अनिल अंबानी का SC में बड़ा हलफनामा, कहा- “बिना सुप्रीम कोर्ट के आदेश नहीं छोडूंगा देश”
देश के एक बड़े कारोबारी समूह से जुड़ा मामला इन दिनों न्यायपालिका और जांच एजेंसियों के फोकस में है. कोर्ट की सख्ती और जांच की रफ्तार ने इस केस को और अहम बना दिया है. इस मामले के केंद्र में है अनिल अंबानी. अनिल अंबानी की ओर से दिए गए ताजा आश्वासन ने मामले को नई दिशा दी है.
रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर भरोसा दिलाया है कि वह अदालत की अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ेंगे और उनके समूह से जुड़े कथित 40,000 करोड़ रुपये के बैंकिंग और कॉरपोरेट फ्रॉड मामले की जांच में पूरी तरह सहयोग करेंगे. उन्होंने साफ कहा है कि वह न तो कानून से बचना चाहते हैं और न ही किसी तरह का जोखिम पैदा करना उनका इरादा है.
“विदेश यात्रा की कोई योजना नहीं”
अनिल अंबानी ने अपने हलफनामे में कहा कि जुलाई 2025 से, यानी जांच शुरू होने के बाद से, वह भारत से बाहर नहीं गए हैं. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल विदेश यात्रा की कोई योजना नहीं है. अगर भविष्य में किसी कारण से विदेश जाना जरूरी हुआ, तो वह पहले सुप्रीम कोर्ट से अनुमति लेंगे. अंबानी ने खुद को “फ्लाइट रिस्क” मानने से भी इनकार किया.
“फ्लाइट रिस्क” का मतलब है कि किसी व्यक्ति के देश छोड़कर भाग जाने की आशंका हो, ताकि वह जांच या अदालत की कार्रवाई से बच सके.
जांच एजेंसियों से सहयोग का दावा
हलफनामे में अंबानी ने कहा कि वह प्रवर्तन निदेशालय और अन्य जांच एजेंसियों के साथ पूरी ईमानदारी से सहयोग कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि उन्हें प्रवर्तन निदेशालय ने 26 फरवरी 2026 को पेश होने के लिए समन भेजा है और वह तय तारीख पर जांच में शामिल होंगे. उनका कहना है कि उनका व्यवहार पारदर्शी रहा है और वह किसी भी तरह की जांच से पीछे नहीं हट रहे हैं.
याचिका के जवाब में दाखिल हुआ हलफनामा
यह हलफनामा पूर्व ब्यूरोक्रेट ई ए एस सरमा की ओर से दायर जनहित याचिका के जवाब में दाखिल किया गया है. सरमा ने याचिका में अनिल अंबानी, एडीएजी और उससे जुड़ी कंपनियों पर बड़े पैमाने पर बैंकिंग और कॉरपोरेट फ्रॉड के आरोप लगाए हैं. याचिका में सार्वजनिक धन की कथित हेराफेरी, वित्तीय खातों में गड़बड़ी और संस्थागत मिलीभगत की बात कही गई है.
सरमा की आशंका पर वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी के जरिए अनिल अंबानी ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि वह अदालत की अनुमति के बिना विदेश नहीं जाएंगे. अंबानी ने कहा कि वह जांच में पूरा सहयोग करेंगे और किसी भी तरह के संदेह की गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहते.
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सुप्रीम कोर्ट की सख्ती
इससे पहले 4 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने जांच में हो रही देरी पर नाराजगी जताई थी. कोर्ट ने सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय को निर्देश दिया था कि मामले की निष्पक्ष, तेज और बिना किसी पक्षपात के जांच की जाए. सुनवाई के दौरान सरमा ने आशंका जताई थी कि अनिल अंबानी देश छोड़ सकते हैं.
