US और चीन जितना बड़ा EU ट्रेड, FTA से टेक्सटाइल और फॉर्मा को बड़ा फायदा; Jefferies की रिपोर्ट में दावा!
भारत और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय से अटका इंडिया–EU एफटीए अब अंतिम चरण में पहुंचता दिख रहा है. जेफरीज की इक्विटी स्ट्रेटेजी रिपोर्ट के अनुसार यह समझौता भारत के ट्रेड, एक्सपोर्ट और इन्वेस्टमेंट पर बड़ा असर डाल सकता है. EU के साथ भारत का ट्रेड यूएस और चीन के बराबर बताया गया है. एफटीए से टेक्सटाइल और फार्मा सेक्टर को सबसे ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद है.
India EU FTA: भारत और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय से अटके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर हलचल तेज हो गई है. वैश्विक इन्वेस्टमेंट बैंक जेफरीज की ताजा इक्विटी स्ट्रेटेजी रिपोर्ट के अनुसार, इंडिया–EU एफटीए अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है और जल्द ही इस पर सहमति बन सकती है. करीब दो दशक की बातचीत के बाद आकार ले रहा यह समझौता भारत के ट्रेड, एक्सपोर्ट और इन्वेस्टमेंट पर गहरा असर डाल सकता है. रिपोर्ट में ऑटो, टेक्सटाइल, फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स और सर्विसेज सेक्टर को सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले क्षेत्रों के रूप में देखा गया है, जबकि एग्रीकल्चर और डेयरी सेक्टर को इससे बाहर रखे जाने के संकेत दिए गए हैं.
EU के साथ भारत का ट्रेड यूएस और चीन के बराबर
जेफरीज की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का EU के साथ वार्षिक गुड्स ट्रेड करीब 130 अरब डॉलर का है, जो साइज के लिहाज से यूएस और चीन के साथ होने वाले ट्रेड के बराबर है. भारत का EU को सालाना गुड्स एक्सपोर्ट लगभग 75 अरब डॉलर है, जो कुल निर्यात का करीब 17 फीसदी है.
खास बात यह है कि 2022 के बाद भारत का ट्रेड सरप्लस बढ़ा है, जिसका कारण पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स और इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट्स में तेज उछाल बताया गया है. सर्विसेज ट्रेड भी मजबूत बना हुआ है, जहां भारत को EU के साथ करीब 9 अरब डॉलर का सरप्लस मिलता है.
टेक्सटाइल सेक्टर को मिल सकती है बड़ी राहत
इंडिया–EU एफटीए का सबसे सकारात्मक असर टेक्सटाइल सेक्टर पर पड़ने की उम्मीद है. EU हर साल करीब 125 अरब डॉलर के टेक्सटाइल्स और अपैरल्स का आयात करता है, जिसमें भारत की हिस्सेदारी फिलहाल 5 से 6 फीसदी है. चीन की हिस्सेदारी लगभग 30 फीसदी है, जबकि बांग्लादेश और पाकिस्तान मिलकर करीब 20 फीसदी हिस्सेदारी रखते हैं.
इन देशों को EU में जीरो टैरिफ का फायदा मिलता है, जबकि भारत पर अभी 10 फीसदी तक का टैरिफ लागू है. एफटीए के तहत यदि भारतीय टेक्सटाइल्स को टैरिफ पैरिटी मिलती है, तो यह सेक्टर के लिए बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकता है.
ऑटो सेक्टर में सीमित लेकिन अहम बदलाव
ऑटो सेक्टर को लेकर रिपोर्ट में कहा गया है कि EU की प्रमुख अपेक्षा भारत में कार एक्सपोर्ट्स बढ़ाने की होगी, जहां मौजूदा टैरिफ्स 100 फीसदी तक जाते हैं. एफटीए के तहत ग्रैजुअल टैरिफ रिडक्शन या कोटा-बेस्ड टैरिफ-फ्री इंपोर्ट्स की संभावना जताई गई है.
हालांकि जेफरीज का मानना है कि EU की बड़ी ऑटो कंपनियां पहले से ही भारत में सीकेडी यूनिट्स और लोकलाइजेशन के जरिए इफेक्टिव टैरिफ्स को करीब 30 फीसदी तक सीमित कर चुकी हैं. साथ ही भारतीय ऑटो मार्केट मिड-सेगमेंट में पहले से ही काफी कंपेटिटिव है, जिससे डोमेस्टिक ऑटो ओईएम्स पर बड़ा नकारात्मक असर सीमित रह सकता है.
नॉन-टैरिफ बैरियर्स और सर्विसेज ट्रेड पर फोकस
रिपोर्ट में भारत की चिंता नॉन-टैरिफ बैरियर्स को लेकर बताई गई है, खासतौर पर EU के अपकमिंग सीबीएएम मेकैनिज्म को लेकर, जिसका एक्सपोर्ट्स पर असर पड़ सकता है. सर्विसेज ट्रेड में भारत मूवमेंट, वीजाज और मार्केट एक्सेस को आसान बनाने की मांग करेगा, खासकर टेक और मेडिकल प्रोफेशनल्स के लिए.
वहीं EU फाइनेंशियल, लीगल और अन्य सर्विसेज में ज्यादा ओपननेस की मांग कर सकता है. कुल मिलाकर, जेफरीज का आकलन है कि इंडिया–EU एफटीए भारतीय इक्विटीज के लिए मीडियम टू लॉन्ग टर्म में पॉजिटिव कैटलिस्ट बन सकता है, खासकर टेक्सटाइल्स, फार्मा और सिलेक्ट मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए.
यह भी पढ़ें: कैबिनेट के दो बड़े फैसले, अटल पेंशन योजना 2030-31 तक बढ़ी, SIDBI को मिले 5000 करोड़ रुपये
Latest Stories
सोने-चांदी ने फिर तोड़े रिकॉर्ड, एक दिन में गोल्ड ₹6500 महंगा, सिल्वर ने लगाई ₹11300 की छलांग; जानें नई कीमतें
Auto9 Awards 2026: मारुति सुजुकी बनी सेफ्टी चैंपियन ऑफ द ईयर, TVS Apache RTX 300 को मिला बाइक ऑफ द ईयर का अवार्ड
Rupee Hits Record Low: डॉलर के मुकाबले 91.64 पर पहुंचा रुपया, विदेशी बिकवाली और ग्लोबल टेंशन से बढ़ा दबाव
