पश्चिम एशिया में तनाव के बीच भारत ने रूस से बढ़ाई तेल की खरीदारी, फरवरी में आई थी इतनी गिरावट

फरवरी में शिपमेंट साल-दर-साल 32 फीसदी गिरकर लगभग 1 मिलियन बैरल प्रति दिन रह गया, जो जून 2025 में देखे गए उच्चतम स्तर का लगभग आधा है. फरवरी में आई गिरावट के बावजूद, भारत की कच्चे तेल की रणनीति में रूस की केंद्रीय भूमिका बनी हुई है. सरकारी अधिकारियों ने बताया कि दिक्कतों के बीच, पश्चिम एशिया के तेल पर भारत की निर्भरता कम हुई है.

रूस के कच्चे तेल का भारत बड़ा खरीदार. Image Credit: AI

फरवरी में थोड़ी गिरावट के बाद, रूसी कच्चा तेल फिर से भारत के लिए तेल का सबसे बड़ा सोर्स बन सकता है. पिछले महीने इराक ने रूस को पीछे छोड़ दिया था, लेकिन अमेरिका के प्रतिबंधों में ढील और मिडिल ईस्ट में हाल की उथल-पुथल से संकेत मिलता है कि रूसी तेल की सप्लाई में तेजी से सुधार होगा. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने इंडस्ट्री के जानकारों के हवाले से बताया है कि भारतीय रिफाइनर दिसंबर से ही रूस से होने वाले आयात में कटौती कर रहे थे.

फरवरी में शिपमेंट आई थी गिरावट

फरवरी में शिपमेंट साल-दर-साल 32 फीसदी गिरकर लगभग 1 मिलियन बैरल प्रति दिन रह गया, जो जून 2025 में देखे गए उच्चतम स्तर का लगभग आधा है. इस गिरावट ने भारत को अमेरिका के साथ एक अंतरिम व्यापार समझौता करने में मदद की, जबकि पश्चिम एशिया के कच्चे तेल पर निर्भरता बढ़ गई.

पश्चिम एशिया से आयात में तेजी

रॉयटर्स के सूत्रों के अनुसार, फरवरी में इराक से आयात दो साल के उच्चतम स्तर 1.18 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया, जबकि सऊदी अरब से शिपमेंट बढ़कर लगभग 9,98,000 बैरल प्रतिदिन हो गया, जो दिसंबर 2021 के बाद का सबसे मजबूत स्तर है. कुल मिलाकर, भारत की कच्चे तेल की बास्केट में पश्चिम एशिया की हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 59 फीसदी हो गई, जो अगस्त 2022 के बाद का उच्चतम स्तर है.

रूसी तेल की वापसी

फरवरी में आई गिरावट के बावजूद, भारत की कच्चे तेल की रणनीति में रूस की केंद्रीय भूमिका बनी हुई है. शिप ट्रैकिंग फर्म Kpler के लीड रिसर्च एनालिस्ट सुमित रितोलिया ने कहा, ‘भारत की कच्चे तेल के इंपोर्ट की रणनीति में रूसी तेल की अहम भूमिका बनी हुई है.’ शिपमेंट पहले ही बढ़कर करीब 1.8 मिलियन bpd तक पहुंच गया है और मार्च में यह 2–2.2 मिलियन bpd तक पहुंच सकता है. इसकी वजह है अमेरिका और इजरायल का ईरान के साथ चल रहा टकराव, जिसने होर्मुज़ जलडमरूमध्य से होने वाले तेल की सप्लाई को बाधित कर दिया है.

सप्लायर्स में डायवर्सिफिकेशन

सरकारी अधिकारियों ने बताया कि दिक्कतों के बीच, पश्चिम एशिया के तेल पर भारत की निर्भरता कम हुई है. अब लगभग 70% तेल दूसरे स्रोतों से आयात किया जा रहा है. फरवरी के आंकड़ों से यह भी पता चला कि ब्राजील से तेल के आयात में तेजी से बढ़ोतरी हुई है, जिससे यह दक्षिण अमेरिकी देश, संयुक्त अरब अमीरात के बाद चौथा सबसे बड़ा सप्लायर बन गया है.

भारत के कच्चे तेल के आयात का पैटर्न एक संतुलन साधने की कवायद को दर्शाता है. भू-राजनीतिक जोखिमों को संभालते हुए, दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल उपभोक्ता के लिए आपूर्ति को स्थिर बनाए रखना.

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