RBI ने जापान के SMBC को भारत में सब्सिडियरी कंपनी बनाने की दी मंजूरी, जानें- क्या है इसका मतलब
RBI ने एक बयान में कहा, 'बैंक को भारत में अपनी मौजूदा ब्रांच को बदलकर पूरी तरह से अपनी सब्सिडियरी कंपनी (WOS) स्थापित करने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है.' पूरी तरह से सब्सिडियरी कंपनी भारत में एक अलग कानूनी इकाई होती है जो बैंक को लोकल बैंकों जैसा ट्रीटमेंट देती है.
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बुधवार को कहा कि उसने जापान के सुमितोमो मित्सुई बैंकिंग कॉर्पोरेशन (SMBC) को भारत में पूरी तरह से अपनी सब्सिडियरी कंपनी स्थापित करने के लिए ‘सैद्धांतिकट मंजूरी दे दी है. SMBC अभी भारत में नई दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और बेंगलुरु में अपनी चार ब्रांच के जरिए बैंकिंग कारोबार कर रहा है.
सब्सिडियरी कंपनी बनाने की मंजूरी
RBI ने एक बयान में कहा, ‘बैंक को भारत में अपनी मौजूदा ब्रांच को बदलकर पूरी तरह से अपनी सब्सिडियरी कंपनी (WOS) स्थापित करने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है.’ सेंट्रल बैंक ने आगे कहा कि वह SMBC को पूरी तरह से अपनी सब्सिडियरी कंपनी में बैंकिंग कारोबार शुरू करने के लिए लाइसेंस देने पर विचार करेगा, जब उसे यह भरोसा हो जाएगा कि बैंक ने ‘सैद्धांतिक’ मंजूरी के हिस्से के तौर पर RBI द्वारा तय की गई जरूरी शर्तों का पालन किया है.
2025 में SMBC ने प्राइवेट सेक्टर के लेंडर YES बैंक में 24.22 फीसदी हिस्सेदारी हासिल की, जिससे वह इसका सबसे बड़ा शेयरहोल्डर बन गया, जबकि SBI के पास 10 फीसदी से ज्यादा की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी बनी हुई है.
ब्रांच खोलने की आजादी
पूरी तरह से सब्सिडियरी कंपनी भारत में एक अलग कानूनी इकाई होती है जो बैंक को लोकल बैंकों जैसा ट्रीटमेंट देती है, जिसमें बिना किसी रोक-टोक के ब्रांच खोलने की आजादी शामिल है. ऐसी सब्सिडियरी की कैपिटल पेरेंट बैंक से अलग रखी जाती है. पिछले साल, SMBC ने यस बैंक में 24.22 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी थी.
इस ट्रांजैक्शन के साथ, SMBC यस बैंक का सबसे बड़ा शेयरहोल्डर बन गया था, जबकि SBI अभी भी 10 फीसदी से ज्यादा की बड़ी हिस्सेदारी रखता है.
क्या होगा फायदा?
प्राइवेट सेक्टर के बैंक ने SMBC की ग्लोबल ताकतों का फायदा उठाने का इरादा बताया है. खासकर जापान और भारत के बीच ट्रेड और इन्वेस्टमेंट फ्लो को आसान बनाने में, ताकि अपनी कॉर्पोरेट बैंकिंग, ट्रेजरी सेवाओं और क्रॉस-बॉर्डर सॉल्यूशंस में ग्रोथ को तेज किया जा सके.
SBI और सात इन्वेस्टर लेंडर्स ने मार्च 2020 में यस बैंक रिकंस्ट्रक्शन स्कीम के तहत बैंक में इन्वेस्ट किया था. सरकारी SBI, जिसके पास यस बैंक में 24 फीसदी हिस्सेदारी थी. अब हिस्सेदारी कम होने के बाद 10 फीसदी से थोड़ी ज्यादा हिस्सेदारी बची है.
मार्च 2020 में कोविड संकट शुरू होने से कुछ हफ्ते पहले RBI और सरकार ने एक बचाव अभियान चलाया था, जिसमें SBI के नेतृत्व वाले बैंकों ने यस बैंक में 79 फीसदी हिस्सेदारी ली और उसे डूबने से बचाया था.
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