अब भारत में बनेगा सिविलियन एयरक्राफ्ट, अडानी ग्रुप और ब्राजील की कंपनी की साझेदारी, अगले हफ्ते बड़े ऐलान की तैयारी
भारत के एविएशन सेक्टर में एक बड़ा बदलाव आकार लेता दिख रहा है. सिविल विमानन से जुड़ी एक अहम पहल देश को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में नए संकेत दे रही है. आने वाले दिनों में होने वाला एक ऐलान भारत की एविएशन इंडस्ट्री में हलचल मचा सकता है.
भारत में विमान निर्माण के सपने को नई रफ्तार मिलने वाली है. देश में सिविलियन एयरक्राफ्ट का मार्केट तेजी से बढ़ रहा है, ऐसे में अब देश में विमान सिर्फ खरीदेंगी ही नहीं जाएंगे, बल्कि भारत में बनाए भी जाएंगे. इसी दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए अडानी समूह और ब्राजील की प्रमुख एयरोस्पेस कंपनी एंब्रायर अगले हफ्ते भारत में सिविल विमानों की फाइनल असेंबली लाइन लगाने की योजना का ऐलान करने जा रहे हैं. यह पहल ‘मेक इन इंडिया’ को नई ऊंचाई देने वाली मानी जा रही है.
27 जनवरी को होगा अहम ऐलान
पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट किया है कि Adani Defence and Aerospace और Embraer के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) 27 जनवरी को नई दिल्ली में साइन किया जाएगा. इस मौके पर केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री K Rammohan Naidu भी मौजूद रहेंगे. दोनों कंपनियां भारत में एंब्रायर के सिविल जेट विमानों के लिए फाइनल असेंबली लाइन स्थापित करने की योजना साझा करेंगी.
ब्राजिल की कंपनी एम्ब्रेयर 150 सीटों तक के कमर्शियल जेट विमान बनाती है, जिनका इस्तेमाल क्षेत्रीय और मध्यम दूरी की उड़ानों के लिए किया जाता है. फाइनल असेंबली लाइन के शुरू होने के बाद अडानी समूह पहली बार भारत में विमान निर्माण के क्षेत्र में सीधा प्रवेश करेगा. सूत्रों का कहना है कि भविष्य में इस यूनिट के पूरी तरह चालू होने के बाद विमान के कुछ प्रमुख पुर्जों का निर्माण भी देश में ही किया जा सकता है.
एम्ब्रेयर की भारत में मौजूदगी
एम्ब्रेयर के ई-जेट्स भारत में साल 2005 से उड़ान भर रहे हैं. फिलहाल कंपनी के करीब 50 विमान भारत में मौजूद हैं, जो भारतीय वायुसेना, सरकारी एजेंसियों, बिजनेस जेट ऑपरेटर्स और कमर्शियल एयरलाइन स्टार एयर की सेवाओं में हैं. अक्टूबर 2025 में एम्ब्रेयर ने नई दिल्ली में अपना नया कार्यालय भी खोला था.
तेजी से बढ़ता भारतीय एविएशन बाजार
भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते सिविल एविएशन बाजारों में शामिल है. हवाई यात्रा की मांग लगातार बढ़ रही है, एयरलाइंस अपने बेड़े का विस्तार कर रही हैं और नए हवाई अड्डे भी बन रहे हैं. एंब्रायर के मुताबिक, अगले 20 वर्षों में भारत को 80 से 146 सीटों वाले कम से कम 500 विमानों की जरूरत होगी. यही वजह है कि कंपनी भारत को एक बड़े अवसर के रूप में देख रही है.
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सरकार भी नागरिक एयरोस्पेस मैन्युफैक्चरिंग और मेंटेनेंस गतिविधियों को बढ़ावा देने पर काम कर रही है. इसी कड़ी में फ्रांस की कंपनी Safran ने अपने लीप इंजन के मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल केंद्र को इस साल चालू करने की घोषणा की है.