CBIC ला रहा नई EMI स्कीम, मैन्युफैक्चरर-इम्पोर्टर को मिलेगी बड़ी राहत; 1 मार्च से होगी लागू
सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेस एंड कस्टम्स 1 मार्च से Eligible Manufacturer-Importer (EMI) स्कीम शुरू करने की तैयारी में है. इस नई व्यवस्था के तहत एलिजिबल मैन्यूफैक्चर्स इंपोर्टर को कस्टम्स से जुड़ी कई सहूलियतें मिलेगी. इसकी जानकारी CBIC के चेयरमैन विवेक चतुर्वेदी ने दी.
देश में कारोबार को आसान बनाने की दिशा में सरकार एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है. सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेस एंड कस्टम्स (CBIC) 1 मार्च से Eligible Manufacturer-Importer (EMI) स्कीम शुरू करने की तैयारी में है. इस नई व्यवस्था के तहत एलिजिबल मैन्यूफैक्चर्स इंपोर्टर को कस्टम्स से जुड़ी कई सहूलियतें मिलेगी हैं.
जल्द आएगा ड्राफ्ट फ्रेमवर्क
मुंबई में मीडिया से बातचीत के दौरान CBIC के चेयरमैन विवेक चतुर्वेदी ने बताया कि EMI स्कीम का ड्राफ्ट फ्रेमवर्क अगले पांच-छह दिनों में जारी किया जाएगा. इसके बाद संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे जाएंगे. उन्होंने कहा कि स्कीम को शुरुआत में दो साल के लिए लागू किया जाएगा. इसे एक तरह से लाभों का “प्रीव्यू” माना जा रहा है.
किन्हें मिलेगा फायदा
अधिकारियों के मुताबिक, ऐसे निर्माता जो अभी Authorized Economic Operator (AEO) का दर्जा नहीं रखते, उन्हें EMI स्कीम के तहत लाभ दिए जाएंगे. दो साल की इस अवधि में कंपनियों को तय नियमों का पालन करना होगा. इसके बाद उन्हें AEO सर्टिफिकेशन लेने की दिशा में आगे बढ़ना होगा.
सरकार की रणनीति क्या है?
सरकार फिलहाल पात्रता के मानदंड तय करने में जुटी है. इसके लिए एक आंतरिक समिति काम कर रही है. स्कीम की पूरी रूपरेखा जल्द सार्वजनिक की जाएगी. CBIC चेयरमैन ने बताया है कि यह स्कीम भरोसे पर आधारित प्रशासन और तकनीक-आधारित कस्टम्स व्यवस्था के बड़े लक्ष्य का हिस्सा है.
टेक्नोलॉजी से तेज होगा काम
कस्टम्स प्रक्रिया को और तेज व आसान बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है. नई व्यवस्था का मकसद फिजिकल जांच और मानव हस्तक्षेप कम करना है. इससे माल की क्लियरेंस प्रक्रिया तेज हो सकेगी.
यूनियन बजट 2026-27 में सरकार ने पात्र निर्माता-आयातकों को ड्यूटी डिफरल सुविधा देने का प्रस्ताव रखा है.
इसका सीधा फायदा यह होगा कि कंपनियां तुरंत ड्यूटी का बोझ महसूस किए बिना काम कर सकेंगी. साथ ही, उन्हें Tier-3 AEO बनने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा.
एडवांस रूलिंग की वैधता बढ़ेगी
इसके अलावा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कस्टम्स से जुड़ी एडवांस रूलिंग की वैधता अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है. अब यह अवधि 3 साल से बढ़ाकर 5 साल की जा सकती है. इससे कारोबारियों को ज्यादा स्पष्टता और बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी.
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