NSE IPO के लिए SEBI से मिली हरी झंडी, जारी किया NOC; जानें कब तक आ सकता है इश्यू
सेबी ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को IPO के लिए नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट जारी कर दिया है. इस मंजूरी के बाद NSE ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस दाखिल कर सकेगा और अगले 8 से 9 महीनों में IPO लॉन्च होने की उम्मीद है. जानें क्या हैं डिटेल्स.
NSE IPO and SEBI NOC Update: भारत के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के IPO को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. बाजार नियामक SEBI ने NSE को IPO के लिए आवेदन करने की अनुमति दे दी है. सेबी के मार्केट रेगुलेशन डिपार्टमेंट (MRD) ने NSE को नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी कर दिया है. यह मंजूरी NSE के IPO की दिशा में एक अहम और निर्णायक कदम मानी जा रही है.
कितना लग सकता है समय?
रायटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सेबी से हरी झंडी मिलने के बाद अब NSE मर्चेंट बैंकरों और लॉ फर्म्स के साथ औपचारिक रूप से काम शुरू कर सकता है और अपने IPO के लिए जरूरी दस्तावेज, यानी ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) तैयार कर सकता है. NOC मिलने के बाद NSE को IPO लॉन्च करने में करीब 8 से 9 महीने का समय लग सकता है. हालांकि यह IPO ऑफर फॉर सेल (OFS) के रूप में आएगा, यानी इससे एक्सचेंज को कोई नई पूंजी नहीं मिलेगी, बल्कि मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे.
2016 में बनाई थी IPO की योजना
गौरतलब है कि NSE ने पहली बार साल 2016 में IPO लाने की योजना बनाई थी, लेकिन कुछ कानूनी और नियामकीय अड़चनों के चलते इसे वापस लेना पड़ा था. मौजूदा अनलिस्टेड शेयर कीमतों के आधार पर NSE का मार्केट कैप करीब 5 लाख करोड़ रुपये आंका जा रहा है, जिससे यह देश के सबसे बड़े IPOs में से एक हो सकता है.
कैसे जारी हुई NOC?
पहले यह माना जा रहा था कि NSE को IPO के लिए NOC तभी मिलेगी, जब हाई पावर्ड एडवाइजरी कमेटी (HPAC) से सेटलमेंट को मंजूरी मिल जाएगी. लेकिन यह प्रक्रिया काफी लंबी खिंच रही थी. इसी बीच सेबी के संबंधित विभागों ने सैद्धांतिक रूप से कंसेंट मैकेनिज्म के तहत सेटलमेंट पर सहमति बना ली, जिसके बाद HPAC की अंतिम मंजूरी का इंतजार किए बिना NSE को NOC जारी कर दी गई. अब उम्मीद है कि यह मामला जल्द ही HPAC के पास जाएगा और उसके बाद सेबी के दो होल-टाइम मेंबर्स (WTMs) की समिति के सामने अंतिम मंजूरी के लिए रखा जाएगा. इनकी स्वीकृति के बाद सेबी सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामला वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर सकेगा.
क्यों अटका था IPO?
को-लोकेशन और डार्क फाइबर केस को लेकर NSE ने 20 जून 2025 को सेबी के सामने सेटलमेंट एप्लीकेशन दायर की थी. मामले से जुड़े लोगों के अनुसार, NSE ने इन मामलों के निपटारे के लिए करीब 1,400 करोड़ रुपये चुकाने पर सहमति जताई है. नवंबर 2025 में जारी वित्तीय नतीजों में NSE ने इस सेटलमेंट के लिए 1,297 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, इसके अलावा पहले से 100 करोड़ रुपये सेबी के पास जमा किए जा चुके हैं, जो 2023 में SAT के आदेश के तहत जमा कराए गए थे.
क्या था आरोप?
को-लोकेशन मामले में आरोप था कि कुछ ब्रोकर्स ने NSE के को-लोकेशन सिस्टम का फायदा उठाते हुए अपने सर्वर एक्सचेंज के सर्वर के पास लगाए, जिससे उन्हें बाजार डेटा तेजी से मिला और बाकी निवेशकों की तुलना में अनुचित लाभ मिला. वहीं डार्क फाइबर केस में सेबी का आरोप था कि NSE ने कुछ चुनिंदा ब्रोकर्स को ज्यादा तेज कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई, जिससे उन्हें ट्रेडिंग में बढ़त मिली.
लंबे समय से चल रही बातचीत
रिपोर्ट के मुताबिक, इस सेटलमेंट अमाउंट पर करीब एक साल से बातचीत चल रही थी और कई दौर की चर्चा के बाद लगभग 1,400 करोड़ रुपये की राशि पर सहमति बनी. हालांकि अंतिम भुगतान राशि में थोड़ा बदलाव हो सकता है, क्योंकि सेटलमेंट की तारीख तक 12 फीसदी ब्याज भी जोड़ा जाएगा.
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