रूस से तेल लेकर रिलायंस के प्लांट की तरफ बढ़ रहे हैं 3 टैंकर, मुकेश अंबानी फिर से शुरू कर दी रूसी क्रूड की खरीदारी
अक्टूबर में अमेरिका द्वारा रोसनेफ्ट PJSC और लुकोइल PJSC को ब्लैकलिस्ट करने के बाद रिलायंस ने खरीदारी रोक दी थी. भारत को रूस के साथ अपने तेल व्यापार को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन के खास सदस्यों की आलोचना का सामना करना पड़ा है. इसका जवाब भारत ने खुलकर विरोध करके दिया है.
रूस के क्रूड ऑयल को लेकर कम से कम तीन टैंकर, भारत के पश्चिमी तट पर रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के प्लांट की ओर बढ़ रहे हैं. रिफाइनरी ने अमेरिकी निगरानी बढ़ने के कारण कुछ समय के लिए खरीदारी रोकने के बाद अब थोड़ी-बहुत खरीदारी फिर से शुरू कर दी है.
डेटा एनालिटिक्स फर्म Kpler के अनुसार, लगभग 2.2 मिलियन बैरल यूराल्स से भरे जहाज फिलहाल जामनगर के बड़े कॉम्प्लेक्स की ओर जा रहे हैं और इस महीने की शुरुआत में अपना कार्गो डिलीवर करने वाले हैं. इस कच्चे तेल को एक्सपोर्ट की बजाय घरेलू इस्तेमाल के लिए फ्यूल में प्रोसेस किया जाएगा.
रिलायंस ने रोक दी थी खरीदारी
ईटी में छपी खबर के अनुसार, ब्लूमबर्ग न्यूज ने पिछले हफ्ते रिपोर्ट किया था कि अक्टूबर में अमेरिका द्वारा रोसनेफ्ट PJSC और लुकोइल PJSC को ब्लैकलिस्ट करने के बाद रिलायंस ने खरीदारी रोक दी थी, लेकिन अब उसने दूसरे सप्लायर से तेल खरीदना शुरू कर दिया है. रोसनेफ्ट पहले भारतीय रिफाइनर के लिए रूसी तेल का सबसे बड़ा सोर्स था, जिसके तहत रोजाना 5,00,000 बैरल तेल सप्लाई करने की एक टर्म डील थी.
नीचले स्तर पर पहुंच गया था इंपोर्ट
भारत को रूस के साथ अपने तेल व्यापार को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन के खास सदस्यों की आलोचना का सामना करना पड़ा है. इसका जवाब भारत ने खुलकर विरोध करके दिया है. इस अनिश्चितता के कारण देश की रिफाइनरियों ने अपनी खरीदारी कम कर दी है, जिससे पिछले महीने आयात तीन साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया था.
रिलायंस ने जमकर खरीदा है रूस से तेल
केपलर के डेटा के अनुसार, अरबपति मुकेश अंबानी की रिलायंस 2024 से 2025 के ज्यादातर समय में रूसी कच्चे तेल की दुनिया की सबसे बड़ी खरीदार थी. यूक्रेन में युद्ध के बाद जब दूसरे देशों ने OPEC+ प्रोड्यूसर से एनर्जी लेना बंद कर दिया, तो भारत और चीन उसके तेल फ्लो के लिए मुख्य आउटलेट बन गए.
रिलायंस द्वारा हाल ही में खरीदे गए कार्गो की सप्लाई ट्रेडर्स Alghaf Marine DMCC, Redwood Global Supply FZ LLC, RusExport और Ethos Energy कर रहे हैं. Alghaf Marine और Redwood Global पर UK ने बैन लगा दिया है और पहली कंपनी Lukoil की ट्रेडिंग ब्रॉन्च Litasco की मिडिल ईस्टर्न ब्रांच की ‘सक्सेसर’ कंपनी है.
कितनी घटी थी खरीदारी?
Kpler के डेटा के अनुसार, दिसंबर में रिलायंस के जामनगर रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स को रूसी तेल की डिलीवरी घटकर लगभग 2,70,000 बैरल प्रति दिन हो गई, जो ग्लोबल सोर्स से होने वाले कुल इंपोर्ट का 20% से थोड़ा कम है. यह जनवरी से नवंबर की अवधि की तुलना में कम है, जब रूसी ग्रेड 40% से ज्यादा थे.
रिलायंस अकेली भारतीय रिफाइनर नहीं है जो रूसी कच्चा तेल खरीद रही है, बल्कि सरकारी इंडियन ऑयल कॉर्प और भारत पेट्रोलियम कॉर्प भी गैर-प्रतिबंधित विक्रेताओं से कार्गो खरीद रही हैं. उन्हें भारी छूट, कम रिफाइनिंग मार्जिन और अमेरिका के साथ व्यापार बातचीत की स्थिति को लेकर अनिश्चितताओं ने आकर्षित किया है.