वेस्ट एशिया संकट से निपटने की तैयारी में सरकार, नया SoP जारी; दिया पोर्ट्स को चार्जेस में राहत देने का सुझाव
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को देखते हुए भारत सरकार बंदरगाहों के जरिए व्यापार को सुचारू बनाए रखने की कोशिश कर रही है. नए SoP और संभावित शुल्क राहत जैसे कदमों का मकसद यही है कि वैश्विक संकट के बीच भारतीय व्यापार और लॉजिस्टिक्स पर असर कम से कम पड़े.
पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब वैश्विक व्यापार और समुद्री लॉजिस्टिक्स पर भी दिखाई देने लगा है. इस स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने देश के बंदरगाहों के लिए एक नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SoP) जारी की है. सरकार ने सुझाव दिया है कि बंदरगाह जरूरत पड़ने पर जहाजों और कार्गो से जुड़े विभिन्न शुल्कों में कमी, छूट या राहत देने पर विचार कर सकते हैं, ताकि व्यापार और सप्लाई चेन पर संकट का असर कम किया जा सके.
हर पोर्ट पर बनेगा नोडल अधिकारी
बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय ने सभी हितधारकों से चर्चा के बाद यह SoP जारी किया. इसके तहत हर बंदरगाह पर विभागाध्यक्ष या डिप्टी विभागाध्यक्ष स्तर के एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी. यह नोडल अधिकारी बंदरगाह पर आने वाली समस्याओं के समाधान के लिए एक सिंगल प्वाइंट ऑफ कॉन्टैक्ट होगा. उसे संबंधित मामले को सक्षम प्राधिकरण के सामने उठाकर 24 से 72 घंटे के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी.
स्टेकहोल्डर्स के साथ नियमित बैठकें
नई गाइडलाइन के अनुसार पोर्ट चेयरपर्सन को समय-समय पर शिपिंग लाइन, एक्सपोर्टर्स, टर्मिनल ऑपरेटर्स और कस्टम्स जैसे हितधारकों के साथ बैठक करनी होगी. इन बैठकों का उद्देश्य पश्चिम एशिया संकट की स्थिति पर नजर रखना और व्यापार से जुड़े वैध मुद्दों को जल्दी सुलझाना होगा.
शुल्क में राहत देने पर किया जा सकता है विचार
मंत्रालय ने कहा है कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए बंदरगाह उपयोगकर्ताओं के अनुरोध पर कुछ राहत उपायों पर विचार कर सकते हैं. इनमें स्टोरेज रेंट में कमी या छूट, जहाजों के शुल्क में बदलाव और अन्य चार्जेस में राहत जैसे कदम शामिल हो सकते हैं. यह फैसला हर पोर्ट की मौजूदा स्थिति के आधार पर केस-टू-केस लिया जाएगा.
मिडिल ईस्ट जाने वाले कार्गो के लिए अतिरिक्त व्यवस्था
सरकार ने यह भी कहा है कि संकट के दौरान मिडिल ईस्ट जाने वाले कार्गो को ट्रांसशिपमेंट कार्गो के रूप में स्टोर करने की अनुमति दी जा सकती है. जरूरत पड़ने पर ऐसे माल को रखने के लिए अतिरिक्त स्टोरेज एरिया भी दिया जा सकता है.
इसके अलावा बंदरगाह एड-हॉक कॉल वेसल्स को भी बर्थिंग की सुविधा दे सकते हैं, ताकि मिडिल ईस्ट जाने वाले ट्रांसशिपमेंट कार्गो को आसानी से उतारा या चढ़ाया जा सके.
जल्दी निपटाए जाएंगे एक्सपोर्ट कार्गो के मामले
मंत्रालय ने कहा है कि बंदरगाह परिसर में पड़े एक्सपोर्ट कार्गो को ‘Back to Town’ मूवमेंट के जरिए तेजी से बाहर भेजने की प्रक्रिया भी आसान बनाई जाएगी. यह काम कस्टम्स के साथ समन्वय करके किया जाएगा. साथ ही खराब होने वाले सामान यानी पेरिशेबल कार्गो को प्राथमिकता से हैंडल किया जाएगा, ताकि उनका नुकसान न हो. मिडिल ईस्ट से लौटने वाले एक्सपोर्ट कार्गो को भी प्राथमिकता दी जाएगी.
मंत्रालय ने यह भी निर्देश दिया है कि बंदरगाह कस्टम्स, DGFT और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ करीबी समन्वय बनाए रखें.
इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि पश्चिम एशिया संकट के बीच व्यापार और कार्गो मूवमेंट पर कम से कम असर पड़े और सभी राहत उपाय तय समयसीमा में लागू हो सकें.
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