अब टोल किंग बनेगा ईरान! सात समुद्र में कहां-कहां लगता है टोल, जानें किसका रेट ज्यादा

अमेरिका-ईरान सीजफायर के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगाने की मांग रखी है. इस रास्ते से दुनिया का 20 फीसदी तेल और बड़ी मात्रा में LNG गुजरती है. अगर टोल लागू होता है, तो ईरान रोजाना लाखों डॉलर कमा सकता है, जैसा पनामा और स्वेज कैनाल पहले से कर रहे हैं.

सात समुद्र में कहां-कहां लगता है टोल Image Credit: AI

Which Are the world’s Most Expensive Sea Routes: आखिरकार मिडिल ईस्ट में फिर से शांति की उम्मीद नजर आने लगी है. अमेरिका और ईरान दो हफ्ते के युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं और अमेरिका की तरफ से इसका ऐलान भी हो चुका है. लेकिन इस सीजफायर का असर सिर्फ राजनीतिक माहौल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दुनिया के समुद्री व्यापार को भी बदल सकता है. वजह है ईरान की नई मांग. ईरान अब होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर ट्रांजिट फीस यानी टोल लगाना चाहता है.

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है. यहां से दुनिया के लगभग 20 फीसदी तेल का प्रवाह होता है और करीब एक-चौथाई लिक्विफाइड नेचुरल गैस का व्यापार गुजरता है. यही वजह है कि इसे दुनिया का सबसे बड़ा एनर्जी चोकपॉइंट कहा जाता है.

क्या है हार्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान की मांग?

The New York Times की रिपोर्ट के मुताबिक, यह फीस करीब 2 मिलियन डॉलर यानी लगभग 18.5 करोड़ रुपये प्रति जहाज हो सकती है. इस रकम को ईरान और ओमान आपस में बांट सकते हैं. इस डील के जरिए ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को अपने कंट्रोल में रखते हुए इसे एक कमाई के बड़े साधन में बदलने का संकेत दिया है. ऐसे में अगर ऐसा होता है, तो ईरान भी उन देशों की कतार में शामिल हो सकता है जो समुद्री रास्तों से अरबों डॉलर की कमाई करते हैं.

होर्मुज स्ट्रेट से ईरान को कितनी हो सकती है कमाई

Moneycontrol की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर ईरान होर्मुज़ स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर स्वेज कैनाल जैसी दरों पर टोल लगाता है, तो वह रोजाना कम से कम 4 मिलियन डॉलर तक की कमाई कर सकता है. यह अनुमान इस आधार पर लगाया गया है कि हर दिन करीब 10 बड़े क्रूड ऑयल टैंकर (VLCC) इस रास्ते से गुजरते हैं. अगर हर जहाज से लगभग 5.3 लाख डॉलर का शुल्क लिया जाए, तो कुल कमाई 5.3 मिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है. इसमें ओमान के साथ संभावित रेवेन्यू शेयरिंग के बाद ईरान का हिस्सा लगभग आधा यानी 2.5 मिलियन डॉलर के आसपास हो सकता है.

इसके अलावा, गैस और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों से भी अतिरिक्त कमाई संभव है. रिपोर्ट के अनुसार, VLGC जहाजों से करीब 6 लाख डॉलर और पेट्रोलियम उत्पादों से लगभग 8 लाख डॉलर तक अतिरिक्त राजस्व मिल सकता है.

पनामा कैनाल: समुद्री व्यापार का पुराना टोल किंग

पनामा नहर साल 1914 में बनी थी और यह अटलांटिक महासागर को प्रशांत महासागर से जोड़ती है. शुरुआत में इसे अमेरिका ने बनाया और ऑपरेट किया, लेकिन साल 1999 के बाद इसका कंट्रोल पनामा के पास आ गया.

यह नहर दुनिया के करीब 5 फीसदी समुद्री व्यापार को संभालती है. इसका बड़ा हिस्सा अमेरिका से जुड़ा है, जिससे उसकी रणनीतिक पकड़ भी मजबूत बनी रहती है. इस नहर की सबसे खास बात इसका लॉक सिस्टम है, जिसमें जहाजों को ऊपर-नीचे उठाकर पार कराया जाता है. समय के साथ इसका विस्तार किया गया ताकि बड़े जहाज भी यहां से गुजर सकें और केप हॉर्न के लंबे रास्ते से बचा जा सके.

porteconomicsmanagement की रिपोर्ट के मुताबिक, पनामा कैनाल रोजाना औसतन 14 मिलियन डॉलर की कमाई करता है. करीब 35 जहाज रोज यहां से गुजरते हैं और एक जहाज से 60,000 डॉलर से लेकर 3 लाख डॉलर से ज्यादा तक शुल्क लिया जाता है. सालाना कमाई 4.8 बिलियन डॉलर से ज्यादा हो सकती है.

स्वेज कैनाल: यूरोप और एशिया के बीच सबसे छोटा रास्ता

स्वेज नहर एक मानव निर्मित जलमार्ग है, जो भूमध्य सागर को लाल सागर से जोड़ता है. इसके जरिए यूरोप और एशिया के बीच समुद्री व्यापार काफी आसान हो गया है. जहाजों को अब अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप का लंबा चक्कर नहीं लगाना पड़ता.

यह नहर मिस्र में स्थित है और करीब 120 मील लंबी है. इस रास्ते से रोजाना 50 से ज्यादा जहाज गुजरते हैं और हर साल 300 मिलियन टन से ज्यादा माल ट्रांसपोर्ट होता है. यह दुनिया के सबसे व्यस्त व्यापारिक मार्गों में से एक है और करीब 12 फीसदी वैश्विक व्यापार इसी से गुजरता है. मिस्र के लिए यह आय का एक बड़ा स्रोत है. कई मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, स्वेज कैनाल से रोजाना औसतन 20 मिलियन डॉलर की कमाई होती है. प्रति जहाज टोल 30,000 डॉलर से लेकर 4.5 लाख डॉलर तक होता है, जो जहाज के आकार, वजन और प्रकार पर निर्भर करता है.

तुर्की के बोस्फोरस और डार्डानेल्स: बढ़ती फीस का असर

तुर्की के बोस्फोरस और डार्डानेल्स स्ट्रेट काला सागर को मरमारा और भूमध्य सागर से जोड़ते हैं और यह यूरोप और एशिया के बीच एक अहम समुद्री रास्ता हैं. ये 1936 के मॉन्ट्रो कन्वेंशन के तहत संचालित होते हैं, जिससे तुर्की को इन पर कंट्रोल मिलता है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में इन जलडमरूमध्यों से तुर्की की कमाई बढ़कर करीब 227.4 मिलियन डॉलर तक पहुंच गई है.

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