Forbes 250 में भारतीय मूल का दबदबा, विनोद खोसला–सुंदर पिचाई समेत कई नाम चमके, एलन मस्क फिर नंबर वन

2026 की Forbes 250 लिस्ट में एलन मस्क पहले स्थान पर हैं, जबकि कई भारतीय मूल के नेता भी प्रमुखता से शामिल हैं. विनोद खोसला और जय चौधरी जैसे संस्थापकों के साथ सत्य नडेला, सुंदर पिचाई और अन्य CEO ने बड़ी कंपनियों को नई दिशा दी. यह लिस्ट अमेरिकी इनोवेशन में भारतीय प्रतिभा की मजबूत उपस्थिति दिखाती है.

फोर्ब्स 250 की लिस्ट

Forbes 250: America’s Greatest Innovators की 2026 लिस्ट फिर चर्चा में है. इसबार टॉप पर हैं एलनमस्क. फोर्ब्स ने उन्हें ऐसे शख्स के रूप में पेश किया है जिन्होंने अलग-अलग उद्योगों में पांच मल्टी बिलियन डॉलर कंपनियां खड़ी या तेजी से बढ़ाईं. हालांकि लिस्ट में भारतीय मूल के भी कई बिजनेसमैन के नाम है.

फाउंडर–रिस्क टेकर

भारतीय मूल के टॉप रैंक वाले इनोवेटर्स में विनोद खोसला प्रमुख हैं. वे Khosla Ventures के संस्थापक और Sun Microsystems के सह-संस्थापक हैं. फोर्ब्स ने उनकी ब्लैक स्वान निवेश सोच की सराहना की है यानी ऐसी तकनीकों में शुरुआती निवेश जो असंभव या बहुत जोखिमपूर्ण लगती थीं, जैसे OpenAI, टिकाऊ ऊर्जा और सिंथेटिक बायोलॉजी.

इसी कैटेगरी में जय चौधरी, Zscaler के संस्थापक और CEO हैं. हिमाचल प्रदेश के एक ऐसे गांव में जन्मे जहां बिजली नहीं थी, उन्होंने आईआईटी बीएचयू से शिक्षा प्राप्त की. उन्होंने Zero Trust क्लाउड सुरक्षा मॉडल विकसित किया, जिसने पारंपरिक फायरवॉल उद्योग को चुनौती दी.

मैनेजर–इनोवेटर

फोर्ब्स ने जिन भारतीय मूल के नेताओं को Transformative Leaders कहा है, वे पहले से स्थापित बड़ी कंपनियों को नई दिशा देने वाले CEO हैं. सत्य नडेला को माइक्रोसॉफ्ट को एआई-केंद्रित कंपनी बनाने का श्रेय दिया गया है. OpenAI के साथ साझेदारी और Copilot रणनीति ने कंपनी की दिशा बदल दी. हैदराबाद में जन्मे और मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से शिक्षित नडेला ने एक पुरानी टेक कंपनी को नई पहचान दी. सुंदर पिचाई, आईआईटी खड़गपुर के पूर्व छात्र, ने Alphabet को एआई-फर्स्ट दिशा दी. Gemini और DeepMind के एकीकरण के साथ-साथ Chrome जैसे प्रोडक्ट के जरिए उन्होंने इंटरनेट की दुनिया में बड़ा बदलाव किया.

शांतनु नारायण ने Adobe को बॉक्स सॉफ्टवेयर कंपनी से क्लाउड-आधारित सदस्यता मॉडल (Creative Cloud) में बदला और अब Firefly के माध्यम से एआई-जनरेटिव क्षेत्र में आगे बढ़ाया. अरविंद कृष्णा, आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र, IBM को हाइब्रिड क्लाउड और क्वांटम कंप्यूटिंग की दिशा में ले जा रहे हैं. वहीं नई पीढ़ी के नेताओं में नील मोहन (YouTube) शामिल हैं, जो क्रिएटर अर्थव्यवस्था और एआई वीडियो टूल्स पर काम कर रहे हैं. रेश्मा साउजानी, Girls Who Code और Moms First की संस्थापक, तकनीक में लैंगिक अंतर कम करने के सामाजिक नवाचार के लिए पहचानी गई हैं.

उभरता हुआ पैटर्न

लिस्ट में आईआईटी दिल्ली, खड़गपुर, कानपुर और बीएचयू जैसे संस्थानों के पूर्व छात्र बार-बार दिखाई देते हैं. इससे स्पष्ट होता है कि भारत के इंजीनियरिंग संस्थान वैश्विक नेतृत्व के लिए मजबूत आधार बन चुके हैं. दिलचस्प बात यह है कि विनोद खोसला और जय चौधरी जैसे कुछ अपवादों को छोड़कर, अधिकांश भारतीय मूल के नाम नई स्टार्टअप बनाने के बजाय पुरानी और जटिल कंपनियों को भीतर से बदलने के लिए पहचाने गए हैं.

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