भारत में बनेगा विदेशी सैन्य विमान का बड़ा सर्विस सेंटर, Embraer-Mahindra भारत में खोलेंगे हाईटेक MRO

रक्षा और एयरोस्पेस सेक्टर से जुड़ी एक बड़ी पहल पर सरकार और उद्योग जगत की नजरें टिकी हैं. विदेशी तकनीक और भारतीय साझेदारी के इस कदम से देश की सैन्य तैयारी, स्थानीय उद्योग और रोजगार के नए अवसरों पर असर पड़ सकता है. आने वाले समय में यह फैसला रणनीतिक रूप से अहम साबित हो सकता है.

एयरक्राफ्ट (प्रतिकात्मक तस्वीर) Image Credit: tv9marathi

भारत के रक्षा और एयरोस्पेस सेक्टर के लिए एक अहम कदम सामने आया है. ब्राजील की विमान निर्माता कंपनी Embraer ने गुरुवार को घोषणा की कि वह महिंद्रा ग्रुप के साथ मिलकर भारत में मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) सुविधा स्थापित करने की योजना बना रही है. भारतीय वायुसेना के मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (MTA) कार्यक्रम में चुना गए C-390 Millennium सैन्य परिवहन विमान के लिए ये सुविधा तैयार की जा रही है. यह कदम भारत में स्थानीयकरण और ‘मेक इन इंडिया’ पहल को मजबूती देने की दिशा में अहम माना जा रहा है.

भारत में C-390 के लिए पूरी सपोर्ट व्यवस्था

Embraer के मुताबिक प्रस्तावित MRO सुविधा भारत में C-390 Millennium विमानों के पूरे बेड़े के लिए व्यापक रखरखाव और सपोर्ट उपलब्ध कराएगी. इसका उद्देश्य विमानों की ऑपरेशनल तैयारी और उपलब्धता को ऊंचे स्तर पर बनाए रखना है. कंपनी का कहना है कि यह सुविधा सिर्फ मरम्मत तक सीमित नहीं होगी, बल्कि लंबे समय तक विमानों की विश्वसनीय सेवा सुनिश्चित करेगी. Embraer और महिंद्रा ग्रुप ने अक्टूबर 2025 में ही इस रणनीतिक साझेदारी पर हस्ताक्षर किए थे.

MबRO में क्या-क्या सेवाएं मिलेंगी

इस MRO सेंटर में बेस और हेवी मेंटेनेंस, स्ट्रक्चरल इंस्पेक्शन और टेस्टिंग, कंपोनेंट रिपेयर और ओवरहॉल, एवियोनिक्स सपोर्ट और ट्रेनिंग जैसी सेवाएं शामिल होंगी. Embraer का कहना है कि इससे भारतीय वायुसेना को अपने विमानों के लिए विदेशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और रखरखाव से जुड़ी जरूरतें देश में ही पूरी हो सकेंगी.

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C-390 Millennium की खासियत

C-390 Millennium को अपनी कैटेगरी का सबसे आधुनिक सैन्य परिवहन विमान माना जाता है. इसकी अधिकतम पेलोड क्षमता करीब 26 टन है और यह तेज रफ्तार तथा लंबी रेंज मुहैया करता है. यह विमान कार्गो और सैनिकों की ढुलाई, मेडिकल इवैक्यूएशन, सर्च एंड रेस्क्यू, फायरफाइटिंग और मानवीय सहायता जैसे कई मिशनों में इस्तेमाल किया जा सकता है. यह अस्थायी या कच्चे रनवे से भी उड़ान भर सकता है और एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग के लिए भी तैयार किया जा सकता है.