हर 60 सेकंड में 800+ प्रोडक्ट्स की बिक्री, बिना सेलिब्रिटी के टाटा का Zudio कैसे बना Fast Fashion किंग

वित्त वर्ष 2025 में ज़ूडियो की बिक्री के आंकड़े हैरान करने वाले रहे. कंपनी हर मिनट करीब 220 टी-शर्ट, 60 जींस, 250 परफ्यूम और 330 लिपस्टिक बेच रही थी. ये आंकड़े सिर्फ कागज पर अच्छे नहीं लगते, बल्कि बताते हैं कि ज़ूडियो की दुकानें कितनी तेजी से चल रही हैं.

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Zudio: भारत में फैशन की बात आते ही अक्सर जारा और H&M जैसे विदेशी ब्रांड्स का नाम लिया जाता है. लेकिन एक भारतीय ब्रांड है जो बिना शोर मचाए चुपचाप रिकॉर्ड बना रहा है. इस ब्रांड का नाम है जूडियो. जूडियो के आंकड़े ऐसे हैं, जो किसी को भी चौंका दें. साल 2025 में यह ब्रांड हर एक मिनट में सैकड़ों कपड़े और प्रोडक्ट बेच रहा था. न कोई वायरल कैंपेन, न ही महंगे फैशन शो. फिर भी बिक्री आसमान छू रही है. टाटा ग्रुप से जुड़ा यह ब्रांड दिखाता है कि भारत में फैशन कैसे काम करता है. जूडियो कैसे भारतीय मिडिल क्लास की सोच को समझकर अरबों का बिजनेस खड़ा कर चुका है.

हर मिनट बिक रहे सैकड़ों प्रोडक्ट

वित्त वर्ष 2025 में ज़ूडियो की बिक्री के आंकड़े हैरान करने वाले रहे. कंपनी हर मिनट करीब 220 टी-शर्ट, 60 जींस, 250 परफ्यूम और 330 लिपस्टिक बेच रही थी. ये आंकड़े सिर्फ कागज पर अच्छे नहीं लगते, बल्कि बताते हैं कि ज़ूडियो की दुकानें कितनी तेजी से चल रही हैं. जहां दूसरे ब्रांड ग्राहकों को आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं ज़ूडियो के स्टोर्स पर लोग खुद पहुंच रहे हैं.

एक अरब डॉलर की कमाई का आंकड़ा पार

साल 2025 के अंत तक जूडियो ने एक अरब डॉलर से ज्यादा का रेवेन्यू दर्ज किया. यह उपलब्धि भारत में कई बड़े ग्लोबल फैशन ब्रांड्स अब तक हासिल नहीं कर पाए हैं. सबसे खास बात यह रही कि जूडियो ने सिर्फ दो साल में अपने स्टोर्स की संख्या दोगुनी कर ली. यह कोई अचानक मिली सफलता नहीं थी, बल्कि धीरे और सोच-समझकर किया गया विस्तार था.

सेलिब्रिटी नहीं, पहुंच पर फोकस

जूडियो की रणनीति बाकी ब्रांड्स से अलग रही. जहां दूसरी कंपनियां महंगे विज्ञापन और फिल्मी सितारों पर पैसा खर्च कर रही थीं, वहीं जूडियो ने स्टोर खोलने पर ध्यान दिया. कंपनी ने टियर-2 और टियर-3 शहरों को अपना मजबूत आधार बनाया. ये वो शहर हैं, जहां लोग फैशनेबल दिखना चाहते हैं, लेकिन कीमत भी उनके बजट में होनी चाहिए.

मिडिल क्लास की सोच को समझा

जूडियो के कपड़े न ज्यादा भड़काऊ हैं और न ही पुराने ट्रेंड के. ये ऐसे कपड़े हैं, जिन्हें बिना ज्यादा सोचे खरीदा जा सकता है. कई लोग तो किराने की खरीदारी के साथ ही जूडियो से कपड़े भी उठा लेते हैं. कुछ लोग मानते हैं कि जूडियो की सफलता बताती है कि भारत में अभी भी सस्ता फैशन ज्यादा बिकता है. वहीं कुछ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि ज़ूडियो ने मिडिल क्लास की असली जरूरत को समझ लिया है. अच्छा दिखना भी और खर्च भी कंट्रोल में.

मुनाफे पर दबाव, लेकिन भविष्य मजबूत

जूडियो की पैरेंट कंपनी ट्रेंट की कमाई तो बढ़ी, लेकिन मुनाफे पर थोड़ा दबाव भी आया. इसकी वजह तेजी से नए स्टोर खोलना और बढ़ता खर्च है. हालांकि एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह निवेश भविष्य के लिए है. ज्यादा स्टोर मतलब ज्यादा पहुंच और लंबे समय की मजबूती. ज़ूडियो ने यह साबित कर दिया कि भारत में फैशन का रास्ता अलग है. सादगी, सही कीमत और हर जगह मौजूदगी.

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