Ola Electric पर दिवालिया प्रक्रिया की तलवार, पेमेंट विवाद में फंसी कंपनी की सब्सिडियरी; जानें पूरा मामला
Ola Electric की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. अब उसकी सब्सिडियरी Ola Electric Technologies के खिलाफ Rosmerta Digital Services ने दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने के लिए NCLT में याचिका दायर की है. आखिर क्या है पूरा मामला? जानें यहां.
इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता ओला इलेक्ट्रिक (Ola Electric) की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. कंपनी की सब्सिडियरी Ola Electric Technologies Pvt Ltd के खिलाफ केस दर्ज किया गया है. Rosmerta Digital Services Ltd ने आरोप लगाया है कि ओला 18-20 करोड़ रुपये का पेमेंट करने में चूक गई ऐसे में अब कंपनी पर दिवालिया प्रक्रिया (Insolvency Proceedings) शुरू करनी चाहिए. इसी के तहत उन्होंने कोर्ट में याचिका भी दायर की है.
NCLT में दायर हुई याचिका
कंपनी के नियामक फाइलिंग के अनुसार, रोजमर्रा डिजिटल सर्विसेज लिमिटेड ने इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC), 2016 की धारा 9 के तहत नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) बेंगलुरु बेंच में याचिका दायर की है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि ओला इलेक्ट्रिक टेक्नोलॉजी पर उनकी सेवाओं का भुगतान बकाया है और इस कारण कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) शुरू किया जाए. ओला इलेक्ट्रिक मोबिलिटी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह इन दावों से असहमत है और कानूनी कार्रवाई के जरिए अपने हितों की रक्षा करेगी.
Ola Electric ने क्या कहा?
19 फरवरी, 2025 को कंपनी ने कहा था कि वह रोजमर्रा डिजिटल सर्विसेज लिमिटेड और Shimnit India Pvt Ltd के साथ अपने करार की शर्तों पर फिर से बातचीत करेगी. ओला इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के मुताबिक, इसका उद्देश्य रजिस्ट्रेशन लागत को कम करना और प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाना था. कंपनी ने यह भी दावा किया कि उसका व्हीकल रजिस्ट्रेशन सिस्टम अब अंतिम चरण में है और प्रतिदिन 800 से अधिक वाहनों का रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है, जो जनवरी और फरवरी 2025 की औसत दैनिक बिक्री से अधिक है.
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यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब Ola Electric Mobility अपने विभिन्न विभागों में करीब 1000 कर्मचारियों की छंटनी कर रही है. यह कदम कंपनी के खर्चों को कम करने और घाटे को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया है.
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