Gold-Silver Outlook: अगले हफ्ते कैसी रहेगी सोने-चांदी की चाल? फेड संकेत और ग्लोबल डेटा पर टिकी नजर

सोना-चांदी की कीमतों में अगले हफ्ते अस्थिरता बनी रह सकती है. निवेशकों की नजर फेडरल रिजर्व के संकेत, पश्चिम एशिया के हालात और अहम आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी, जो बाजार की दिशा तय करेंगे. जानें क्या है एक्सपर्ट्स की राय.

कैसी रहेगी सोने-चांदी की चाल? Image Credit: @Money9live

Gold-Silver Price Outlook For 30 March Week: कीमती धातुओं के दाम अगले हफ्ते भी दबाव और उतार-चढ़ाव के बीच रह सकते हैं. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों की नजर पश्चिम एशिया में जारी तनाव और दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से आने वाले अहम आर्थिक आंकड़ों पर टिकी रहेगी, जो सोना-चांदी की दिशा तय करेंगे. खासतौर पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पावेल के बयान और दूसरे फेड अधिकारियों के संकेत बाजार के लिए बेहद अहम होंगे. ब्याज दरों को लेकर किसी भी तरह का संकेत सीधे तौर पर बुलियन डिमांड को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि ऊंची ब्याज दरें आमतौर पर सोने की चमक को कम कर देती हैं.

किन आंकड़ों पर टिकी है नजर?

विशेषज्ञों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में हालात अगर और बिगड़ते हैं तो निवेशक सेफ हेवन की ओर भाग सकते हैं, जिससे सोने-चांदी को सपोर्ट मिल सकता है. वहीं, अगर तनाव कम होता है तो कीमतों में नरमी भी देखने को मिल सकती है. आर्थिक आंकड़ों की बात करें तो आने वाले दिनों में मैन्युफैक्चरिंग PMI, जर्मनी और यूरोजोन के महंगाई आंकड़े, अमेरिका के कंज्यूमर कॉन्फिडेंस, नॉन फार्म पेरोल और रोजगार से जुड़े डेटा पर बाजार की खास नजर रहेगी. ये सभी फैक्टर ग्लोबल मार्केट सेंटीमेंट को प्रभावित करेंगे.

क्या है सोना-चांदी का मौजूदा हाल?

घरेलू बाजार में ट्रेडिंग वॉल्यूम थोड़ा कमजोर रह सकता है, क्योंकि अगले हफ्ते दो दिन (31 मार्च और 3 अप्रैल) कमोडिटी बाजार बंद रहेंगे. इसका असर कीमतों की चाल पर भी पड़ सकता है. पिछले हफ्ते की बात करें तो सोना हल्की गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि चांदी में मजबूती देखने को मिली. MCX पर सोना करीब 1.44 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर रहा, जबकि चांदी 0.52 फीसदी की बढ़त के साथ 2.27 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई. रुपये की कमजोरी ने घरेलू बाजार में सोने को कुछ सपोर्ट दिया है. हाल ही में रुपया डॉलर के मुकाबले 1 रुपये से ज्यादा टूटकर करीब 94.80 के स्तर तक पहुंच गया, जिससे आयातित धातुएं महंगी हो जाती हैं और कीमतों को सहारा मिलता है.

वैश्विक बाजार में भी गिरावट

वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों में करीब 2 फीसदी की गिरावट आई, जबकि चांदी ने हल्की बढ़त के साथ सप्ताह खत्म किया. चांदी की रिकवरी खासतौर पर ध्यान देने वाली रही, क्योंकि लंबे समय की गिरावट के बाद इसमें उछाल देखा गया.

ये भी पढे़ें- गैस सिलेंडर की बढ़ती डिमांड के बीच सरकार का बड़ा फैसला, केरोसिन की बढ़ाई सप्लाई

आखिर में क्या है एक्सपर्ट्स की वर्डिक?

विश्लेषकों के अनुसार, ETF निवेशकों की बिकवाली, कमजोर फिजिकल डिमांड, मजबूत डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने सोने पर दबाव बनाया. वहीं, शेयर बाजार में कमजोरी के चलते कुछ हद तक सेफ हेवन डिमांड भी बनी रही, लेकिन बढ़ती यील्ड के कारण सोने की पारंपरिक मजबूती सीमित रही. आगे की दिशा की बात करें तो सोना फिलहाल सीमित दायरे में रह सकता है, लेकिन रुख हल्का पॉजिटिव बना रह सकता है. वहीं, चांदी को मजबूत फिजिकल डिमांड से सपोर्ट मिल रहा है, खासकर चीन से. 2026 के शुरुआती दो महीनों में चीन का सिल्वर इंपोर्ट 206.76 मीट्रिक टन तक पहुंच गया, जो कई सालों का उच्च स्तर है और इससे ग्लोबल सप्लाई पर दबाव बना है.

ये भी पढ़ें- 3 हफ्ते में ₹26000 करोड़ तक का झटका झेल चुका US, फाइटर जेट से ड्रोन तक; ईरान युद्ध से भारी नुकसान में अमेरिका