RBI MPC Meeting 2026: EMI, लोन और महंगाई पर बड़ा फैसला 8 अप्रैल को, जानिए क्या हो सकता है असर

RBI की MPC बैठक 6 अप्रैल से शुरू हो रही है, जिसमें ब्याज दरों पर बड़ा फैसला लिया जाएगा. क्या इस बार EMI में राहत मिलेगी या फिर दरें स्थिर रहेंगी? जानिए इस अहम बैठक से जुड़ी हर जरूरी बात और आपके पैसों पर इसका क्या असर पड़ सकता है.

RBI MPC 2026 Image Credit: money9 live AI image

नए वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत के साथ ही देश की अर्थव्यवस्था से जुड़ी एक अहम बैठक होने जा रही है, जिस पर बाजार से लेकर आम लोगों तक की नजरें टिकी हैं. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) 6 अप्रैल से 8 अप्रैल तक अपनी बैठक करेगी. इस बैठक में लिए गए फैसले सीधे तौर पर आपकी जेब, लोन की किस्त और निवेश के माहौल को प्रभावित कर सकते हैं. इस बार विशेषज्ञों को ब्याज दर में किसी बदलाव की उम्मीद नहीं दिख रही है.

तीन दिन चलेगी बैठक, 8 अप्रैल को आएगा फैसला

आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में छह सदस्यीय समिति तीन दिन तक आर्थिक हालात पर चर्चा करेगी. इस बैठक का नतीजा 8 अप्रैल को घोषित किया जाएगा. बाजार के जानकारों का मानना है कि इस बार आरबीआई ब्याज दरों में कोई कटौती नहीं करेगा और फिलहाल स्थिति को स्थिर रखने पर जोर देगा.

आरबीआई फरवरी 2025 से अब तक कुल 125 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर चुका है, जिससे रेपो रेट घटकर 5.25% पर आ गया है. पिछली बार दिसंबर 2025 में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती की गई थी. इसके बाद फरवरी 2026 की बैठक में दरों को स्थिर रखा गया था और इस बार भी उसी रुख को जारी रखने की संभावना जताई जा रही है.

फोकस रहेगा महंगाई और लिक्विडिटी पर

इस बार आरबीआई का ध्यान ब्याज दर बदलने के बजाय बाजार में नकदी (लिक्विडिटी) को संतुलित रखने, बॉन्ड मार्केट को स्थिर करने और रुपये से जुड़े जोखिमों को संभालने पर रह सकता है.

अगर ब्याज दरें स्थिर रहती हैं, तो होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन की EMI में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा. वहीं, निवेशकों के लिए भी बाजार में स्थिरता बनी रह सकती है.

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साल में छह बार होती है MPC बैठक

आरबीआई हर वित्त वर्ष में छह बार एमपीसी की बैठक करता है. 2026-27 के लिए तय कार्यक्रम के मुताबिक, अगली बैठकें जून, अगस्त, अक्टूबर, दिसंबर और फरवरी में होंगी. हर बैठक में देश की आर्थिक स्थिति की समीक्षा की जाती है और जरूरत के अनुसार नीतिगत फैसले लिए जाते हैं.