CBI ने अनिल अंबानी ग्रुप की जांच में 73000 करोड़ से अधिक के बैंक ‘घोटाले’ का किया दावा, 7 मामलों की चल रही पड़ताल
CBI और उसकी वित्तीय जांच करने वाली संस्था, प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दायर स्टेटस रिपोर्ट की समीक्षा करने के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने 23 मार्च को एक आदेश जारी किया. CBI ने कोर्ट को बताया कि वह सक्रिय रूप से सात मामलों की जांच कर रही है.
फरवरी में सुप्रीम कोर्ट में दायर एक स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार, सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप के खिलाफ दर्ज सात मामलों में कुल 73,000 करोड़ रुपये के बैंक लोन घोटालों की जांच कर रही है. न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, CBI ने कोर्ट को बताया कि वह सक्रिय रूप से सात मामलों की जांच कर रही है और कुछ सरकारी अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है.
73,006 करोड़ रुपये का दावा
CBI और उसकी वित्तीय जांच करने वाली संस्था, प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दायर स्टेटस रिपोर्ट की समीक्षा करने के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने 23 मार्च को एक आदेश जारी किया. CBI जांच का जिक्र करते हुए सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहा गया.’ अन्य मामलों में भी नुकसान कई हजार करोड़ रुपये का है, जिसका कुल दावा लगभग 73,006 करोड़ रुपये बनता है.
‘प्रोजेक्ट हेल्प’ का जिक्र
इस घटनाक्रम के संबंध में PTI द्वारा भेजे गए एक सवाल पर रिलायंस ग्रुप की प्रतिक्रिया का इंतजार है. ED ने कोर्ट को बताया कि उसने कुछ दस्तावेज जब्त किए हैं जिनमें कथित ‘प्रोजेक्ट हेल्प’ का जिक्र है, जिससे यह संकेत मिलता है कि दिवालियापन की कार्यवाही ‘जानबूझकर’ ऐसे कर्जदाताओं के जरिए शुरू की गई थी जिनका इससे कोई लेना-देना नहीं था.ॉ
कैसे जुटाया गया फंड?
ED की रिपोर्ट को देखने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘रिपोर्ट के अनुसार, IBC (दिवालियापन और दिवालियापन संहिता) अधिग्रहण के लिए सारा फंड आठ NBFCs (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों) के एक समूह के जरिए जुटाया गया था. यह गौर किया गया है कि लगभग 2,983 करोड़ रुपये के कुल दावों का निपटारा 26 करोड़ रुपये में किया गया था.’
ED ने कोर्ट को यह भी बताया कि उसने इन मामलों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है और फिलहाल रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप (RAAG) से जुड़े आठ मामलों पर काम कर रही है.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘चूंकि शुरुआती तथ्य अपने आप में सब कुछ बयां करते हैं, इसलिए यह एक ऐसी स्थिति है जहां जांच एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों को मिलकर काम करना चाहिए और किसी भी अनियमितता, गैर-कानूनी कृत्यों, या सरकारी अधिकारियों – विशेष रूप से वित्तीय संस्थानों में कार्यरत अधिकारियों – द्वारा किसी भी तरह की मिलीभगत या साठगांठ का पर्दाफाश करने के लिए ज़ोरदार प्रयास करना चाहिए, यदि उन्होंने RAAG के प्रबंधन को अनुचित लाभ पहुंचाया है.’
अदालत का निर्देश
कोर्ट ने आगे कहा, ‘हालांकि हम आरोपों की खूबियों पर कोई राय व्यक्त नहीं करते हैं, लेकिन हम केवल यह कहना चाहते हैं कि CBI और ED के लिए यह अनिवार्य है कि वे जांच को पूरी तरह से निष्पक्ष, न्यायसंगत, पारदर्शी और स्वतंत्र तरीके से पूरा करें, और चल रही जांच को एक निश्चित समय-सीमा के भीतर उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाएं.’
ED ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की तीन-सदस्यीय पीठ को यह भी बताया कि उसे इस जांच के संबंध में अन्य जांच एजेंसियों से मांगी गई कुछ जानकारी ‘नहीं मिली’ है. अदालत ने निर्देश दिया कि सभी एजेंसियां और वित्तीय संस्थान ED को अपना ‘पूरा सहयोग’ दें और आवश्यक जानकारी समय पर उपलब्ध कराएं.
Latest Stories
RBI के कदम से मजबूत हुआ रुपया, 12 साल की सबसे बड़ी तेजी के बाद संभला बाजार, जानें पूरी डिटेल
कमजोर डॉलर से चमके गोल्ड-सिल्वर, एक दिन में ₹5000 महंगी हुई चांदी; सोना भी ₹2300 उछला
गंभीर मुश्किलों से जूझ रहा भारतीय बैंकिंग सेक्टर, पर ब्रोकरेज ने कहा- इन शेयरों पर लगा सकते हैं दांव
