सर्विसेज PMI 14 महीने के निचले स्तर पर, मैन्युफैक्चरिंग 53.9 तक गिरा, जानें क्या है गिरावट की वजह
भारत के सर्विस सेक्टर की रफ्तार मार्च में 14 महीने के निचले स्तर पर आ गई है, जबकि मैन्युफैक्चरिंग में और तेज गिरावट दिखी है. दोनों सेक्टर में ग्रोथ जारी है, लेकिन रफ्तार धीमी पड़ी है. खासकर मैन्युफैक्चरिंग में आई तेज गिरावट ने आर्थिक गतिविधियों की दिशा को लेकर चिंता बढ़ा दी है.
भारत की अर्थव्यवस्था में मजबूती के संकेत देने वाला सर्विस सेक्टर अब धीरे-धीरे रफ्तार खोता दिख रहा है. HSBC India PMI के ताजा आंकड़ों के मुताबिक मार्च में सर्विस सेक्टर के ऑपरेशन की बढ़त 14 महीने के निचले स्तर पर आ गई है, ऐसे में आर्थिक आंकड़ों में नरमी आना लाजमी है.
सर्विसेज PMI घटकर 57.5 पर
मार्च 2026 में सर्विसेज PMI घटकर 57.5 पर आ गया, जो फरवरी में 58.1 था. यह जनवरी 2025 के बाद सबसे निचला स्तर है. हालांकि PMI अभी भी 50 के ऊपर है, यानी सेक्टर विस्तार में है, लेकिन ग्रोथ की रफ्तार धीमी हुई है.
डेटा बताता है कि 2025 में सर्विसेज PMI आमतौर पर 58 से 63 के बीच बना रहा और अगस्त में 62.9 तक पहुंचा था, लेकिन उसके बाद धीरे-धीरे गिरावट देखने को मिली.
मैन्युफैक्चरिंग में ज्यादा दबाव
जहां सर्विस सेक्टर में गिरावट धीरे-धीरे आई है, वहीं मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में तेज गिरावट दर्ज की गई. मार्च में मैन्युफैक्चरिंग PMI गिरकर 53.9 पर आ गया, जो फरवरी में 56.9 था. यह लगभग चार साल का निचला स्तर है. इस गिरावट की बड़ी वजह बढ़ती लागत, खासकर तेल की कीमतें और वैश्विक अनिश्चितता को माना जा रहा है.
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क्या है गिरावट की वजह?
HSBC की रिपोर्ट्स के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव का असर भारत की मांग, पर्यटन और बाजार की स्थिति पर पड़ा है. नए ऑर्डर की रफ्तार धीमी हुई है और कंपनियों पर लागत का दबाव भी बढ़ा है.
हालांकि एक सकारात्मक संकेत यह है कि विदेशी ऑर्डर मजबूत बने हुए हैं और रोजगार में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
भारत की अर्थव्यवस्था अभी भी ग्रोथ मोड में है, लेकिन गति थोड़ी धीमी हो रही है. खासकर मैन्युफैक्चरिंग में आई तेज गिरावट चिंता का विषय है, जबकि सर्विस सेक्टर अपेक्षाकृत स्थिर बना हुआ है. आने वाले महीनों में वैश्विक हालात और लागत का दबाव तय करेगा कि यह सुस्ती अस्थायी है या लंबे समय तक बनी रह सकती है.
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