Gold-Silver Price: चांदी में आई ₹5700 की गिरावट, सोना भी ₹1600 फिसला; जानें कहां पहुंची कीमतें
दिल्ली सर्राफा बाजार में शुक्रवार को सोने-चांदी की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई. कमजोर घरेलू मांग और मजबूत डॉलर के दबाव के चलते चांदी 2.53 लाख रुपये प्रति किलो और सोना 1.56 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया. जानें क्या है एक्सपर्ट्स की राय और गिरावट की वजह.
Gold Silver Price 17 April: सप्ताह के आखिरी दिन यानी शुक्रवार, 17 अप्रैल को दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई. घरेलू मांग में कमजोरी के चलते चांदी की कीमत में भारी गिरावट आई और यह 5,700 रुपये टूटकर 2.53 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई. वहीं सोना भी कमजोर रहा और इसकी कीमत 1,600 रुपये घटकर 99.9 फीसदी शुद्धता वाले सोने के लिए 1,56,200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई. यह गिरावट बाजार में सुस्ती और निवेशकों की सतर्कता को दर्शाती है.
कितनी टूटी कीमतें?
ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के मुताबिक, चांदी में करीब 2.2 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जो एक दिन में बड़ी कमजोरी मानी जा रही है. वहीं सोने में भी करीब 1 फीसदी की गिरावट आई. बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल घरेलू स्तर पर मांग कमजोर बनी हुई है, जिससे कीमतों पर दबाव बना है.
क्या है एक्सपर्ट्स की राय?
विशेषज्ञों के अनुसार, सोने की कीमतें फिलहाल एक सीमित दायरे में बनी हुई हैं और बाजार में कोई बड़ा ट्रिगर नहीं दिख रहा है. निवेशक आने वाले दिनों में संभावित वैश्विक घटनाक्रम, खासकर सीजफायर के बाद की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. ऐसे में अनिश्चितता के चलते सोने में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, लेकिन फिलहाल यह एक सीमित दायरे में ही कारोबार कर रहा है.
अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने का रुख कुछ कमजोर रहा. स्पॉट गोल्ड 4,800 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे बना रहा और करीब 4,786 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड करता दिखा. इससे संकेत मिलता है कि सोने की तेजी फिलहाल कमजोर पड़ रही है. वहीं चांदी ने वैश्विक बाजार में हल्की मजबूती दिखाई और यह करीब 1.12 फीसदी की बढ़त के साथ 79.28 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई.
क्यों टूटे भाव?
विश्लेषकों का मानना है कि सोने पर दबाव का एक बड़ा कारण अमेरिकी डॉलर की मजबूती और बॉन्ड यील्ड्स का स्थिर रहना है. जब डॉलर मजबूत होता है, तो सोना निवेशकों के लिए महंगा हो जाता है, जिससे इसकी मांग घटती है. इसके अलावा, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े जियो पॉलिटिकल हालात को लेकर अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है, जिसके चलते निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपना रहे हैं. हालांकि, कुछ हद तक बातचीत और समझौते की उम्मीदें बाजार को सपोर्ट दे रही हैं, लेकिन ठोस प्रगति की कमी के कारण निवेशक बड़े दांव लगाने से बच रहे हैं.
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