JIO पर कितना है कर्ज, क्या इसलिए मुकेश अंबानी लाए IPO; DRHP में खुला राज
JIO ने IPO के लिए DRHP दाखिल कर दिया है, जिसके बाद कंपनी की वित्तीय स्थिति और फंड के उपयोग को लेकर अहम जानकारियां सामने आई हैं. DRHP के मुताबिक, IPO से जुटाई गई राशि का बड़ा हिस्सा RJIL पर मौजूद करीब 30,057 करोड़ रुपये के कर्ज को कम करने में लगाया जाएगा.
JIO IPO DRHP: रिलायंस ग्रुप की प्रमुख कंपनी JIO के IPO को लेकर काफी समय से चर्चा चल रही थी. हालांकि, शुक्रवार को इस चर्चा पर विराम लग गया. रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने शुक्रवार को AGM में ऐलान किया था कि कंपनी आज DRHP फाइल करेगी. अब जब कंपनी ने DRHP फाइल कर दिया है, तो IPO से जुड़ी कई अहम जानकारियां भी सामने आने लगी हैं. निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि IPO से जुटाई गई राशि का इस्तेमाल कहां किया जाएगा. आइए जानते हैं कि कंपनी इन पैसों का उपयोग कैसे करेगी और उस पर कितना कर्ज है.
कंपनी पर कितना है कर्ज
RJIL पर 31 मार्च 2026 तक लगभग 30,057.2 करोड़ रुपये का कर्ज था. DRHP के अनुसार, कंपनी अपने शेयरों के फ्रेश इश्यू से जुटाई जाने वाली राशि का एक बड़ा हिस्सा इस कर्ज को कम करने में इस्तेमाल करेगी. यह कर्ज मुख्य रूप से तीन सिंडिकेटेड टर्म-लोन फैसिलिटीज के तहत लिए गए एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग्स से जुड़ा है. कंपनी ने इन लोन का उपयोग पहले कैपिटल एक्सपेंडिचर (कैपेक्स) और स्पेक्ट्रम एक्विजिशन के लिए किया था. कर्ज घटाने से RJIL की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी और ब्याज लागत कम करने में भी मदद मिलेगी.
कर्ज चुकाने से क्या होगा फायदा
कर्ज की समय से पहले चुकाने से Reliance Jio की वित्तीय स्थिति और मजबूत होगी. कंपनी के मैनेजमेंट के मुताबिक, नेट डेट घटेगा, जिससे ब्याज भुगतान और डेट सर्विसिंग कॉस्ट में कमी आएगी. इसके साथ ही नेट लीवरेज रेशियो में सुधार होगा और प्रति शेयर NAV बढ़ाने में मदद मिलेगी. कर्ज का बोझ कम होने से कंपनी के पास नए निवेश के लिए अधिक वित्तीय गुंजाइश बनेगी.
Reliance Jio इस अतिरिक्त क्षमता का उपयोग 5G नेटवर्क डेंसिफिकेशन, फिक्स्ड ब्रॉडबैंड एक्सपेंशन, एआई और क्लाउड सर्विसेज, एंटरप्राइज डिजिटल सर्विसेज तथा ग्लोबल टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप्स में निवेश बढ़ाने के लिए कर सकेगी, जिससे भविष्य की ग्रोथ को गति मिलेगी.
किसका कितना स्टेक
Reliance Jio में सबसे बड़ी हिस्सेदारी रिलायंस इंडस्ट्रीज की है, जिसके पास 66.43 फीसदी स्टेक है. इसके अलावा मेटा के पास 9.99 फीसदी, गूगल के पास 7.73 फीसदी, सऊदी अरेबिया वेल्थ फंड्स और विस्टा इक्विटी पार्टनर्स के पास 2.31-2.31 फीसदी हिस्सेदारी है. वहीं, सिल्वर लेक (1.88 फीसदी), मुबाडाला (1.85 फीसदी), जीए सिंगापुर (1.34 फीसदी), अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (1.16 फीसदी) और टीपीजी कैपिटल (0.93 फीसदी) भी कंपनी के प्रमुख निवेशकों में शामिल हैं.
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