मदर ऑफ ऑल डील भारत के लिए फायदेमंद,50 अरब डॉलर तक बढ़ सकता है ट्रेड सरप्लस; बढ़ेगा एक्सपोर्ट और रोजगार
भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से भारत को बड़ा आर्थिक फायदा होने की उम्मीद है. इस डील से भारत का ट्रेड सरप्लस वित्त वर्ष इकतीस तक पचास अरब डॉलर से अधिक बढ़ सकता है. भारतीय निर्यात को यूरोप में बड़ा बाजार मिलेगा.
India EU FTA: भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर बड़ी घोषणा जल्द हो सकती है. यह डील भारत के लिए आर्थिक रूप से बेहद अहम मानी जा रही है. इस समझौते से भारत का ट्रेड सरप्लस आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ सकता है. खास बात यह है कि यह डील भारत के निर्यात को नई ऊंचाई दे सकती है. इससे भारतीय उद्योगों को बड़ा बाजार मिलेगा. साथ ही रोजगार और मैन्युफैक्चरिंग को भी मजबूती मिलेगी.
भारत के ट्रेड सरप्लस में बड़ा उछाल
FTA लागू होने पर भारत का यूरोपीय यूनियन के साथ ट्रेड सरप्लस वित्त वर्ष 2031 तक पचास अरब डॉलर से अधिक बढ़ सकता है. इससे भारत की कुल एक्सपोर्ट में यूरोप की हिस्सेदारी बढ़कर 22 से 23 फीसदी तक पहुंच सकती है. फिलहाल यह हिस्सेदारी 17 फीसदी के आसपास है. यह बढ़ोतरी भारत के लिए विदेशी मुद्रा आय बढ़ाने में मददगार होगी. साथ ही ट्रेड बैलेंस को मजबूत बनाएगी.
भारतीय निर्यात को मिलेगा नया बाजार
इस डील से भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मशीनरी और केमिकल जैसे हाई वैल्यू सेक्टर को फायदा होगा. अभी तक भारत का निर्यात काफी हद तक लेबर आधारित उत्पादों पर निर्भर रहा है. FTA के बाद भारत वैल्यू चेन में ऊपर की ओर बढ़ेगा. इससे भारतीय कंपनियों की वैश्विक कंपटीशन बढ़ेगी. लंबे समय में यह निर्यात की क्वालिटी और कीमत दोनों सुधार सकता है.
लेबर इंटेंसिव सेक्टर को सीधा फायदा
FTA के तहत टैरिफ कम या खत्म होने से भारत के लेबर इंटेंसिव सेक्टर को बड़ा फायदा मिलेगा. गारमेंट फुटवियर टायर फार्मा और ऑटो पार्ट्स जैसे सेक्टर में निर्यात बढ़ने की उम्मीद है. ये ऐसे इंडस्ट्री हैं जो बड़ी संख्या में रोजगार पैदा करते हैं. इससे MSME सेक्टर को भी मजबूती मिलेगी. ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं.
यूरोप की जरूरत भारत के पक्ष में
यूरोपीय यूनियन चीन पर निर्भरता कम करना चाहता है. साथ ही रूस से ऊर्जा आयात में कटौती के बाद यूरोप नए सप्लाई सोर्स तलाश रहा है. ऐसे में भारत एक भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरा है. पहले ही भारत से रिफाइंड फ्यूल इलेक्ट्रॉनिक्स और केमिकल की मांग बढ़ी है. FTA इस मांग को और तेज कर सकता है. इससे भारत की रणनीतिक स्थिति मजबूत होगी.
भारतीय उद्योगों की लागत होगी कम
यूरोप से आने वाली हाई एंड मशीनरी मेडिकल डिवाइस और कोर इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स पर टैरिफ घटने से भारतीय उद्योगों की लागत कम होगी. इससे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की प्रोडक्टिविटी बढ़ेगी. रीसाइक्लिंग और MSME क्लस्टर्स को भी फायदा मिलेगा. कम लागत का सीधा असर निर्यात कंपटीशन पर पड़ेगा. भारत ग्लोबल सप्लाई चेन में मजबूत भूमिका निभा सकेगा.
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लंबे समय की ग्रोथ का रास्ता
भारत यूरोपीय यूनियन FTA केवल ट्रेड डील नहीं बल्कि लंबे समय की आर्थिक साझेदारी है. दोनों अर्थव्यवस्थाएं अलग-अलग क्षेत्रों में मजबूत हैं. इसलिए यह डील किसी को नुकसान पहुंचाने के बजाय लागत घटाने और व्यापार बढ़ाने का जरिया बनेगी. ऐसे समय में जब दुनिया में ट्रेड तनाव बढ़ रहे हैं यह समझौता भारत के लिए बड़ी उपलब्धि साबित हो सकता है.
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