चांदी 3 लाख के पार, लेकिन अब भी है कमाई का मौका, जानें क्या बन रहा है ट्रिगर, सोने पर भी आया बड़ा अपडेट

सोना और चांदी एक बार फिर निवेशकों के रडार पर हैं. ग्लोबल संकेत, सेंट्रल बैंक मूवमेंट और बाजार के कुछ ऐसे आंकड़े सामने आए हैं, जो स्टॉक मार्केट से जुड़े निवेशकों को नई रणनीति पर सोचने को मजबूर कर सकते हैं. क्या कीमती धातुएं शेयर बाजार के लिए बड़ा संकेत दे रही हैं, जवाब छिपा है इन ट्रेंड्स में.

Gold and Silver forcast Image Credit: Getty Images

Gold and Silver Outlook: 2025 में सोना और चांदी ने जिस तरह रिकॉर्ड स्तर छुए, उसके बाद निवेशकों के मन में एक बड़ा सवाल है, क्या अब भी इस तेजी में दम बचा है या फिर मुनाफा वसूली का वक्त आ गया है. HDFC Securities की Prime Research रिपोर्ट बताती है कि सोना और चांदी की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है. मैक्रो इकोनॉमिक हालात, सेंट्रल बैंकों की खरीद, सप्लाई की कमी और निवेशकों की बदलती सोच, ये सभी फैक्टर 2026 में भी कीमती धातुओं को मजबूत सहारा दे रहे हैं.

सोने के पीछे की बड़ी ताकतें

सोने की सबसे बड़ी मजबूती सेंट्रल बैंकों से आ रही है. 2022 से लगातार हर साल 1000 टन से ज्यादा सोने की खरीद हो रही है. 2025 में भी करीब 900 टन सोना सेंट्रल बैंकों ने खरीदा. इसकी वजह साफ है- डॉलर पर निर्भरता घटाना, भू-राजनीतिक जोखिम से बचाव और महंगाई के खिलाफ सुरक्षा.

इसके साथ ही अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों में कटौती के संकेत और कमजोर डॉलर ने सोने को और आकर्षक बना दिया है. जब ब्याज दरें गिरती हैं, तो बिना ब्याज वाला सोना निवेशकों को ज्यादा पसंद आता है.

चांदी: इंडस्ट्रियल डिमांड का सुपरस्टार

अगर सोना सुरक्षित निवेश है, तो चांदी ग्रोथ की कहानी बन रही है. 2021 से 2025 के बीच चांदी लगातार सप्लाई डेफिसिट में रही है. कुल मिलाकर करीब 800 मिलियन औंस की कमी दर्ज की गई है, जो लगभग एक साल के वैश्विक उत्पादन के बराबर है. चांदी आज ऑल टाइम हाई बनाते हुए 3,01,315 रुपये प्रति 1 किलो पर पहुंच गया है.

इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, सोलर पैनल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी इंडस्ट्री में चांदी की मांग तेजी से बढ़ रही है. वहीं माइनिंग से सप्लाई लगभग स्थिर है. लंदन और चीन जैसे बड़े हब्स में चांदी का स्टॉक भी लगातार घटा है.

गोल्ड-सिल्वर रेशियो क्या इशारा कर रहा है

2025 की शुरुआत में गोल्ड-सिल्वर रेशियो करीब 90:1 था, जो अब घटकर लगभग 57:1 पर आ गया है. ऐतिहासिक रूप से 50:1 को संतुलित स्तर माना जाता है. रिपोर्ट के मुताबिक, अगर सोना 4500 डॉलर के आसपास रहता है और रेशियो 50:1 तक आता है, तो चांदी की कीमत करीब 90 डॉलर हो सकती है. वहीं 40:1 के स्तर पर चांदी 110 डॉलर से ऊपर जा सकती है. ये आंकड़ा भारतीय बाजार में 3.50 लाख रुपये से ज्यादा बैठता है. इस आंकड़ें से साफ है, आने वाले समय में चांदी, सोने से बेहतर प्रदर्शन कर सकती है.

US और MCX मार्केट आउटलुक

US मार्केट में सोने का आउटलुक बुलिश बताया गया है. गिरावट पर खरीदारी की सलाह दी गई है.

  • US गोल्ड टारगेट: 5108 डॉलर और 5380 डॉलर
  • MCX गोल्ड टारगेट: ₹1,57,561 और ₹1,62,500

चांदी के मामले में भी तस्वीर मजबूत है.

  • US सिल्वर टारगेट: 97,103 और 115 डॉलर
  • MCX सिल्वर टारगेट: ₹3,22,980, ₹3,46,695 और ₹3,61,365

2026 के लिए ETF सिफारिशें

ETF नामBuying RangeAvg LevelTargetTime Frame
SBI Gold ETF117–1191061361 वर्ष
HDFC Gold ETF117–1191061361 वर्ष
ICICI Prudential Silver ETF240–246210285, 3001 वर्ष
HDFC Silver ETF231–236203274, 2901 वर्ष

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निवेशकों को क्या रणनीति अपनानी चाहिए

रिपोर्ट के मुताबिक, सोना और चांदी दोनों का लॉन्ग टर्म ट्रेंड अभी भी मजबूत है. निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो का करीब 10 प्रतिशत हिस्सा कीमती धातुओं में रखने की सलाह दी गई है. हालांकि अगर सरकार बजट में इंपोर्ट ड्यूटी घटाती है, तो घरेलू कीमतों पर थोड़े समय के लिए दबाव आ सकता है.

कुल मिलाकर, 2026 में भी सोना स्थिरता देगा और चांदी रफ्तार दिखा सकती है. जोखिम समझकर और धीरे-धीरे निवेश बढ़ाना ही सबसे समझदारी भरा कदम होगा.

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