होर्मुज संकट का असर, अब सऊदी अरब तेल पर वसूलेगा एक्सट्रा रकम, भारत सहित इन देशों की कंपनियों पर सीधा असर
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम समुद्री रास्ते पर खतरा बढ़ने से तेल की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ा है. इसी बीच सऊदी अरब ने एशियाई देशों के लिए कच्चे तेल की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी कर दी है. Saudi Aramco ने अरब लाइट क्रूड के दाम बढ़ा दिए हैं. मई महीने के लिए एशियाई खरीदारों को यह तेल अब 19.50 डॉलर प्रति बैरल के प्रीमियम पर मिलेगा.
Saudi Arab Oil Price Premium Increase: वेस्ट एशिया में बढ़ता तनाव अब पूरी दुनिया की जेब पर असर डालने लगा है. ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष ने ग्लोबल एनर्जी मार्केट को हिला दिया है. खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम समुद्री रास्ते पर खतरा बढ़ने से तेल की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ा है. इसी बीच सऊदी अरब ने एशियाई देशों के लिए कच्चे तेल की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी कर दी है. इस फैसले से साफ संकेत मिल रहा है कि आने वाले समय में तेल और महंगा हो सकता है.
एशिया के लिए रिकॉर्ड प्रीमियम पर तेल
Saudi Aramco ने अरब लाइट क्रूड के दाम बढ़ा दिए हैं. मई महीने के लिए एशियाई खरीदारों को यह तेल अब 19.50 डॉलर प्रति बैरल के प्रीमियम पर मिलेगा. यह अब तक का रिकॉर्ड स्तर है. तेल की कीमतों में यह उछाल मुख्य रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव की वजह से आया है. यह दुनिया का बेहद अहम समुद्री रास्ता है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की सप्लाई होती है.
ग्लोबल कीमतों में तेज उछाल
इस संकट का असर पूरी दुनिया पर दिख रहा है. ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 50 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आ चुकी है. अमेरिका, यूरोप और एशिया में ईंधन की कीमतें भी तेजी से बढ़ रही हैं. इससे महंगाई बढ़ने का खतरा और ज्यादा हो गया है. OPEC+ ने मई से रोजाना 2.06 लाख बैरल तेल प्रोडक्शन बढ़ाने का फैसला किया है. लेकिन संगठन ने चेतावनी भी दी है कि युद्ध में डैमेज हुए इंफ्रास्ट्रक्चर को ठीक करने में समय लगेगा. इससे बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है.

अरामको CEO की बड़ी चेतावनी
Bloomberg की एक रिपोर्ट के हवाले से Saudi Aramco के CEO Amin H. Nasser ने कहा है कि अगर यह संकट लंबे समय तक चलता है, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं. उन्होंने बताया कि अब तक करीब 180 मिलियन बैरल तेल की सप्लाई प्रभावित हो चुकी है. उन्होंने चेतावनी दी कि होर्मुज के आसपास कोई भी लंबी रुकावट ग्लोबल सप्लाई को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है. इससे सिर्फ तेल ही नहीं बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा.
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