RBI के कदम से मजबूत हुआ रुपया, 12 साल की सबसे बड़ी तेजी के बाद संभला बाजार, जानें पूरी डिटेल
RBI के सख्त कदमों के बाद रुपया 12 साल की सबसे बड़ी तेजी के बाद मजबूत बना हुआ है. डॉलर के मुकाबले इसमें हल्की बढ़त दर्ज की गई. बैंकों की पोजिशन पर नियंत्रण और सट्टेबाजी रोकने से रुपये को सपोर्ट मिला है. हालांकि इंपोटर्स की डॉलर खरीद और ईरान तनाव के कारण दबाव बना हुआ है.
Dollar vs Rupee: भारतीय रुपया हाल ही में आई बड़ी तेजी के बाद अब स्थिर नजर आ रहा है. RBI के सख्त कदमों के चलते रुपये को मजबूती मिली है. पिछले 12 साल में पहली बार इतनी बड़ी तेजी देखने को मिली है. डॉलर के मुकाबले रुपया हल्की बढ़त के साथ बंद हुआ. हालांकि बीच में इसमें उतार चढ़ाव भी देखने को मिला. बाजार में विदेशी करेंसी से जुड़ी एक्टिविटी पर RBI की नजर बनी हुई है. आने वाले दिनों में रुपये की दिशा कई बड़े फैक्टर्स पर निर्भर करेगी.
12 साल की सबसे बड़ी तेजी
रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 0.1 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुआ. इससे पहले इसमें 0.4 फीसदी तक की तेजी देखी गई थी. पिछले हफ्ते रुपया 1.8 फीसदी उछला था जो 2013 के बाद सबसे बड़ी तेजी है. इस तेजी के बाद अब बाजार में थोड़ी स्थिरता आई है. हालांकि आयातकों की डॉलर खरीद से कुछ दबाव भी बना. इससे रुपया अपने उच्च स्तर से थोड़ा नीचे आया.
RBI के सख्त कदमों का दिखा असर
RBI ने रुपये में सट्टेबाजी को रोकने के लिए कई बड़े फैसले लिए हैं. बैंकों की ओपन पोजिशन को सीमित कर दिया गया है. इसके अलावा नॉन डिलीवेरेबल फॉरवर्ड जैसे साधनों पर भी रोक लगाई गई है. इन कदमों से बाजार में अचानक बदलाव आया. कई बैंकों को अपनी पोजिशन बंद करनी पड़ी. इससे रुपये को मजबूती मिली और तेजी देखने को मिली.
आगे भी मजबूत हो सकता है रुपया
जानकारों का मानना है कि रुपया आगे 91.50 से 92 के स्तर तक जा सकता है. बैंक 10 अप्रैल की डेडलाइन से पहले अपनी डॉलर पोजिशन कम कर रहे हैं. इससे रुपये को सपोर्ट मिल सकता है. हालांकि बाजार में अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है. विदेशी घटनाओं का असर भी देखने को मिल सकता है. निवेशकों की नजर RBI के अगले फैसलों पर है.
ईरान युद्ध और तेल कीमतों का असर
रुपये पर दबाव बढ़ने का एक बड़ा कारण ईरान से जुड़ा तनाव रहा है. इससे तेल की कीमतें बढ़ी हैं और भारत का आयात बिल बढ़ा है. पिछले एक साल में रुपया 8.2 फीसदी गिर चुका है. इससे यह एशिया की सबसे कमजोर करेंसी बन गया था. अगर यह तनाव जारी रहता है तो रुपये पर फिर दबाव आ सकता है. इससे भविष्य में गिरावट का खतरा बना रहेगा.
बॉन्ड बाजार और हेजिंग कॉस्ट में बदलाव
रुपये में उतार चढ़ाव के बीच बॉन्ड बाजार में भी हलचल देखी गई. 10 साल की यील्ड घटकर करीब 7.04 फीसदी पर आ गई. वहीं रुपये की कमजोरी से बचने के लिए हेजिंग की लागत बढ़ गई है. आयातकों ने ज्यादा हेजिंग करना शुरू कर दिया है. दूसरी तरफ निर्यातकों ने फॉरवर्ड डॉलर बिक्री कम कर दी है. इससे बाजार में बैलेंस बदलता नजर आ रहा है.
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