ऑपरेशन सिंदूर के बाद रक्षा बजट में 15% बढ़ोतरी, बनेंगे घातक हथियार, इन स्टॉक्स पर रखें नजर
केंद्रीय बजट 2026-27 में सरकार ने रक्षा बजट को 15.5% बढ़ाकर ₹7.84 लाख करोड़ कर दिया है. यह बढ़ोतरी मौजूदा भू-राजनीतिक हालात और भारत की रणनीतिक जरूरतों को दिखाती है. बजट में आधुनिकीकरण के लिए ₹2.19 लाख करोड़ और पेंशन के लिए ₹1.71 लाख करोड़ आवंटित किए गए हैं.
Defence Budget: आज, 1 फरवरी को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश का बजट पेश किया. बजट पेश होने के बाद से ही लोग इसके नफा-नुकसान का आकलन कर रहे हैं. लेकिन अगर बात डिफेंस बजट की करें, तो इसमें सरकार ने उम्मीदों के अनुसार बढ़ोतरी का ऐलान किया है. इस बार के डिफेंस बजट को सरकार ने 15.5 फीसदी बढ़ाते हुए 7.84 लाख करोड़ रुपये अलॉट किए हैं. वर्तमान भू-राजनीतिक माहौल और पिछले साल मई महीने में पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध (ऑपरेशन सिंदूर) को देखते हुए इसमें बढ़ोतरी की उम्मीद थी, जो हुई भी है.
कितना बढ़ा रक्षा बजट
वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा बजट ₹6.81 लाख करोड़ था, जिसे बढ़ाकर बजट 2026 में ₹7.84 लाख करोड़ कर दिया गया है. यह बढ़ोतरी न सिर्फ महंगाई समायोजन से ज्यादा है, बल्कि भारत के रणनीतिक बदलाव को भी दिखाती है. सरकार का फोकस लोकल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाने पर है, जिससे विदेशी निर्भरता में कमी की जा सके.
कहां-कहां खर्च होगा बजट
सरकार ने बजट में ₹2.19 लाख करोड़ कैपिटल आउटले के लिए अलॉट किए हैं. यह रकम सेना के आधुनिकीकरण पर खर्च होगी, जिसमें फाइटर एयरक्राफ्ट, लड़ाकू विमान, ड्रोन और सर्विलांस सिस्टम, तोपखाने और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, नौसेना प्लेटफॉर्म और सबमरीन की खरीद शामिल है.
इसके अलावा ₹3.56 लाख करोड़ रुपये रेवेन्यू एक्सपेंडिचर के लिए अलॉट किए गए हैं, जो सैनिकों के वेतन, ऑपरेशनल तैयारियों, ईंधन, लॉजिस्टिक्स और मेंटेनेंस पर खर्च होंगे. यह हिस्सा थलसेना, नौसेना और वायुसेना की रोजमर्रा की कार्यक्षमता बनाए रखने के लिए अहम है.
वहीं बजट में ₹1.71 लाख करोड़ डिफेंस पेंशन के लिए अलॉट किए गए हैं. वन रैंक वन पेंशन (OROP) और रिटायर्ड कर्मियों की बढ़ती संख्या के कारण पेंशन फंड में बड़ा आवंटन जारी रखा गया है. इसके अलावा सिविल डिफेंस के लिए ₹28,554 करोड़ रुपये अलॉट किए गए हैं.
बजट में क्या नया
इस बजट में एयरोस्पेस सेक्टर को बड़ी राहत मिली है. सिविलियन, ट्रेनिंग और अन्य एयरक्राफ्ट में लगने वाले पुर्जों पर बेसिक कस्टम ड्यूटी खत्म कर दी गई है. वहीं डिफेंस एयरक्राफ्ट के मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल पर भी BCD से छूट की घोषणा की गई है. इससे भारत की डिफेंस एयरोस्पेस इंडस्ट्री को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
मेक इन इंडिया पर फोकस
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में देश का कुल स्वदेशी रक्षा उत्पादन बढ़कर ₹1.54 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जबकि वित्त वर्ष 2023-24 में स्वदेशी रक्षा उत्पादन ₹1.27 लाख करोड़ रहा था. इन आंकड़ों की तुलना अगर 2014-15 से करें, तो यह 174% की बढ़ोतरी दिखाता है. इसी तरह रक्षा निर्यात में भी मजबूत बढ़ोतरी देखने को मिली है और यह बढ़कर ₹23,622 करोड़ के अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है.
तेजी से बढ़ रही लोकल मैन्युफैक्चरिंग
बजट के आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान में भारत के कुल डिफेंस इक्विपमेंट में से लगभग 65% का मैन्युफैक्चरिंग देश के भीतर ही किया जा रहा है. उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में स्थापित डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के माध्यम से डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग को नई गति मिली है, जहां अब तक ₹9,145 करोड़ से अधिक का निवेश आकर्षित हुआ है.
इस सेक्टर में 462 कंपनियों को कुल 788 इंडस्ट्रियल लाइसेंस जारी किए गए हैं. हालांकि, अब भी डिफेंस प्रोडक्शन का लगभग 77% हिस्सा PSU के पास है, लेकिन प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी धीरे-धीरे बढ़ रही है.
धड़ाम हुए डिफेंस स्टॉक्स
बजट के दिन ज्यादातर डिफेंस कंपनियों के शेयर में गिरावट देखने को मिली जिसका कारण सरकार का STT टैक्स में बढ़ोतरी का ऐलान था. हालांकि जानकारों का मानना है कि डिफेंस कंपनियों के शेयर में कुछ दिन में पॉजीटिव मूवमेंट देखने को मिल सकता है. हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL), मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स, भारत डायनेमिक्स, और कोचीन शिपयार्ड में तेजी देखने को मिल सकती है.




