समीकरणों के मास्टर थे अजित पवार, अब महाराष्ट्र की सियासत में खड़े हुए सवाल; NCP का भविष्य क्या और बारामती का उत्तराधिकारी कौन?

बुधवार को बारामती में एक हवाई दुर्घटना में उनकी मौत से महाराष्ट्र की राजनीति, और खासकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों ही गुट अनिश्चितता के दौर में चले गए हैं. अजित पवार का पॉलिटिकल करियर उनके चाचा शरद पवार की साये में आगे बढ़ा, लेकिन उन्हें हमेशा अपनी खुद की पहचान बनाने की चाहत थी.

अजित पवार छोड़ गए कई सवाल. Image Credit: Tv9 Bharatvarsh

पूरी एक पीढ़ी के लिए अजित पवार के बिना महाराष्ट्र के राजनीतिक माहौल की कल्पना करना मुश्किल है. महाराष्ट्र के सबसे लंबे समय तक उपमुख्यमंत्री रहे पवार, राज्य के वैकल्पिक पावर सेंटर्स में से एक थे. बुधवार को बारामती में एक हवाई दुर्घटना में उनकी मौत से महाराष्ट्र की राजनीति, और खासकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों ही गुट अनिश्चितता के दौर में चले गए हैं. अजित पवार होने की खासियत इस बात से दिखती है कि उन्होंने खुद को कितने अलग-अलग समीकरणों में फिट किया. उन्होंने पृथ्वीराज चव्हाण, उद्धव ठाकरे, एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस की कैबिनेट में छह बार उपमुख्यमंत्री के रूप में काम किया.

महायुति सरकार पर असर पड़ेगा?

एनसीपी का उनका गुट, जिसके पास पार्टी का आधिकारिक टैग और सिंबल है, महाराष्ट्र में मौजूदा फडणवीस सरकार का हिस्सा है. अजित पवार की मौत उस समय हुई जब वह डिप्टी चीफ मिनिस्टर के पद पर थे. उनके निधन का महायुति सरकार पर असर पड़ेगा, जो बीजेपी, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और उनकी एनसीपी का गठबंधन है. मौजूदा सरकार में एनसीपी के 41 विधायक हैं, जो एक मजबूत स्थिति में है. हालांकि, उनकी मौत का सबसे बड़ा असर NCP पर पड़ेगा, यानी उनकी अपनी पार्टी और उनके चाचा शरद पवार के नेतृत्व वाले NCP (SP) गुट दोनों पर.

खुद की पहचान बनाने की चाहत

अजित पवार का पॉलिटिकल करियर उनके चाचा शरद पवार की साये में आगे बढ़ा, लेकिन उन्हें हमेशा अपनी खुद की पहचान बनाने की चाहत थी. शरद पवार के बड़े भाई अनंतराव के बेटे, अजित पवार कोऑपरेटिव सेक्टर से आगे बढ़े और अपने चाचा की गाइडेंस में पब्लिक लाइफ में आए.

पार्टी संगठन पर अपने कंट्रोल और असहमति बर्दाश्त न करने के लिए जाने जाने वाले अजीत पवार ने NCP के अंदर नेताओं का एक वफादार ग्रुप बनाया, जिनकी वफादारी पूरी तरह से उनके साथ थी. हालांकि, उनके उदय से पवार परिवार के राजनीतिक दायरे में भी बेचैनी पैदा हुई. 2009 में शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले के चुनावी राजनीति में आने के बाद उत्तराधिकार को लेकर अटकलें तेज हो गईं. बाद में तीसरी पीढ़ी के पवार, रोहित पवार के आने से, जिन्होंने विधानसभा चुनाव जीता, तनाव और बढ़ गया.

राजनीतिक ताकत

अजीत पवार गुट के पास अब ज्यादा राजनीतिक ताकत है, जिसमें 41 विधायक और एक लोकसभा सांसद हैं. अजीत पवार ने 2023 में अपने चाचा शरद पवार द्वारा बनाई गई पार्टी NCP को तोड़कर BJP-सेना महायुति गठबंधन में शामिल हो गए थे. इससे पहले 2019 में अजीत पवार BJP में शामिल हुए थे और सुबह-सुबह डिप्टी सीएम पद की शपथ ली थी. हालांकि, शरद पवार के बुलाने पर वह एनसीपी में वापस आ गए थे, लेकिन चार साल बाद उन्होंने फिर से पार्टी तोड़ दी.

क्या NCP गुटों के विलय के संकेत मिल रहे हैं?

अजित पवार की मौत ऐसे समय हुई है जब ऐसे संकेत मिल रहे थे कि वह अपने चाचा के साथ सुलह कर रहे थे और NCP के पहले परिवार को एकजुट कर रहे थे. यह संकेत हाल ही में महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों में दिखा था, जहां NCP ने मिलकर नगर निगम चुनाव लड़ा. दिसंबर में अजित पवार ने घोषणा की थी कि NCP के दोनों गुट पिंपरी-चिंचवड़ में एक साथ चुनाव लड़ेंगे, और कहा था कि ‘परिवार एक साथ आ गया है.’

अजित पवार के निधन के बाद कई सवाल उठते हैं. NCP से उपमुख्यमंत्री कौन बनेगा? क्या NCP के दोनों गुट आपस में मिल जाएंगे? और इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि क्या अजित पवार की NCP इस नाजुक मोड़ पर बिना किसी टूट-फूट के एक ही गुट बनी रहेगी?

अजित पवार की मौत के बाद NCP का आगे क्या होगा?

अनुभवी शरद पवार के अलावा NCP के दो चेहरे थे. अजित पवार और सुप्रिया सुले. शरद पवार ने राज्यसभा का कार्यकाल खत्म होने के बाद रिटायर होने का फैसला सार्वजनिक किया है.

ऐसे में शरद पवार की बेटी सुप्रिया को नई दिल्ली में NCP का चेहरा माना जाता है. दूसरी ओर अजित पवार एक जन नेता और तेजतर्रार रणनीतिकार थे. अगर NCP एक साथ आती तो सुले, जो अजित पवार को ‘दादा’ कहती हैं, केंद्रीय चेहरा होतीं, जबकि अजित महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों में अपनी आधार से पार्टी को चलाते.

अजित पवार के बेटे और पत्नी सुनेत्रा कौन हैं?

अजित के भतीजे रोहित पवार, जो कर्जत-जामखेड निर्वाचन क्षेत्र से विधायक हैं, अभी तक राजनीतिक सीढ़ी नहीं चढ़ पाए हैं. उनकी पत्नी, सुनेत्रा पवार, राज्यसभा सांसद हैं और बारामती टेक्सटाइल कंपनी की चेयरपर्सन और एनवायरनमेंटल फोरम ऑफ इंडिया की CEO हैं.

अजित पवार के दो बेटे, पार्थ और जय पवार भी हैं. पार्थ ने कुछ समय के लिए राजनीति में कदम रखा और महाराष्ट्र के मावल निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन वे बड़े अंतर से हार गए. दूसरी ओर, जय राजनीति से दूर रहे हैं और सार्वजनिक जीवन में कम दिखते हैं.

शरद पवार के सामने दुविधा

अजित पवार के निधन से अब 83 साल के शरद पवार के सामने एक दुविधा खड़ी हो गई है. बारामती में उनकी जगह कौन लेगा? पवार परिवार के लिए यह बहुत बड़ा निजी नुकसान है, साथ ही यह NCP और महाराष्ट्र की राजनीति के लिए भी एक बड़ी चुनौती है.

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