क्रिप्टो प्लेटफॉर्म की ‘कानूनी’ स्थिति पर सरकार की सफाई, नियम नहीं फिर भी निगरानी जारी
क्रिप्टोकरेंसी को लेकर देशभर में भ्रम की स्थिति है—क्या यह भारत में वैध है या नहीं? संसद में पूछे गए एक सवाल पर सरकार ने कुछ ऐसा जवाब दिया है जो क्रिप्टो यूजर्स, निवेशकों और प्लेटफॉर्म्स सभी के लिए बहुत मायने रखता है. नियम हैं या नहीं? जानिए पूरा मामला.
Crypto Platform law in India: भारत सरकार ने सोमवार, 21 जुलाई को लोकसभा में स्पष्ट किया कि देश में फिलहाल क्रिप्टोकरेंसी और वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDAs) से जुड़े लेनदेन पर कोई सीधा नियमन नहीं है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि इनसे जुड़े प्लेटफॉर्म पूरी तरह आजाद हैं. सरकार ने कहा कि देशी और विदेशी प्लेटफॉर्म, जो भारतीय यूजर्स को सेवाएं दे रहे हैं, उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के नियमों के तहत निगरानी में रखा गया है.
नियम नहीं, लेकिन जिम्मेदारी तय
वित्त मंत्रालय ने कहा कि चूंकि भारत में फिलहाल क्रिप्टो या वर्चुअल एसेट्स पर कोई स्पष्ट रेगुलेशन नहीं है, इसलिए किसी खास प्लेटफॉर्म को “कानूनी” या “गैरकानूनी” घोषित करना संभव नहीं है. लेकिन अगर कोई विदेशी या देशी प्लेटफॉर्म भारतीयों को सेवाएं दे रहा है, तो उसे FIU-IND (Financial Intelligence Unit – India) में पंजीकरण कराना अनिवार्य है. यह प्रावधान मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत आता है.
निगरानी में वे जो रजिस्टर नहीं हैं
FIU की निगरानी में ऐसे प्लेटफॉर्म्स की डायनामिक लिस्ट बनाई जा रही है जो बिना रजिस्ट्रेशन के भारत में काम कर रहे हैं. इसका मकसद संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना और उन्हें ट्रैक करना है.
सरकार ने बताया कि वित्त अधिनियम 2022 के जरिए इनकम टैक्स एक्ट में सेक्शन 194S जोड़ा गया है. इसके तहत किसी भी वर्चुअल डिजिटल एसेट के ट्रांसफर पर 1% TDS काटना जरूरी है, चाहे वह लेनदेन किसी भारतीय प्लेटफॉर्म पर हो या किसी विदेशी प्लेटफॉर्म पर.
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रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) भी समय-समय पर क्रिप्टो में निवेश करने वालों को चेतावनी देता रहा है. RBI ने कहा है कि इस सेक्टर में आर्थिक, कानूनी और साइबर जोखिम काफी अधिक हैं, इसलिए निवेश से पहले पूरी जानकारी जरूरी है.
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