Byju’s को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, BCCI सेटलमेंट पर CoC की मंजूरी अनिवार्य; NCLAT का आदेश बरकरार
सुप्रीम कोर्ट ने Byju’s के संस्थापक बायजू रवींद्रन को बड़ा झटका देते हुए NCLAT के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें BCCI के साथ हुए सेटलमेंट को वापस लेने से पहले CoC की मंजूरी अनिवार्य बताई गई थी. अदालत ने कहा कि अब प्रक्रिया तय कानून के अनुसार ही चलेगी.
Byju’s BCCI Settlement SC: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार, 28 नवंबर को Byju’s के संस्थापक बायजू रवींद्रन को उस समय बड़ा झटका दिया, जब उनकी वह अपील खारिज कर दी गई जिसमें उन्होंने NCLAT के आदेश पर आपत्ति जताई थी. यह आदेश Think and Learn Private Limited- जो Byju’s को संचालित करती है और BCCI के बीच हुए सेटलमेंट से जुड़ा है. NCLAT ने साफ किया था कि BCCI की ओर से शुरू की गई दिवाला प्रक्रिया को वापस लेने से पहले इस सेटलमेंट को क्रेडिटर्स की कमेटी (CoC) की मंजूरी मिलना आवश्यक है. सुप्रीम कोर्ट की दो-न्यायाधीशों वाली पीठ ने NCLAT के 17 अप्रैल के आदेश को सही ठहराते हुए कहा कि अब रवींद्रन को नियमों के अनुसार आगे की प्रक्रिया अपनानी होगी.
सुनवाई में अदालत ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान अदालत ने बायजू रवींद्रन के वकील नवीन पाहवा से पूछा कि आखिर NCLAT के आदेश में क्या गलत है, क्योंकि CoC जब बन चुकी है, तो सेटलमेंट और विथड्रावल की प्रक्रिया उसी के नियमानुसार ही चलेगी. हालांकि पाहवा ने यह दलील दी कि पहले दायर याचिका तब दाखिल की गई थी जब CoC का गठन नहीं हुआ था और समिति याचिका लंबित रहते हुए बनी. लेकिन अदालत ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि अगर इसे स्वीकार किया जाए तो पूरी दिवाला प्रक्रिया का उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा. पाहवा ने यह भी कहा कि BCCI की पूरी राशि व्यक्तिगत रूप से भुगतान कर दी गई है, हालांकि अदालत का मानना था कि इससे कानूनी प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं आता.
कब शुरू हुआ मामला?
यह मामला तब शुरू हुआ था जब BCCI ने 16 जुलाई 2024 को Byju’s के खिलाफ स्पॉन्सरशिप की बकाया राशि न मिलने पर दिवाला प्रक्रिया शुरू की. बाद में 31 जुलाई को दोनों पक्षों में समझौता हो गया और BCCI का पूरा बकाया रिजू रवींद्रन ने चुका दिया. NCLAT ने 2 अगस्त को इस सेटलमेंट को स्वीकार करते हुए दिवाला प्रक्रिया वापस लेने की मंजूरी भी दे दी थी, लेकिन 14 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश पर रोक लगा दी. बाद में NCLT ने 29 जनवरी 2025 के आदेश में कहा कि यह सेटलमेंट CoC के गठन के बाद माना जाएगा, इसलिए विथड्रावल एप्लीकेशन को CoC के सामने रखा जाए. NCLAT ने इस फैसले को बरकरार रखा और इसी आदेश के खिलाफ रवींद्रन सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे, जहां अब उनकी याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया गया है.
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