25 लाख टन यूरिया आयात करेगी सरकार, खरीफ फसलों के लिए तैयारी तेज; जारी हुआ टेंडर

होर्मुज संकट और वेस्ट एशिया में जारी संघर्ष के कारण गैस की कमी पैदा हो रही है, जिससे यूरिया प्रोडक्शन प्रभावित हुआ है. खरीफ सीजन से पहले सरकार किसी भी तरह की कमी से बचना चाहती है. किसानों के लिए यूरिया बेहद जरूरी होता है, खासकर धान, मक्का और सोयाबीन जैसी फसलों के लिए.

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Fertilizer Import: वेस्ट एशिया में बढ़ता तनाव अब भारत की खेती पर भी असर डालने लगा है. दुनिया का सबसे बड़ा यूरिया आयातक India अब खाद की सप्लाई को लेकर सतर्क हो गया है. होर्मुज संकट और वेस्ट एशिया में जारी संघर्ष के कारण गैस की कमी पैदा हो रही है, जिससे यूरिया प्रोडक्शन प्रभावित हुआ है.

ऐसे में खरीफ सीजन से पहले सरकार किसी भी तरह की कमी से बचना चाहती है. किसानों के लिए यूरिया बेहद जरूरी होता है, खासकर धान, मक्का और सोयाबीन जैसी फसलों के लिए. यही वजह है कि भारत अब बड़े पैमाने पर यूरिया आयात की तैयारी कर रहा है, ताकि समय पर किसानों को खाद मिल सके और खेती पर कोई असर न पड़े.

2.5 मिलियन टन यूरिया आयात की तैयारी

भारत करीब 25 लाख टन यूरिया आयात करने की योजना बना रहा है. इसके लिए Indian Potash Ltd. ने 15 लाख टन यूरिया आयात करने के लिए टेंडर जारी किया है. यह आयात देश के पश्चिमी तट के जरिए किया जाएगा. बाकी यूरिया पूर्वी तट के जरिए मंगाया जाएगा. टेंडर के मुताबिक, यह सभी खेप 14 जून तक रवाना हो जानी चाहिए, ताकि समय पर भारत पहुंच सके.

खरीफ सीजन से पहले बढ़ी जरूरत

भारत हर साल अपनी जरूरत पूरी करने के लिए यूरिया आयात करता है, लेकिन इस बार समय काफी अहम है. आने वाले महीनों में खरीफ फसलों की बुवाई शुरू होने वाली है. इसमें धान, मक्का और सोयाबीन जैसी फसलें शामिल हैं, जिनमें यूरिया की भारी जरूरत होती है.

गैस की कमी से प्रोडक्शन प्रभावित

भारत में यूरिया प्रोडक्शन काफी हद तक प्राकृतिक गैस पर निर्भर करता है. यह गैस ज्यादातर मिडिल ईस्ट से आती है. लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव के कारण LNG की सप्लाई प्रभावित हुई है. इस वजह से दक्षिण एशिया के कुछ प्लांट्स को पिछले महीने बंद भी करना पड़ा. इससे यूरिया की उपलब्धता पर दबाव बढ़ गया है.

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