महाराष्ट्र सरकार की नई पॉलिसी से शराब कंपनियां नाराज, पहुंच गई हाई कोर्ट, 450% तक टैक्स का मामला
महाराष्ट्र की नई liquor tax policy को लेकर Diageo और Pernod Ricard ने राज्य सरकार के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की है. कंपनियों का आरोप है कि सराकार ने प्रीमियम अफोर्डेबल ब्रांड्स पर टैक्स तेजी से बढ़ाया है और उन्हें महाराष्ट्र मेड लिकर कैटेगरी से बाहर रखा है. इस पॉलिसी के बाद कई प्रमुख ब्रांड की सेल में गिरावट दर्ज हुई है.
Maharashtra liquor tax policy: महाराष्ट्र सरकार की नई शराब टैक्स नीति को लेकर अंतरराष्ट्रीय शराब कंपनियां Diageo और Pernod Ricard ने राज्य सरकार के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. कंपनियों का कहना है कि सरकार ने सस्ते प्रीमियम ब्राण्ड्स पर टैक्स में तेज बढ़ोतरी कर दी है और साथ ही उन्हें उस नई टैक्स कैटेगरी से बाहर कर दिया है जिसे स्थानीय कंपनियों के लिए रखा गया है. इस नीति से दोनों ग्लोबल दिग्गजों की बिक्री पर बड़ा असर पड़ा है और महाराष्ट्र जैसे महत्वपूर्ण मार्केट में उनकी हिस्सेदारी घटी है.
क्या है पूरा मामला
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जून से अगस्त 2025 के बीच महाराष्ट्र ने एक नई कैटेगरी ‘Maharashtra Made Liquor’ शुरू की है. इसमें केवल वे निर्माता शामिल हो सकते हैं जिनका मुख्यालय राज्य में है और जिनमें विदेशी निवेश जीरो है. इस श्रेणी में आने वाले प्रोडक्ट पर टैक्स 270 फीसदी रखा गया है.
दूसरी ओर, बाकी प्रीमियम लेकिन सस्ते ब्राण्ड्स जिनकी उत्पादन लागत 260 रुपये प्रति लीटर से कम है, उन पर टैक्स बढ़ाकर 300 फीसदी से 450 फीसदी कर दिया गया है. इस बढ़ोतरी का सीधा असर Diageo के McDowell’s, Pernod के Royal Stag, Tilaknagar के Imperial Blue और Allied Blenders के Officer’s Choice जैसे बड़े ब्राण्ड्स पर पड़ा है.
कंपनियों ने क्या कहा
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इंटरनेशनल स्पिरिट्स एंड वाइंस एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ISWAI) ने 14 नवंबर को याचिका दायर की है. ISWAI ने कहा है कि यह नीति व्यापार में बाधाएं पैदा करती है. एसोसिएशन ने न्यायाधीशों से इसे रद्द करने या विदेशी निवेश वाली कंपनियों को कम-टैक्स प्रणाली में भाग लेने देने की मांग की है. मुंबई उच्च न्यायालय इस मामले की सुनवाई 9 दिसंबर को करेगा. Diageo की भारतीय यूनिट United Spirits ने कहा कि महाराष्ट्र उसका बहुत बड़ा बाजार है और वह “level playing field’’ चाहती है.
बिक्री पर असर
उद्योग संगठन CIABC के मुताबिक, टैक्स बढ़ने से प्रभावित ब्राण्ड्स की बिक्री में पिछले कुछ हफ्तों में 35 से 40 फीसदी तक की गिरावट आई है. यह महत्वपूर्ण है क्योंकि महाराष्ट्र भारत की प्रीमियम शराब खपत का 7 फीसदी हिस्सा रखता है और मुंबई ग्लोबल कंपनियों का सबसे बड़ा शहरी बाजार माना जाता है.
भारत का शराब इंडस्ट्री 45 अरब डॉलर का है और हर राज्य के अपने नियम हैं, जिससे ग्लोबल कंपनियों को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. तेलंगाना में भी कंपनियां सरकार के एक डिपो से बकाया 337 करोड़ डॉलर की मांग कर रही हैं.
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