पाकिस्तान के साथ तनाव के बीच भारत को इस मोर्चे पर लगा साल का सबसे बड़ा झटका, जानें क्या होगा असर?
पहलगाम हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान को चारों खाने चित्त कर दिया है. डिप्लोमेटिक, इकोनॉमिक और वॉर के फ्रंट पर पाकिस्तान भारत से लगातार मुंह की खा रहा है. लेकिन, सीमा पर तनाव बढ़ने की वहज से भारत को एक बड़े मोर्चे पर करारा झटका लगा है.
पाकिस्तान के साथ तनाव बढ़ने के बाद भी भारत का शेयर बाजार और तमाम इकोनॉमिक इंडिकेटर पॉजिटिव सेंटिमेंट के साथ आगे बढ़ रहे हैं. इससे पता चलता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए पाकिस्तान कोई बड़ी चुनौती खड़ी नहीं कर सकता है. लेकिन, सीमा पर बढ़ते तनाव के चलते एक अहम मोर्चे पर भारत को बड़ा झटका लगा है. 8 मई को डॉलर की तुलना में भारतीय रुपये ने इस साल एक दिन में सबसे बड़ी गिरावट का सामना किया है. गुरुवार को डॉलर की तुलना में रुपये में 84 पैसे की कमी आई है. इसके बाद रुपया 85.61 के स्तर पर बंद हुआ है.
फॉरेक्स ट्रेडर्स का कहना है कि रुपये में गिरावट के कई कारण हैं. हालांकि, इनमें पाकिस्तान के साथ भारत का सैन्य टकराव अहम वजह है. खासतौर पर 7 मई को भारत की तरफ से पाकिस्तान में 9 आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किए जाने के बाद पाकिस्तानी सेना की तरफ से भारतीय नागरिक और सैन्य ठिकानों पर हमले की वजह से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है. पाकिस्तानी सेना के हमलों के बाद भारत ने 8 मई को पाकिस्तान के कई शहरों पर हमला किया है. भारतीय हमले के दौरान खासतौर पर पाकिस्तान के एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाया गया है.
दो दिन में बड़ी गिरावट
इससे पहले बुधवार को भी रुपये में बड़ी गिरावट हुई. बुधवार को रुपया 42 पैसे की गिरावट के साथ बंद हुआ. इस तरह दो दिन के भीतर डॉलर के मुकाबले रुपये में 126 पैसे की गिरावट आ चुकी है. वहीं, एक्सपर्टस का कहना है कि रुपये में गिरावट का यह ट्रेंड आगे भी जारी रह सकता है.
क्या कह रहे एक्सपर्ट?
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के रिसर्च एनालिस्ट दिलीप परमार ने कहा, जिया-पॉलिटकल अनिश्चितता की वजह से जहां अमेरिकी डॉलर में भी गिरावट आई है. वहीं, डॉलर के मुकाबले रुपया भी कमजोर हुआ है. उन्होंने बताया कि अमेरिकी व्यापार गतिविधियों में मंदी के बीच आईसीई डॉलर इंडेक्स कमजोर हुआ है. इसके अलावा अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में भी गिरावट आई है. हालांकि, घरेलू कारणों की वजह से रुपये पर ज्यादा दबाव आया है. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि डॉलर के मुकाबले रुपये के लिए फिलहाल 85.03 पर मेजर सपोर्ट बना हुआ है. वहीं, 85.70 एक रेजिस्टेंस है.
आगे कैसी रहेगी रुपये की चाल
मिराए एसेट शेयरखान के रिसर्च एनालिस्ट अनुज चौधरी का कहना है कि रुपये में आज और भी बड़ी गिरावट हो सकती थी, लेकिन एफआईआई के इनफ्लो की वजह से रुपये को निचले लेवल से बड़ा सपोर्ट मिला है. टेक्निकली आने वाले दिनों में डॉलर-रुपये का हाजिर भाव 85.20 से 86 के बीच रहने की उम्मीद है.
क्या होगा असर?
डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी का दोतरफा असर होता है. इससे भारत का निर्यात किफायती और ज्यादा प्रतिस्पर्धी बन जाता है. वहीं, आयात महंगा हो जाता है. बहरहाल, मौजूदा स्थिति मे देखें, तो रुपये की गिरावट का भारत को फायदा ही मिलेगा, क्योंकि भारत के आयात बिल का सबसे बड़ा हिस्सा क्रूड पर खर्च होता है, जिसका भाव फिलहाल निचले स्तर पर ही बना हुआ है. ऐसे में भारतीय निर्यातकों के लिए रुपये की कमजोरी का लाभ उठाने का अवसर मिलेगा.
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