रुपये में गिरावट का सिलसिला जारी, शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले 92.02 पर पहुंचा

शुक्रवार को विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपये की चाल सुर्खियों में रही. कारोबार के दौरान रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92.02 के ऐतिहासिक निचले स्तर तक फिसल गया, हालांकि बाद में इसमें मामूली सुधार देखने को मिला. डॉलर की मजबूती, वैश्विक अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने रुपये पर दबाव बनाए रखा.

रुपये का रिकॉर्ड निचला स्तर Image Credit: tv9 bharatvarsh

Rupee Dollar Rate: शुक्रवार को भारतीय करेंसी मार्केट में बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया कारोबार के दौरान अपने अब तक के सबसे निचले स्तर 92.02 तक फिसल गया. हालांकि, सत्र के आखिरी घंटों में इसमें हल्की रिकवरी दर्ज की गई और रुपया 91.97 प्रति डॉलर पर बंद हुआ. पिछले बंद भाव के मुकाबले यह महज 2 पैसे की मामूली बढ़त रही, लेकिन दिन के दौरान बना रिकॉर्ड निचला स्तर बाजार की चिंता को साफ तौर पर दिखाता है.

इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में शुक्रवार को रुपया 91.89 पर खुला था. शुरुआती कारोबार में इसमें मजबूती देखने को मिली और यह 91.82 तक पहुंच गया, लेकिन बाद में अमेरिकी डॉलर की मांग बढ़ने और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के चलते दबाव बढ़ गया. इसी दबाव में रुपया फिसलकर 92.02 के स्तर तक चला गया, जो अब तक का सबसे कमजोर स्तर रहा है.

डॉलर की मजबूती और एफआईआई बिकवाली का असर

अमेरिकी डॉलर की मजबूती और जियो पॉलिटिकल टेंशन ने उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव बनाया. इसके साथ ही विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार निकासी ने भी रुपये की चाल को कमजोर किया. घरेलू शेयर बाजारों में गिरावट का रुख भी निवेशकों की धारणा पर भारी पड़ा.

गुरुवार को भी रुपया लगभग सपाट बंद हुआ था और उस दिन यह 91.99 प्रति डॉलर के स्तर पर रहा, जो तब तक का निचला स्तर था. इससे पहले 23 जनवरी को रुपया पहली बार 92 प्रति डॉलर के करीब पहुंचा था, लेकिन शुक्रवार को इस स्तर को पार कर जाना बाजार के लिए अहम संकेत माना जा रहा है.

कच्चे तेल से मिली सीमित राहत

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और कमोडिटी कीमतों में आई गिरावट से रुपये को कुछ राहत जरूर मिली, लेकिन यह राहत ज्यादा देर टिक नहीं पाई. अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में दोबारा मजबूती आने से रुपये की रिकवरी सीमित रह गई. आमतौर पर डॉलर इंडेक्स में बढ़त आने से रुपये जैसी मुद्राओं पर दबाव बढ़ता है.

इकोनॉमिक सर्वे की अहम टिप्पणी

संसद में पेश किए गए इकोनॉमिक सर्वे में भी रुपये को लेकर अहम टिप्पणी की गई है. सर्वे में कहा गया है कि भारतीय रुपया अपनी वास्तविक क्षमता के मुकाबले कमजोर प्रदर्शन कर रहा है. साथ ही यह भी कहा गया है कि ऐसे समय में भारत में निवेश को लेकर निवेशकों की हिचकिचाहट पर विचार किया जाना चाहिए, जब महंगाई नियंत्रण में है और आर्थिक वृद्धि की संभावनाएं अनुकूल बनी हुई हैं.

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