3 साल बाद एल्युमिनियम ने तोड़ा 3000 डॉलर का रिकॉर्ड, घटती सप्लाई और बढ़ती मांग से मेटल मार्केट में हलचल

दुनिया के सबसे बड़े एल्युमिनियम उत्पादक देश चीन में स्मेल्टिंग कैपेसिटी पर सीमा तय कर दी गई है. इससे वहां उत्पादन बढ़ने की गुंजाइश कम हो गई है. दूसरी तरफ यूरोप में बिजली की कीमतें काफी ज्यादा हैं, जिससे कई प्लांट पूरी क्षमता पर काम नहीं कर पा रहे हैं.

Aluminium Image Credit: FreePik

Aluminum hits 3000: तीन साल से ज्यादा समय बाद एल्युमिनियम की कीमतों ने फिर से नया पड़ाव छू लिया है. वैश्विक बाजार में एल्युमिनियम पहली बार 3,000 डॉलर प्रति टन के पार पहुंच गया है. इसकी बड़ी वजह दुनिया भर में सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंता और भविष्य में मजबूत मांग की उम्मीद है. निर्माण, ग्रीन एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में एल्युमिनियम की जरूरत लगातार बढ़ रही है. वहीं, प्रोडक्शन से जुड़ी दिक्कतों ने बाजार में उपलब्धता को सीमित कर दिया है. निवेशकों और ट्रेडर्स की नजर अब बेस मेटल्स पर टिकी हुई है, क्योंकि कॉपर और निकेल जैसी धातुओं में भी तेजी देखने को मिल रही है. अगर सप्लाई का दबाव ऐसे ही बना रहा, तो आने वाले समय में धातुओं की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं.

एल्युमिनियम 3,000 डॉलर के पार

एल्युमिनियम की कीमत 3,000 डॉलर प्रति टन के ऊपर चली गई है. यह स्तर आखिरी बार साल 2022 में देखा गया था. बीते साल एल्युमिनियम फ्यूचर्स में करीब 17 प्रतिशत की तेजी आई, जो 2021 के बाद सबसे ज्यादा है. बाजार में यह तेजी सप्लाई घटने और मांग मजबूत रहने की वजह से आई है.

सप्लाई पर क्यों बढ़ा दबाव

दुनिया के सबसे बड़े एल्युमिनियम उत्पादक देश चीन में स्मेल्टिंग कैपेसिटी पर सीमा तय कर दी गई है. इससे वहां उत्पादन बढ़ने की गुंजाइश कम हो गई है. दूसरी तरफ यूरोप में बिजली की कीमतें काफी ज्यादा हैं, जिससे कई प्लांट पूरी क्षमता पर काम नहीं कर पा रहे हैं.

इन दोनों वजहों से वैश्विक भंडार घटता जा रहा है. निर्माण सेक्टर में एल्युमिनियम की मांग बनी हुई है. इसके साथ ही रिन्यूएबल एनर्जी, खासकर सोलर और विंड एनर्जी प्रोजेक्ट्स में भी इसका इस्तेमाल बढ़ा है. लंबी अवधि में ग्रीन ट्रांजिशन के चलते एल्युमिनियम की मांग और बढ़ने की उम्मीद है.

कॉपर और निकेल में भी तेजी

एल्युमिनियम के साथ-साथ कॉपर और निकेल की कीमतों में भी उछाल देखा गया. कॉपर ने हाल ही में मजबूत सालाना बढ़त दर्ज की है. लंदन मेटल एक्सचेंज पर यह छह प्रमुख औद्योगिक धातुओं में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला रहा. साल के अंत में कॉपर की कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचीं. साल 2025 में इंडोनेशिया, चिली और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में कई खदानों में हादसे हुए. इससे सप्लाई प्रभावित हुई. इसके अलावा टैरिफ को लेकर चिंता के चलते अमेरिका की ओर ज्यादा शिपमेंट भेजी गई.

चिली में हड़ताल का असर

उत्तरी चिली में Capstone Copper Corp. की एक खदान में यूनियन ने हड़ताल शुरू कर दी है. मजदूर रिकॉर्ड कीमतों से हो रहे मुनाफे में बड़ा हिस्सा चाहते हैं. इससे भी कॉपर की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है. निकेल की कीमतों में भी तेजी आई है. NDTV Profit की रिपोर्ट के मुताबिक PT Vale Indonesia ने बताया कि वर्क प्लान की मंजूरी में देरी के कारण उसने माइनिंग अस्थायी रूप से रोकी है. हालांकि कंपनी का कहना है कि मंजूरी जल्द मिल सकती है और लंबे समय में ऑपरेशन पर असर नहीं पड़ेगा.

मौजूदा कीमतें

लंदन मेटल एक्सचेंज पर कॉपर 0.4 प्रतिशत बढ़कर 12,469.50 डॉलर प्रति टन पर बंद हुआ. एल्युमिनियम 0.7 प्रतिशत की तेजी के साथ 3,015.50 डॉलर प्रति टन पहुंच गया. निकेल भी 1 प्रतिशत चढ़ा और दिसंबर में अप्रैल 2024 के बाद की सबसे बड़ी मासिक बढ़त दर्ज की.

इसे भी पढ़ें: अमेरिका के वेनेजुएला पर हमले से सोना, चांदी, कच्चे तेल और भारतीय शेयर बाजार पर क्या पड़ेगा असर?