाफा निकालने का मुख्य जरिया न बना लें. वहीं, कॉरपोरेट प्रमोटर्स के लिए प्रभावी टैक्स दर 22 फीसदी रखी गई है. इस तरह सरकार ने माइनॉरिटी निवेशकों और प्रमोटर्स के बीच अलग-अलग टैक्स ट्रीटमेंट तय किया है.
आम निवेशकों और कंपनियों पर कैसे असर पड़ेगा?
रिटेल और माइनॉरिटी निवेशकों के नजरिये से देखें तो यह बदलाव काफी सुकून देने वाला है. अब बायबैक के तहत मिलने वाली पूरी राशि पर टैक्स चुकाने की मजबूरी नहीं रहेगी. निवेशकों से टैक्स सिर्फ उसी हिस्से पर लिया जाएगा, जो वास्तव में उनका मुनाफा है. इसका सीधा फायदा खासतौर पर लंबे समय तक निवेश बनाए रखने वालों को मिलेगा, क्योंकि लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर टैक्स दर अपेक्षाकृत कम होती है. ऐसे में बायबैक के बाद निवेशकों के हाथ में बचने वाली रकम यानी पोस्ट-टैक्स रिटर्न पहले के मुकाबले बेहतर हो सकती है.
कंपनियों के स्तर पर भी यह बदलाव अहम माना जा रहा है. इससे बायबैक से जुड़ा टैक्स ढांचा ज्यादा स्पष्ट और पारदर्शी होगा. अब बायबैक को सिर्फ टैक्स बचाने के जरिये के तौर पर नहीं, बल्कि पूंजी के बेहतर उपयोग और शेयरहोल्डर वैल्यू बढ़ाने के एक रणनीतिक फैसले के रूप में देखा जाएगा. साथ ही, संगठित कंपनियों और प्रमोटर्स के लिए टैक्स नियमों को लेकर सख्ती भी बढ़ेगी, जिससे इस प्रक्रिया का दुरुपयोग होने की गुंजाइश कम हो जाएगी




