₹3.25 लाख करोड़ की डील से मिलेंगे 114 राफेल, वायुसेना को बड़ा बूस्ट, चीन-पाक की चुनौती के बीच सरकार की बड़ी तैयारी
भारत 114 राफेल F4 लड़ाकू एयरक्राफ्टों की खरीद की तैयारी में है, जिसकी लागत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये आंकी जा रही है. यह डील वायुसेना की घटती स्क्वाड्रन ताकत को मजबूत करेगी. MRFA प्रोग्राम के तहत ज्यादातर एयरक्राफ्ट भारत में बनेंगे.
Rafale F4 Deal: भारत अपनी वायुसेना को मजबूत करने के लिए अब तक की सबसे बड़ी फाइटर जेट डील की ओर बढ़ रहा है. सरकार 114 राफेल F4 लड़ाकू एयरक्राफ्टों की खरीद को मंजूरी देने की तैयारी में है.फ्रांस के राष्ट्रपति के भारत दौरे पर इस पर साइन होने की उम्मीद है. इस डील की अनुमानित कीमत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये है. यह सौदा सिर्फ नए फाइटर जेट खरीदने तक सीमित नहीं है बल्कि इससे भारत की रक्षा क्षमता और आत्मनिर्भरता दोनों को मजबूती मिलेगी. राफेल डील से वायुसेना की घटती ताकत को तुरंत सपोर्ट मिलेगा.
क्या है MRFA प्रोग्राम
MRFA यानी मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट प्रोग्राम के तहत भारत 114 राफेल F4 लड़ाकू एयरक्राफ्ट खरीदेगा. इनमें 88 सिंगल सीट और 26 ट्विन सीट ट्रेनर एयरक्राफ्ट शामिल होंगे. ये सभी एयरक्राफ्ट जमीन से ऑपरेट होने वाले होंगे और खासतौर पर वायुसेना के लिए होंगे. यह सौदा नौसेना के राफेल M एयरक्राफ्टों से अलग है. इस डील में सिर्फ एयरक्राफ्ट ही नहीं बल्कि हथियार ट्रेनिंग सिम्युलेटर और लॉन्ग टर्म मेंटेनेंस भी शामिल है. इससे वायुसेना को एक पूरी तरह तैयार कॉम्बैट पैकेज मिलेगा.
राफेल F4 है गेम चेंजर
राफेल F4 भारत के लिए टेक्नोलॉजी के लिहाज से बड़ा कदम है. इसमें एडवांस नेटवर्क सेंट्रिक वॉरफेयर सिस्टम होगा जिससे एयरक्राफ्ट आपस में तेजी से जानकारी साझा कर सकेंगे. बेहतर सैटेलाइट कम्युनिकेशन और आधुनिक सॉफ्टवेयर इसे ज्यादा घातक बनाते हैं. एक ही मिशन में कई तरह के ऑपरेशन करने की क्षमता इसे खास बनाती है. दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में राफेल की भूमिका अहम मानी जाती है. यही वजह है कि इसे वायुसेना का सबसे मजबूत फोर्स मल्टीप्लायर कहा जा रहा है.
भारत में बनेगा राफेल
इस डील का बड़ा फायदा यह है कि ज्यादातर एयरक्राफ्ट भारत में बनाए जाएंगे. पहले 18 एयरक्राफ्ट सीधे फ्रांस से तैयार हालत में आएंगे ताकि वायुसेना की जरूरत तुरंत पूरी हो सके. इसके बाद 96 एयरक्राफ्ट भारत में बनाए जाएंगे. नागपुर में मौजूद दसॉल्ट रिलायंस एयरोस्पेस फैक्ट्री इसका केंद्र बनेगी. इससे भारत सिर्फ खरीदार नहीं बल्कि मैन्युफैक्चरिंग हब बनेगा. आने वाले समय में यही फैक्ट्री दुनिया भर के राफेल प्रोग्राम में अहम भूमिका निभा सकती है.
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भारतीय कंपनियों को मिलेगा मौका
राफेल प्रोग्राम में इंडिया की भागीदारी भी काफी बड़ी होगी. टाटा, महिंद्रा और कई अन्य भारतीय कंपनियां इसके सप्लाई चेन का हिस्सा बनेंगी. शुरुआत में करीब 30 फीसदी तक स्वदेशी कंटेंट रहेगा जो आगे चलकर 60 फीसदी तक पहुंच सकता है. इंजन मेंटेनेंस और स्पेयर पार्ट्स से भारत में रोजगार और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर बढ़ेगा. इससे रक्षा क्षेत्र में प्राइवेट कंपनियों की भूमिका और मजबूत होगी. कुल मिलाकर यह डील देश की रक्षा इंडस्ट्री को नई ऊंचाई दे सकती है.
घटती स्क्वाड्रन ताकत के लिए जरूरी कदम
वायुसेना को फिलहाल स्क्वाड्रन की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है. जहां जरूरत 42 स्क्वाड्रन की है वहीं मौजूदा संख्या करीब 29 ही है. पुराने एयरक्राफ्ट तेजी से रिटायर हो रहे हैं और नए समय पर नहीं आ पा रहे. ऐसे में राफेल F4 डील एक जरूरी समाधान बनकर सामने आती है. चीन और पाकिस्तान की साझा सैन्य चुनौतियों के बीच यह सौदा भारत की सुरक्षा के लिए अहम है. राफेल से वायुसेना को समय मिलेगा ताकि स्वदेशी फाइटर प्रोजेक्ट मजबूत हो सकें.




