विप्रो के कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, 1 मार्च से बढ़ाएगी सैलरी; जानें- कंपनी का प्लान
टैरिफ वॉर और जियो-पॉलिटिकल उथल-पुथल के कारण अनिश्चित बिजनेस हालात के बाद, भारतीय IT सर्विस कंपनियां इस फाइनेंशियल ईयर में सैलरी बढ़ाने और सैलरी के अलग-अलग हिस्सों का पेमेंट करने में सावधान रही हैं. विप्रो बड़ी IT कंपनियों में सबसे आखिर में सैलरी बढ़ाने वाली कंपनी है.
दिग्गज आईटी कंपनी विप्रो 1 मार्च से अपने सभी कर्मचारियों की सैलरी बढ़ा रही है, जिससे उनके कर्मचारियों को बहुत जरूरी राहत मिलेगी, क्योंकि सितंबर में सैलरी बढ़ाने में देरी हुई थी. कंपनी के एक इंटरनल ईमेल के अनुसार इस बात की जानकारी सामने आई है. हालांकि, बढ़ोतरी का परसेंटेज तुरंत नहीं बताया गया. टैरिफ वॉर और जियो-पॉलिटिकल उथल-पुथल के कारण अनिश्चित बिजनेस हालात के बाद, भारतीय IT सर्विस कंपनियां इस फाइनेंशियल ईयर में सैलरी बढ़ाने और सैलरी के अलग-अलग हिस्सों का पेमेंट करने में सावधान रही हैं.
TCS ने अप्रैल से सितंबर तक बढ़ोतरी टाल दी, और ज्यादातर कर्मचारियों को 4.5 से 7 फीसदी के बीच बढ़ोतरी दी. अगस्त में देरी करने के बाद, कॉग्निजेंट ने आखिरकार नवंबर से सैलरी बढ़ा दी.
कब फैसला लेगी?
विप्रो बड़ी IT कंपनियों में सबसे आखिर में सैलरी बढ़ाने वाली कंपनी है. कंपनी ने बार-बार कहा है कि वह बिजनेस के माहौल के हिसाब से फैसला लेगी. जनवरी में चीफ ह्यूमन रिसोर्स ऑफिसर सौरभ गोविल ने कहा था कि वे जल्द ही इस पर फैसला लेने वाले हैं. बिजनेस स्टैंडर्ड के कमेंट के लिए संपर्क करने पर कंपनी ने कोई जवाब नहीं दिया.
वेरिएबल पे
विप्रो ने 31 दिसंबर 2025 को खत्म हुई तीसरी तिमाही के लिए 100 परसेंट तिमाही वेरिएबल पे भी दिया है, जो कर्मचारियों को फरवरी की सैलरी के साथ दिया जाएगा. हालांकि सैलरी बढ़ाने में देरी हुई, लेकिन कंपनी वेरिएबल पेमेंट में दिल खोलकर काम कर रही है. पहली दो तिमाहियों में भी, इसने सभी कर्मचारियों को 90 परसेंट से ज्यादा पेमेंट किया.
कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट
विप्रो लिमिटेड ने फिस्कल ईयर की तीसरी तिमाही में प्रॉफिट में गिरावट की रिपोर्ट दी है, जिसमें कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट में लगातार और साल-दर-साल आधार पर गिरावट आई है, जबकि IT सर्विस देने वाली बड़ी कंपनी ने मामूली रेवेन्यू ग्रोथ दी और इंटरिम डिविडेंड की घोषणा की.
कंपनी ने 31 दिसंबर 2025 को खत्म हुई तिमाही के लिए 3,119 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट पोस्ट किया, जो तिमाही-दर-तिमाही 4 फीसदी और साल-दर-साल 7 फीसदी कम है़. कंपनी ने अपनी प्रेस रिलीज में कहा कि कमाई पर कॉस्ट प्रेशर का असर पड़ा, जिसमें लेबर कोड से जुड़े एडजस्टमेंट से जुड़े खर्च भी शामिल हैं.
लेबर कोड में बदलाव के असर को एडजस्ट करने के बाद, तिमाही के लिए नेट इनकम 3,360 करोड़ रुपये थी. QoQ में 3.6 फीसदी और YoY में 0.3 परसेंट की बढ़ोतरी हुई.
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