5 साल में 15 देशों ने बढ़ाए 2000 टन गोल्ड रिजर्व, चीन सबसे आगे; भारत किस पायदान पर और किसने की बिकवाली?
2020 के बाद सोने की कीमतों में 230 फीसदी से ज्यादा उछाल के बीच केंद्रीय बैंकों ने बड़े पैमाने पर खरीदारी की है. चीन, पोलैंड, भारत और तुर्किये जैसे देशों ने गोल्ड रिजर्व बढ़ाए, जबकि कुछ देशों ने भंडार घटाया. डॉलर पर निर्भरता कम करने और वैश्विक अनिश्चितता के बीच सोना फिर रणनीतिक एसेट बनकर उभरा है, जानें भारत किस नंबर पर.
Gold Reserve in 5 Years and 15 Countries: साल 2020 के बाद से सोने की कीमतों में 230 फीसदी से ज्यादा की जबरदस्त तेजी देखने को मिली है. इस उछाल के साथ ही दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने बड़े पैमाने पर सोना खरीदना शुरू कर दिया. बीते पांच वर्षों में यह आधुनिक इतिहास की सबसे बड़ी गोल्ड खरीद लहरों में से एक मानी जा रही है. अब कई देशों के लिए सोना सिर्फ निवेश या महंगाई से बचाव का जरिया नहीं रहा, बल्कि यह रणनीतिक रिजर्व एसेट बन गया है. बढ़ते जियो पॉलिटिकल टेंशन, डॉलर पर निर्भरता कम करने की कोशिश और मुद्रा में उतार-चढ़ाव के जोखिम ने केंद्रीय बैंकों को अपने भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए प्रेरित किया. हालांकि सभी देशों ने एक जैसा रुख नहीं अपनाया- कुछ ने जमकर खरीदारी की, तो कुछ ने अपने रिजर्व घटाए भी.
चीन और पूर्वी यूरोप सबसे आगे
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, 2020 से 2025 के बीच सबसे ज्यादा सोना खरीदने वाले 15 देशों ने मिलकर लगभग 2,000 टन का शुद्ध इजाफा किया. इस फेहरिस्त में सबसे आगे चीन रहा, जिसने इस अवधि में 357 टन से अधिक सोना जोड़ा. यह कदम अमेरिका डॉलर पर निर्भरता कम करने और पश्चिमी वित्तीय सिस्टम से जोखिम घटाने की उसकी लॉन्ग टर्म प्लानिंग का हिस्सा माना जा रहा है. चीन के लिए सोना एक “राजनीतिक रूप से तटस्थ” और सुरक्षित संपत्ति के रूप में उभरा है.
भारत किस पायदान पर?
पोलैंड दूसरे स्थान पर रहा, जिसने 300 टन से ज्यादा सोना खरीदा. यह कदम उसकी मौद्रिक सुरक्षा को मजबूत करने की योजना का हिस्सा है. तुर्किये और भारत भी शीर्ष खरीदारों में शामिल रहे. इन दोनों देशों में महंगाई और मुद्रा अस्थिरता की चुनौती बनी रही है, ऐसे में सोना विदेशी मुद्रा भंडार को संतुलित करने का एक मजबूत साधन बना. ब्राजील ने 100 टन से ज्यादा सोना जोड़ा. वहीं अजरबैजान, जापान, थाईलैंड, हंगरी और सिंगापुर जैसे देशों ने भी अपने भंडार में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की. इससे साफ है कि सिर्फ एशिया ही नहीं, बल्कि उभरती अर्थव्यवस्थाएं भी सोने को सुरक्षित विकल्प के रूप में देख रही हैं. नीचे दिए गए टेबल से समझें हिसाब…
| रैंक | देश | शुद्ध बढ़ोतरी (टन में) |
|---|---|---|
| 1 | चीन | +357.1 |
| 2 | पोलैंड | +314.6 |
| 3 | तुर्किये | +251.8 |
| 4 | भारत | +245.3 |
| 5 | ब्राजील | +105.1 |
| 6 | अजरबैजान | +83.6 |
| 7 | जापान | +80.8 |
| 8 | थाईलैंड | +80.6 |
| 9 | हंगरी | +78.5 |
| 10 | सिंगापुर | +77.3 |
| 11 | इराक | +74.6 |
| 12 | कतर | +73.0 |
| 13 | चेक गणराज्य | +62.8 |
| 14 | रूस | +55.4 |
| 15 | संयुक्त अरब अमीरात | +51.7 |
किन देशों ने घटाया भंडार?
जहां कई देशों ने सोना खरीदा, वहीं कुछ देशों ने अपने भंडार में कटौती भी की. फिलीपींस ने सबसे ज्यादा कमी दर्ज की और 65 टन से अधिक सोना घटाया. कजाखस्तान और श्रीलंका ने भी अपने भंडार कम किए. इन देशों में घरेलू आर्थिक दबाव, नकदी की जरूरत या रिजर्व संतुलन की रणनीति इसके पीछे कारण हो सकते हैं. यूरोप के कुछ देशों- जैसे जर्मनी और फिनलैंड ने भी मामूली कटौती की. स्विट्जरलैंड में बदलाव बेहद सीमित रहा, जो उसकी स्थिर और संतुलित गोल्ड पॉलिसी को दर्शाता है. नीचे टेबल से समझें…
| रैंक | देश | शुद्ध कमी (टन में) |
|---|---|---|
| 1 | फिलीपींस | -65.2 |
| 2 | कजाखस्तान | -52.4 |
| 3 | श्रीलंका | -19.1 |
| 4 | जर्मनी | -16.3 |
| 5 | मंगोलिया | -15.9 |
| 6 | ताजिकिस्तान | -11.9 |
| 7 | यूरो एरिया (औसत) | -10.8 |
| 8 | कोलंबिया | -9.2 |
| 9 | फिनलैंड | -5.4 |
| 10 | कुरासाओ एवं सेंट मार्टेन | -3.9 |
| 11 | सोलोमन आइलैंड्स | -0.6 |
| 12 | सूरीनाम | -0.4 |
| 13 | माल्टा | -0.3 |
| 14 | इथियोपिया | -0.2 |
| 15 | स्विट्जरलैंड | -0.1 |
क्या संकेत देते हैं ये आंकड़े?
इन आंकड़ों से साफ है कि वैश्विक स्तर पर सोना फिर से केंद्रीय बैंकों के लिए भरोसेमंद आधार बन गया है. हालांकि सभी देश एक जैसी रणनीति नहीं अपना रहे, लेकिन अनिश्चित वैश्विक आर्थिक माहौल में सोना आज भी सुरक्षित और स्थिर संपत्ति के रूप में देखा जा रहा है. डॉलर पर निर्भरता घटाने, महंगाई से बचाव और जियो पॉलिटिकल रिस्क के बीच सोना एक बार फिर वैश्विक रिजर्व सिस्टम का अहम स्तंभ बनता दिख रहा है. आने वाले वर्षों में भी केंद्रीय बैंकों की रणनीति में इसकी भूमिका महत्वपूर्ण बनी रह सकती है.
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