रिकॉर्ड स्तर पर देश का फॉरेक्स रिजर्व, $725 अरब के पार पहुंचा; मजबूत भंडार के बावजूद रुपया दबाव में

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 8.66 अरब डॉलर की बढ़त के साथ 725.727 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है, जो देश की मजबूत आर्थिक स्थिति को दर्शाता है. हालांकि, इसके बावजूद रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ, जिससे वैश्विक कारकों का दबाव साफ दिखाई देता है.

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार Image Credit: Getty image

RBI Forex Reserve: भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेक्स रिजर्व) ने एक बार फिर नई ऊंचाई छू ली है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 13 फरवरी को समाप्त सप्ताह में देश का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 8.66 अरब डॉलर की तेज बढ़ोतरी के साथ 725.727 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. यह अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है और इसे भारत की मजबूत बाहरी वित्तीय स्थिति का संकेत माना जा रहा है. वैश्विक आर्थिक अस्थिरता, जियो पॉलिटिकल टेंशन और मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच इतनी बड़ी बढ़ोतरी देश की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है.

RBI की सक्रिय भूमिका

आरबीआई के मासिक बुलेटिन से यह भी पता चलता है कि केंद्रीय बैंक ने हाल के महीनों में विदेशी मुद्रा बाजार में सक्रिय रूप से हस्तक्षेप किया है. दिसंबर के दौरान आरबीआई ने 18.33 अरब डॉलर की खरीदारी की, जबकि 28.35 अरब डॉलर की बिक्री भी की. इससे पहले नवंबर में भी केंद्रीय बैंक ने बाजार में शुद्ध रूप से करीब 9.7 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा बेची थी. आमतौर पर आरबीआई इस तरह की खरीद-फरोख्त के जरिए रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने और वित्तीय बाजारों में स्थिरता बनाए रखने की कोशिश करता है.

दबाव में रहा रुपया

दिलचस्प बात यह है कि विदेशी मुद्रा भंडार में रिकॉर्ड बढ़ोतरी के बावजूद भारतीय रुपया दबाव में रहा. शुक्रवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 31 पैसे कमजोर होकर 90.99 प्रति डॉलर (अस्थायी) पर बंद हुआ. रुपये की इस गिरावट के पीछे वैश्विक स्तर पर मजबूत डॉलर, ऊंची कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेश के प्रवाह में उतार-चढ़ाव जैसे कारकों को जिम्मेदार माना जा रहा है.

रिजर्व मजबूत लेकिन रुपया कमजोर

एक तरफ जहां देश का फॉरेक्स रिजर्व ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंचकर बाहरी झटकों से निपटने की क्षमता को मजबूत दिखा रहा है, वहीं दूसरी ओर रुपये की कमजोरी यह संकेत देती है कि अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिस्थितियां अभी भी भारतीय मुद्रा को प्रभावित कर रही हैं. आने वाले समय में वैश्विक बाजार की दिशा, पूंजी प्रवाह और आरबीआई की नीतियां रुपये और विदेशी मुद्रा भंडार की चाल तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी.

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