भारत की रेटिंग Baa3 स्थिर; लेकिन Moody’s ने दी ग्रोथ और महंगाई पर बड़ी चेतावनी; रुपये को लेकर कही ये बात

Moody’s ने भारत की Baa3 रेटिंग को स्थिर रखा है लेकिन वेस्ट एशिया संकट को लेकर चेतावनी दी है. एजेंसी के अनुसार वित्त वर्ष 2027 में ग्रोथ घटकर 6 फीसदी रह सकती है और महंगाई बढ़कर 4.8 फीसदी तक पहुंच सकती है. तेल की कीमत बढ़ने से आयात खर्च और घरेलू महंगाई पर असर पड़ेगा.

Moody’s ने भारत की Baa3 रेटिंग को स्थिर रखा है. Image Credit: News9

Moody’s India: ग्लोबल रेटिंग एजेंसी Moody’s ने भारत की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग को Baa3 पर बरकरार रखा है. साथ ही आउटलुक को स्थिर बताया गया है. हालांकि एजेंसी ने वेस्ट एशिया में चल रहे तनाव को लेकर चिंता जताई है. इसके अनुसार यह संकट भारत की आर्थिक ग्रोथ और महंगाई पर असर डाल सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले समय में कई आर्थिक जोखिम बढ़ सकते हैं. खासकर तेल और व्यापार से जुड़े क्षेत्रों पर इसका असर देखने को मिल सकता है.

रेटिंग स्थिर लेकिन जोखिम बरकरार

Moody’s ने भारत की रेटिंग को स्थिर रखा है जो निवेश के लिहाज से पॉजिटिव संकेत है. एजेंसी का कहना है कि महामारी के बाद भारत की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है. सरकारी वित्तीय स्थिति भी धीरे- धीरे बेहतर हो रही है. हालांकि वैश्विक अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है. अगर रिवेन्यू में कमी आती है तो कर्ज घटाने की प्रक्रिया धीमी हो सकती है. इससे अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है.

6 फीसदी तक आ सकती है ग्रोथ

रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2027 में भारत की GDP ग्रोथ करीब 6 फीसदी तक रह सकती है. वेस्ट एशिया में चल रहा संघर्ष इसका मुख्य कारण है. इससे वैश्विक बाजार में अस्थिरता बढ़ रही है. तेल की कीमतों में उछाल से आयात खर्च बढ़ सकता है. इसका असर देश की आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है. इससे ग्रोथ की रफ्तार धीमी हो सकती है.

महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ा

Moody’s ने महंगाई को लेकर भी चिंता जताई है. एजेंसी का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 में महंगाई बढ़कर 4.8 फीसदी तक पहुंच सकती है. यह पिछले साल के मुकाबले दोगुनी होगी. तेल और फ्यूल की कीमत बढ़ने से ट्रांसपोर्ट और खाने के खर्च बढ़ सकते हैं. खाद और अन्य इंपोर्ट सामान भी महंगे हो सकते हैं. इससे आम लोगों के खर्च पर असर पड़ेगा.

ट्रेड और रेमिटेंस पर असर संभव

वेस्ट एशिया भारत के लिए एक अहम व्यापारिक क्षेत्र है. यहां से बड़ी मात्रा में रेमिटेंस भी आता है. अगर वहां रोजगार पर असर पड़ता है तो भारत में मांग घट सकती है. इससे घरेलू अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है. साथ ही आयात खर्च बढ़ने से चालू खाता घाटा भी बढ़ सकता है. यह बाहरी संतुलन के लिए चुनौती बन सकता है.

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रुपये पर बढ़ सकता है दबाव

जोरी को लेकर भी चिंता जताई गई है. लंबे समय तक संकट रहने पर रुपये पर दबाव बढ़ सकता है. विदेशी मुद्रा भंडार केवल उतार चढ़ाव को कम कर सकता है. इसके अलावा सरकार का कर्ज भी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है. आने वाले समय में वित्तीय संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती रहेगा.