ट्रंप के टैरिफ का रिफंड आज से शुरू, जानें- किसे वापस मिलेगा पैसा और क्या है पूरा प्रोसेस

Trump Tariff Refunds: 20 फरवरी को 6-3 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि ट्रंप ने 1977 के एक इमरजेंसी कानून का इस्तेमाल करके बड़े पैमाने पर टैरिफ लगाने में अपनी अधिकार सीमा का उल्लंघन किया था. एक ऑनलाइन पोर्टल के जरिए, आयातक सोमवार सुबह से ही अपना क्लेम फाइल करना शुरू कर सकते हैं.

ट्रंप टैरिफ का रिफंड. Image Credit: Canva/ Money9

Trump Tariff Refunds: अमेरिकी सरकार ने अरबों डॉलर के टैरिफ (शुल्क) वापस करने की उस लंबे समय से प्रतीक्षित प्रक्रिया को शुरू करने की तैयारी कर ली है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने इस साल की शुरुआत में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए शुल्कों को रद्द करने के बाद शुरू किया है. अमेरिकी कस्टम एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) द्वारा लॉन्च किए गए एक ऑनलाइन पोर्टल के जरिए, आयातक सोमवार सुबह से ही अपना क्लेम फाइल करना शुरू कर सकते हैं. यह प्रक्रिया अमेरिका के इतिहास में टैरिफ वापसी का अब तक का सबसे बड़ा अभियान बन सकती है और यह इसकी पहली मंजिल है.

रिफंड का क्लेम कौन कर सकता है?

इंपोर्टर और अधिकृत कस्टम ब्रोकर, जिन्होंने आपातकालीन शक्तियों के तहत टैरिफ का भुगतान किया था, अब CBP सिस्टम के जरिए अपना दावा पेश कर सकते हैं.

लेकिन पहले चरण में पात्रता सीमित है. Axios की एक रिपोर्ट के अनुसार, शुरू में केवल कुछ ‘अनलिक्विडेटेड’ एंट्रीज, या वे एंट्रीज जिनकी अंतिम अकाउंटिंग को 80 दिन से कम समय हुआ हो, ही इसके लिए पात्र होंगी.

CBP की फाइलिंग के अनुसार, 330,000 से ज्यादा आयातकर्ताओं ने 53 मिलियन से अधिक शिपमेंट पर लगभग 166 अरब डॉलर की ड्यूटी का भुगतान किया है. हालांकि, अप्रैल के मध्य तक, केवल लगभग 56,500 आयातकर्ताओं ने ही इलेक्ट्रॉनिक भुगतान के लिए अनिवार्य रजिस्ट्रेशन पूरा किया था.

प्रोसेस कैसे काम करता है?

कंपनियों को नए कंसोलिडेटेड एडमिनिस्ट्रेशन एंड प्रोसेसिंग ऑफ एंट्रीज (CAPE) सिस्टम के जरिए शिपमेंट और टैरिफ पेमेंट की डिटेल्ड घोषणाएं फाइल करनी होंगी. AP की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर मंजूरी मिल जाती है, तो ब्याज सहित रिफंड 60-90 दिनों के अंदर मिलने की उम्मीद है. एक्यूरेसी बहुत जरूरी है. छोटी-मोटी गलतियां भी क्लेम में देरी या उसे रिजेक्ट कर सकती हैं.

रिफंड क्यों जारी किए जा रहे हैं?

20 फरवरी को 6-3 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि ट्रंप ने 1977 के एक इमरजेंसी कानून का इस्तेमाल करके बड़े पैमाने पर टैरिफ लगाने में अपनी अधिकार सीमा का उल्लंघन किया था, जिससे उन्होंने टैक्स तय करने की कांग्रेस की शक्ति को प्रभावी रूप से दरकिनार कर दिया था. हालांकि, शीर्ष अदालत ने सीधे तौर पर रिफंड के मुद्दे पर कोई बात नहीं की, लेकिन बाद में US कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड ने फैसला सुनाया कि प्रभावित कंपनियां रिफंड पाने की हकदार हैं.

क्या ग्राहकों को कोई पैसा वापस मिलेगा?

जरूरी नहीं. टैरिफ इंपोर्टर चुकाते हैं, जो अक्सर ज्यादा कीमतों के जरिए यह लागत ग्राहकों पर डाल देते हैं. AP की रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा सिस्टम में व्यवसायों को रिफंड मिलता है और वे यह पैसा ग्राहकों के साथ बांटने के लिए बाध्य नहीं हैं. इसके बावजूद, कुछ कंपनियों ने संकेत दिया है कि वे रिफंड ग्राहकों तक पहुंचा सकती हैं. FedEx जैसी बड़ी डिलीवरी कंपनियों ने कहा है कि रिफंड मिलते ही वे उसे ग्राहकों को वापस कर देंगी.

पेआउट में देरी क्यों हो सकती है?

इसके धीरे-धीरे शुरू होने की उम्मीद है. CBP हाल के पेमेंट्स को प्राथमिकता देगा, और तकनीकी गड़बड़ियों या डॉक्यूमेंटेशन से जुड़ी दिक्कतों की वजह से प्रोसेसिंग धीमी हो सकती है. कंपनियों ने इस बात की भी चेतावनी दी है कि अगर रिफंड मिलने में कई महीने लग गए, तो उन्हें कैश फ्लो से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं.

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