Gold-Silver Price Today: जंग और डॉलर की मजबूती से दबाव में सोना, बाद में की जोरदार रिकवरी, एक हफ्ते के लो से ₹7,700 उछला

MCX पर सोना लो लेवल से उछलकर हफ्ते के अंत में करीब ₹1,44,500 पर पहुंच गया. आखिरी दौर में इसमें रिकवरी दिखी. मजबूत डॉलर, ऊंची ब्याज दरें और पश्चिम एशिया तनाव से सोने पर दबाव देखने को मिला.

gold price today Image Credit: canva/AI image

Gold-Silver Price Today: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, मजबूत डॉलर और ऊंची ब्याज दरों के दबाव के बीच सोने की चाल इस हफ्ते उतार-चढ़ाव भरी रही. हालांकि हफ्ते के अंत में सोना हल्‍की बढ़त के साथ बंद हुआ, लेकिन निचले स्तरों से इसमें जोरदार रिकवरी देखने को मिली है. ऐसे में उम्‍मीद की जा रही है कि सोना दोबारा वापसी करेगा और इसमें निवेश से फायदे की उम्‍मीद है.

भारत में कैसी रही चाल?

घरेलू वायदा बाजार MCX पर सोना हफ्ते के आखिर में करीब ₹1,44,500 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ. जबकि इस सप्‍ताह 23 मार्च को इसका लो लेवल ₹1,36,800 प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया था. यानी सोना अपने इस निचले स्तर से करीब 7,700 रुपये रिकवर कर चुका है.

ग्लोबल मार्केट का हाल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में COMEX गोल्ड 4,500 डॉलर प्रति औंस के ऊपर बंद हुआ. हालांकि इसके बावजूद सोना साप्ताहिक आधार पर करीब 1.85% की गिरावट के साथ बंद हुआ, जो बाजार में बने दबाव को दर्शाता है. वहीं स्‍पॉट सिल्‍वर की बात करें तो ये भी 2.85 फीसदी की बढ़त के साथ 69.77 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ.

सोने के गिरने की वजह

  • पश्चिम एशिया में जारी इजराइल-अमेरिका-ईरान तनाव के चलते निवेशक सोने में पैसा लगाने की बजाय कैश होल्ड करना बेहतर समझ रहें हैं.
  • इसके अलावा अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी, मजबूत डॉलर और केंद्रीय बैंकों का सख्त रुख ने सोने जैसे बिना ब्याज वाले निवेश को कम आकर्षक बना दिया.
  • हफ्ते की शुरुआत में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने सोने को सहारा दिया. ब्रेंट क्रूड करीब 120 डॉलर प्रति बैरल से गिरकर 93 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया जिससे महंगाई को लेकर चिंता थोड़ी कम हुई और सोने में खरीदारी देखने को मिली. मगर 28 मार्च को दोबारा ब्रेंट कूड 112 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है.
  • पश्चिम एशिया में हालात अभी भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं. अमेरिका ने जहां ईरान के साथ संघर्ष खत्म करने के लिए 15 पॉइंट का प्रस्ताव दिया है, वहीं ईरान ने भी अपनी शर्तें रखी हैं, जिनमें स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर नियंत्रण जैसी अहम मांग शामिल है.
  • जमीनी स्तर पर अभी भी हमले जारी हैं और सप्लाई चेन पर असर बना हुआ है. विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल में गिरावट के बावजूद भू-राजनीतिक जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं. यही वजह है कि तेल की कीमतों में एक रिस्क बना हुआ है, जो सोने की चाल को भी प्रभावित कर रहा है.