ग्रीनलैंड पर आमने-सामने अमेरिका और यूरोप, ट्रंप के EU टैरिफ से भारत को होगा फायदा! 27 जनवरी को हो सकता है बड़ा ऐलान
अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ते टैरिफ तनाव से भारत के लिए निर्यात के नए अवसर बन सकते हैं. अमेरिका की सख्त नीति से यूरोप वैकल्पिक व्यापारिक साझेदार तलाश रहा है. ऐसे में भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते को तेजी मिल सकती है.
India-EU FTA: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड को लेकर महत्वाकांक्षा अब यूरोपीय सहयोगियों के साथ टकराव का रूप लेती जा रही है. हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि कभी साथ युद्ध लड़ने वाले नाटो देश अब एक-दूसरे को आंखें दिखा रहे हैं. हाल ही में आठ यूरोपीय देशों ने ग्रीनलैंड में अपनी सेनाएं भेजकर एक सैन्य अभ्यास में हिस्सा लिया. इस कदम को सैन्य अभ्यास से ज्यादा अमेरिका को दिया गया राजनीतिक और रणनीतिक संदेश माना जा रहा है. इसके बाद ट्रंप ने इन आठ देशों पर 10 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान किया.
अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ता टैरिफ तनाव भारत के लिए एक बड़ा अवसर बन सकता है. अमेरिका की सख्त व्यापार नीति से यूरोप के कई देश प्रभावित हो रहे हैं. ऐसे समय में यूरोपीय संघ भारत के साथ व्यापारिक रिश्ते और मजबूत करने पर जोर दे सकता है. भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की बातचीत भी अंतिम चरण में है. जानकारों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक हालात भारत के निर्यात को नई रफ्तार दे सकते हैं.
अमेरिका के फैसले से यूरोप पर दबाव
अमेरिका ने यूरोप के कई देशों से आने वाले प्रोडक्ट पर टैरिफ लगाने का ऐलान किया है. इससे यूरोपीय निर्यातकों पर सीधा असर पड़ेगा. ऐसे माहौल में यूरोपीय संघ अमेरिका पर निर्भरता कम करना चाहता है. यही वजह है कि वह भारत जैसे स्थिर और भरोसेमंद व्यापारिक साझेदार की ओर तेजी से देख रहा है.
FTA को मिल सकती है तेजी
भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर लंबे समय से बातचीत चल रही है. अब उम्मीद है कि इस समझौते को जल्दी अंतिम रूप दिया जा सकता है. इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि यूरोपीय संघ इस समझौते के अमल और मंजूरी की प्रक्रिया को तेज कर सकता है. इससे भारतीय निर्यातकों को बड़ा फायदा मिलेगा.
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को लाभ
यूरोप भारत के लिए एक बड़ा बाजार है खासकर रेडीमेड कपड़े और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए. अमेरिका और यूरोप के बीच तनाव के कारण यूरोपीय खरीदार भारत की ओर ज्यादा झुक सकते हैं. इससे भारतीय कंपनियों को नए ऑर्डर मिलने की संभावना बढ़ेगी और रोजगार के अवसर भी बनेंगे.
भरोसेमंद ट्रेड पार्टनर का दर्जा
वैश्विक स्तर पर जब व्यापार अनिश्चितता बढ़ रही है तब भारत को एक स्थिर और भरोसेमंद देश माना जा रहा है. चीन और अमेरिका के बीच तनाव के दौरान भी भारत को इसका फायदा मिला है. अब यूरोपीय संघ के साथ भी ऐसा ही मौका बन सकता है जिससे भारत की वैश्विक व्यापार में भूमिका मजबूत होगी.
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गणतंत्र दिवस पर हो सकता है बड़ा ऐलान
भारत और यूरोपीय संघ के टॉप नेताओं की भारत यात्रा और शिखर बैठक इस रिश्ते को नई दिशा दे सकती है. गणतंत्र दिवस समारोह में यूरोपीय नेतृत्व की मौजूदगी से राजनीतिक और आर्थिक भरोसा और मजबूत होगा. इससे भारत और यूरोप के बीच व्यापारिक सहयोग को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है.
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