भारत में कब-कब लीक हुआ बजट? किस वित्त मंत्री के हाथ में थी बागडोर और कहां हुई चूक

भारत में यूनियन बजट सिर्फ आर्थिक दस्तावेज नहीं, बल्कि देश की वित्तीय सेहत का आधिकारिक हिसाब होता है. इसलिए इसे अत्यधिक गोपनीय रखा जाता है. लेकिन यह गोपनीयता हमेशा से नहीं थी. इतिहास में दो बार ऐसा हुआ जब बजट लीक हुआ और सरकारों को बड़ा झटका लगा. यही वजह है कि आज बजट इतना सिक्रेट रखा जाता है.

कब-कब लीक हुआ था बजट Image Credit: AI

Budget Leak India History: देश में यूनियन बजट को लेकर हमेशा उत्सुकता रहती है. इस बार भी 1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करने जा रही हैं. यह पीएम नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में उनका दूसरा फुल-फ्लेज्ड बजट होगा. बजट केवल किसी दस्तावेज का नाम नहीं, बल्कि यह देश के कर्ज और खर्च का आधिकारिक लेखा-जोखा होता है. इसलिए इसे भारत के सबसे संवेदनशील दस्तावेजों में माना जाता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इतनी सख्त गोपनीयता क्यों? इसका जवाब इतिहास में छिपा है, जब देश का बजट एक नहीं बल्कि दो बार लीक हो चुका है. आइए जानते हैं कैसे.

बजट क्यों होता है इतना सिक्रेट?

बजट बनाने की प्रक्रिया शुरू होते ही वित्त मंत्रालय में चुप्पी और सख्ती का माहौल दिखने लगता है. कई अधिकारियों को बाहरी दुनिया से अलग कर दिया जाता है, मीडिया और विजिटर्स के लिए मंत्रालय ‘आउट ऑफ बाउंड्स’ हो जाता है और अधिकारियों को परिवार से मिलने तक की अनुमति नहीं होती. यह सब बजट की गोपनीयता बनाए रखने के लिए किया जाता है. इसकी शुरुआत उस दौर से हुई जब बजट लीक हुआ और सरकार की साख पर सवाल खड़े हुए.

आजाद भारत का पहला बजट और पहला बड़ा झटका

आजादी के तुरंत बाद देश अपना पहला बजट तैयार कर रहा था. जवाहरलाल नेहरू ने सर आर. के. शनमुखम चेट्टी को स्वतंत्र भारत का पहला बजट पेश करने की जिम्मेदारी दी थी. 26 नवंबर 1947 को वह शाम 5 बजे बजट पेश करने वाले थे ताकि ब्रिटेन के अधिकारी और प्रेस इसे आसानी से फॉलो कर सकें. यह बजट 15 अगस्त 1947 से 31 मार्च 1948 तक के 7.5 महीने के लिए तैयार किया गया था. लेकिन इससे पहले ही बजट की जानकारी बाहर आ गई. दिलचस्प बात यह है कि यह लीक भारत से नहीं बल्कि ब्रिटेन से हुआ.

लीक कैसे हुआ?

ब्रिटेन के तत्कालीन चांसलर ऑफ द एक्सचेकर ह्यू डाल्टन ने संसद जाते समय डेली स्टार अखबार के पत्रकार को बजट में प्रस्तावित टैक्स बदलावों की जानकारी दे दी. द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने डेली स्टार के पत्रकार जॉन कारवेल से कहा—“तंबाकू पर कोई नया टैक्स नहीं, बीयर पर एक पेनी बढ़ेगी, कुत्तों और पूल पर कुछ लगेगा, घोड़ों पर नहीं, परचेज टैक्स बढ़ेगा और प्रॉफिट टैक्स दोगुना होगा.”

करीब 20 मिनट में यह खबर अखबारों के जरिए सड़कों पर आ गई और हंगामा मच गया. बाद में ह्यू डाल्टन को माफी मांगनी पड़ी और उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा. इसे इतिहास में दर्ज पहला बजट लीक माना जाता है.

साल 1950 का दूसरा बजट लीक और एक और इस्तीफा

दूसरी घटना 1950 में हुई. उस समय बजट की प्रिंटिंग राष्ट्रपति भवन के प्रिंटिंग प्रेस में होती थी और गोपनीयता की समस्या नहीं मानी जाती थी. लेकिन जनवरी 1950 में जॉन मथाई के वित्त मंत्री रहने के दौरान बजट दस्तावेज के कुछ पेज प्रेस से बाहर लीक हो गए. यह बड़ा सवाल बन गया कि आखिर संवेदनशील दस्तावेज शक्तिशाली लोगों तक कैसे पहुंच रहे हैं. विवाद बढ़ा और मथाई ने इस्तीफा दे दिया. इसके बाद बजट प्रिंटिंग राष्ट्रपति भवन से हटाकर मिंटो रोड के सरकारी प्रेस में शिफ्ट की गई. फिर 1980 में इसे नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में शिफ्ट किया गया, जहां आज भी बजट उसी सुरक्षा व्यवस्था के तहत प्रिंट होता है.

आज बजट कैसे सुरक्षित रखा जाता है?

समय के साथ बजट की सुरक्षा और गोपनीयता के नियम और कड़े हो गए हैं. बजट तैयार करने वाले विभाग में 15 दिन पहले से क्वारंटीन जैसी स्थिति बना दी जाती है. यह क्षेत्र मीडिया, विजिटर्स और बाहरी लोगों के लिए प्रतिबंधित रहता है. CISF और IB के अधिकारी लगातार सुरक्षा में तैनात रहते हैं.

वित्त मंत्री, वित्त सचिव और टॉप अफसरों के दफ्तरों तक बिना अनुमति पहुंचना संभव नहीं होता. बजट तैयार करने वाले अधिकारियों के फोन इंटेलिजेंस की निगरानी में रहते हैं और परिवार वालों से भी सीधे बात नहीं कर सकते. उनके परिवार वाले केवल एक निश्चित नंबर पर संदेश छोड़ सकते हैं. प्रिंटिंग से दो दिन पहले बजट स्पीच को प्रिंटर्स को सौंपा जाता है और यह दस्तावेज सबसे अधिक सुरक्षा में रखा जाता है. भारत में बजट लीक को Official Secrets Act के तहत अपराध माना गया है और इसके लिए सख्त दंड का प्रावधान है.

इस बार का बजट भी नॉर्थ ब्लॉक में छपेगा

इस बार के केंद्रीय बजट 2026-27 से जुड़ी एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है. भले ही वित्त मंत्रालय नॉर्थ ब्लॉक से कर्तव्य भवन शिफ्ट हो चुका है, लेकिन इस बार भी बजट की छपाई नॉर्थ ब्लॉक में ही की जाएगी. वित्त मंत्रालय के अनुसार कर्तव्य भवन में बजट प्रिंटिंग प्रेस लगाने में कई तकनीकी और स्थान से जुड़ी दिक्कतें आईं. वरिष्ठ अधिकारी इन समस्याओं को सुलझाने के लिए कई बार नॉर्थ ब्लॉक गए. चूंकि बजट एक संवेदनशील डॉक्यूमेंट है, इसलिए किसी तरह का जोखिम नहीं लिया गया. इसी वजह से बजट 2026-27 की आखिरी प्रतियां नॉर्थ ब्लॉक के पुराने प्रिंटिंग प्रेस में ही छापी जाएंगी.

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