लग्जरी घड़ियां इतनी महंगी क्यों होती है, कैसे तय होती है 1,2 और 13 करोड़ की कीमत, जाने क्या होता है इसका यूज

लग्जरी घड़ियां सिर्फ समय बताने के लिए नहीं, बल्कि कला, तकनीक और स्टेटस का प्रतीक होती हैं. Jacob & Co की 13.7 करोड़ रुपये की Vantara घड़ी इसकी मिसाल है. जटिल मैकेनिकल मूवमेंट, कीमती जेमस्टोन, ब्रांड वैल्यू और लिमिटेड एडिशन होने की वजह से इनकी कीमत करोड़ों तक पहुंच जाती है.

लग्जरी घड़ी Image Credit: canva_

Luxury Watch Price And Making Process: कलाई पर बंधी घड़ी अगर 13 करोड़ रुपये की हो, तो सवाल उठना लाजमी है कि आखिर इसमें ऐसा क्या खास है. जब समय मोबाइल फोन भी सेकेंडों में बता देता है, तो फिर जैकब एंड कंपनी Jacob & Co जैसी लग्जरी घड़ियों की कीमत करोड़ों तक क्यों पहुंच जाती है. आखिर ऐसा क्या होता है इन घड़ियों में, जिसकी वजह से 1, 2 या फिर 13 करोड़ रुपये की कीमत तय होती है. साथ ही यह समझना भी जरूरी है कि इतनी महंगी घड़ी में असल यूज क्या है, और अगर कोई इसे खरीद भी ले, तो इसका इस्तेमाल आखिर किस लिए किया जाता है.

Jacob & Co की Vantara घड़ी क्यों चर्चा में है

असल में लग्जरी वॉच सिर्फ टाइम देखने का जरिया नहीं होता, बल्कि स्टेटस, आर्ट और टेक्नॉलॉजी का मेल होती है. लग्जरी वॉचमेकर Jacob & Co ने इस हफ्ते Opera Vantara Green Camo नाम की एक खास घड़ी लॉन्च की है. इसकी कीमत करीब 1.5 मिलियन डॉलर यानी लगभग 13.7 करोड़ रुपये बताई जा रही है. यह घड़ी गुजरात की वंतारा वाइल्डलाइफ रेस्क्यू और कंजरवेशन पहल को समर्पित है, जिसे अनंत अंबानी लीड कर रहे हैं.

इस घड़ी के डायल के बीच में अनंत अंबानी की हाथ से बनाई गई छोटी आकृति है. इसके साथ शेर और बंगाल टाइगर की मिनिएचर मूर्तियां भी लगी हैं. केस और डायल में कुल 397 जेमस्टोन जड़े हैं, जिनका कुल वजन 21.98 कैरेट है. इनमें ग्रीन सैफायर, व्हाइट डायमंड, डेमैन्टॉइड गार्नेट और त्सावोराइट शामिल हैं. कुल वजन 21.98 कैरेट है. यह घड़ी Jacob & Co की Opera collection का हिस्सा है, जो घूमने वाले मूवमेंट और म्यूज़िकल फीचर्स के लिए जानी जाती है.

लग्जरी घड़ी आखिर होती क्या है?

लग्जरी घड़ियां आम घड़ियों से बिल्कुल अलग होती हैं. इनमें क्वार्ट्ज मशीन की जगह मैकेनिकल मूवमेंट होता है, जिसे सैकड़ों छोटे पुर्जों को हाथ से तैयार किया जाता है. इनमें टूरबिलॉन, मिनट रिपीटर और परपेचुअल कैलेंडर जैसे जटिल फीचर्स होते हैं, जिन्हें बनाना आसान नहीं होता.

इन घड़ियों की कीमत सिर्फ मैटेरियल की वजह से नहीं, बल्कि कारीगरी, समय, ब्रांड की विरासत और बेहद सीमित संख्या की वजह से तय होती है.

1, 2 या 13 करोड़ की कीमत कैसे तय होती है

लग्जरी वॉच की कीमत तय करने में चार बड़े फैक्टर होते हैं. पहला, मूवमेंट की जटिलता. दूसरा, इस्तेमाल किए गए कीमती पत्थर और मैटीरियल. तीसरा, ब्रांड का इतिहास और प्रतिष्ठा. चौथा, घड़ी की संख्या यानी कितनी लिमिटेड है. स्विट्जरलैंड के मशहूर ब्रांड्स की मैकेनिकल घड़ियां भारत में आमतौर पर 3 से 5 लाख रुपये से शुरू होती हैं. वहीं, कस्टमाइज्ड और लिमिटेड एडिशन घड़ियां कई करोड़ रुपये तक पहुंच जाती हैं.

दुनिया की लग्जरी वॉच मार्केट पर किनका दबदबा है.

ग्लोबल लग्जरी वॉच मार्केट पर ज्यादातर स्विस ब्रांड्स का कब्जा है. रेवेन्यू के मामले में Rolex सबसे बड़ा नाम है. वहीं Patek Philippe, Audemars Piguet और Vacheron Constantin हाई-होरोलॉजी सेगमेंट में आते हैं, जहां घड़ियों की संख्या कम लेकिन कीमत बेहद ज्यादा होती है. Omega, IWC, Jaeger-LeCoultre और Breguet जैसे ब्रांड मिड से हाई सेगमेंट में मौजूद हैं. Jacob & Co इस बाजार के अल्ट्रा-प्रीमियम सिरे पर काम करता है, जहां घड़ी और ज्वेलरी की सीमा लगभग खत्म हो जाती है.

भारत में लग्जरी घड़ियों का बाजार कैसा है?

भारत में हाई-एंड लग्जरी घड़ियों का निर्माण नहीं होता. यहां बाजार पूरी तरह इंपोर्टेड ब्रांड्स पर निर्भर है. Ethos और द वॉच लैब जैसे रिटेलर्स भारत में Rolex, Omega, Hublot, Bulgari, Breitling और Jacob & Co जैसे ब्रांड बेचते हैं. भारत में 10 लाख रुपये से ऊपर की घड़ियों पर वेटिंग लिस्ट आम बात है. करोड़ों की घड़ियां आमतौर पर प्राइवेट ऑर्डर या लिमिटेड एडिशन में ही मिलती हैं.

भारत में इतनी महंगी घड़ियां कौन खरीदता है?

लग्जरी घड़ियों के खरीदार आमतौर पर तीन तरह के होते हैं. पहले कलेक्टर्स, जो मूवमेंट और वैल्यू पर ध्यान देते हैं. दूसरे हाई-नेटवर्थ इंडिविजुअल्स, जो इसे स्टेटस सिंबल मानते हैं. तीसरे इन्वेस्टर्स, जो सेकेंडरी मार्केट में रीसेल वैल्यू देखते हैं. भारत में ऐसे खरीदार ज्यादातर बिजनेस फैमिली, बड़े कॉरपोरेट एग्जीक्यूटिव, फिल्म स्टार्स और खिलाड़ी होते हैं.

लिमिटेड एडिशन घड़ियां इतनी महंगी क्यों होती हैं?

लिमिटेड एडिशन घड़ियां तय संख्या में ही बनाई जाती हैं, कई बार सिर्फ 10 या उससे भी कम. एक बार प्रोडक्शन खत्म हुआ तो वही डिजाइन दोबारा नहीं बनता. यही खासितय यानी स्कार्सिटी इनकी कीमत और एक्सक्लूसिविटी दोनों बढ़ा देती है. Vantara घड़ी भी ऐसी ही एक कहानी कहती है, जो कंजरवेशन थीम से जुड़ी है और दोबारा बनाई नहीं जा सकती.

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