कॉपर ने बनाया रिकॉर्ड, पहली बार 13000 डॉलर प्रति टन के पार, सप्लाई संकट ने बढ़ाई मांग

कॉपर की कीमत पहली बार $13,000 प्रति टन के पार पहुंच गई है, सप्लाई बाधाओं और बढ़ती वैश्विक मांग ने बाजार में जबरदस्त तेजी पैदा की है. विश्लेषकों का मानना है कि 2026 में कॉपर की भारी कमी से कीमतों में मजबूती बनी रह सकती है.

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Copper hits new record: मेटल सेक्‍टर में शुरू से ही सोने-चांदी का दबदबा रहा है, लेकिन कॉपर इन्‍हें पीछे छोड़ता नजर आ रहा है. इंडस्‍ट्रियल मेटल की दुनिया में कॉपर ने नया इतिहास रच दिया है. पहली बार कॉपर की कीमत 13,000 डॉलर प्रति टन के स्तर को पार कर गई है. यह तेजी पिछले साल शुरू हुई जबरदस्त रैली का ही विस्तार मानी जा रही है. जानकारों के मुताबिक खदानों में रुकावट, सप्लाई डिसलोकेशन और बढ़ती वैश्विक मांग ने इसकी डिमांड बढ़ा दी है. जिसके चलते कीमतों मजें देखने को मिली.

लंदन में बेंचमार्क फ्यूचर्स में एक ही दिन में 4.3% तक की उछाल देखने को मिली. चिली की Mantoverde कॉपर माइन में हड़ताल के चलते सप्लाई बाधित होने की वजह से कॉपर की कीमतों में जबरदस्‍त उछाल देखने को मिला. तांबे की कीमतें ऐसे समय बढ़ी है जब डेटा सेंटर्स, इलेक्ट्रिक कार बैटरी और एनर्जी ट्रांजिशन से जुड़ी परियोजनाओं के चलते इसकी मांग लगातार बढ़ रही है.

4% से ज्‍यादा की तेजी

लंदन के London Metal Exchange पर नया रिकॉर्ड बनाने वाला कॉपर बाद में थोड़ा लुढ़का. हालांकि अभी भी तीन महीने वाला कॉपर कॉन्ट्रैक्ट 4.19% की तेजी के साथ 12991.50 डॉलर प्रति टन पर कारोबार करता देखा गया. कॉपर 2025 में 42% तक उछला था, जो 2009 के बाद इसका सबसे बेहतरीन सालाना प्रदर्शन है.

क्‍यों बढ़ी कॉपर की कीमतें?

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क्‍या है अनुमान?

चीन सिक्योरिटीज के एनालिस्ट्स का कहना है कि सप्लाई शॉर्टफॉल और अमेरिका के टैरिफ से पैदा हुई क्षेत्रीय असंतुलन कॉपर की कीमतों को ऊपर धकेल रहे हैं. उनका अनुमान है कि 2026 में ग्लोबल कॉपर मार्केट में 1 लाख टन से ज्यादा की कमी देखने को मिल सकती है.