भारत-दक्षिण कोरिया की दोस्ती में लगेगा नया ‘गियर’! सेमीकंडक्टर से लेकर जहाज तक, अब हर सेक्टर में बढ़ेगा मुनाफा
भारत और दक्षिण कोरिया ने CEPA समझौते को अपग्रेड करने पर बातचीत शुरू करने का फैसला किया है. पीएम मोदी और राष्ट्रपति ली जे म्युंग की बैठक में व्यापार, सेमीकंडक्टर, AI और इंडो-पैसिफिक सहयोग पर जोर दिया गया, जिससे दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को नई गति मिलने की उम्मीद है.
India South Korea CEPA upgrade: वैश्विक तनाव और भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच भारत और दक्षिण कोरिया ने अपनी दोस्ती को एक नई ऊंचाई पर ले जाने का संकल्प लिया है. सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे मायुंग के बीच हुई हाई-प्रोफाइल बैठक में दोनों देशों ने अपने व्यापारिक समझौते (CEPA) को अपग्रेड करने के लिए बातचीत शुरू करने पर सहमति जताई. पीएम मोदी ने साफ कर दिया कि यह साझेदारी अब सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने वाला एक ‘फ्यूचरिस्टिक’ गठबंधन बनेगी.
‘चिप्स से लेकर शिप्स’ तक हर क्षेत्र में सहयोग
प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक के बाद साझा बयान में इस साझेदारी के विस्तार का खाका खींचा. उन्होंने कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया मिलकर दुनिया को शांति और स्थिरता का संदेश दे रहे हैं. किन क्षेत्रों पर रहेगा जोर:
- तकनीक और टैलेंट: सेमीकंडक्टर (चिप्स), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और उभरती हुई टेक्नोलॉजी.
- इंफ्रास्ट्रक्चर: जहाज निर्माण (शिप्स) से लेकर ऊर्जा और मनोरंजन तक.
- सुरक्षा: सामरिक और महत्वपूर्ण तकनीकों में गहरा सहयोग.
इंडो-पैसिफिक में शांति के लिए साझा विजन
दुनिया भर में चल रहे तनाव के बीच दोनों देशों ने इंडो-पैसिफिक (हिंद-प्रशांत) क्षेत्र की सुरक्षा पर भी लंबी चर्चा की. पीएम मोदी ने कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया एक समावेशी, शांतिपूर्ण और प्रगतिशील इंडो-पैसिफिक के लिए मिलकर काम करते रहेंगे. राष्ट्रपति ली की इस यात्रा को दोनों देशों के बीच भरोसे को एक आधुनिक साझेदारी में बदलने वाले कदम के रूप में देखा जा रहा है.
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व्यापारिक रिश्तों को मिलेगी नई रफ्तार
बता दें कि साल 2010 में ‘व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते’ (CEPA) के लागू होने के बाद से दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों में काफी मजबूती आई थी. अब बदलते वैश्विक हालातों को देखते हुए इसे ‘अपग्रेड’ करने का फैसला लिया गया है ताकि व्यापार में आने वाली बाधाओं को दूर किया जा सके और निवेश के नए रास्ते खोले जा सकें. पीएम मोदी के शब्दों में कहें तो, अब भारत और दक्षिण कोरिया की साझेदारी का दायरा ‘टैलेंट से लेकर टेक्नोलॉजी’ तक हर जगह नजर आएगा.
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