Budget FY27 से पहले खेती सेक्टर की सरकार से बड़ी मांगें, टेक्नोलॉजी और जलवायु पर फोकस बढ़ाने की अपील

Budget FY27 से पहले कृषि क्षेत्र को लेकर हलचल तेज है. टेक्नोलॉजी, डिजिटल सिस्टम और जलवायु से जुड़ी चुनौतियों पर नई सोच सामने आ रही है. उद्योग और विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर सही फैसले लिए गए, तो खेती की दिशा और तस्वीर दोनों बदल सकती हैं.

Budget FY26 Agriculture Image Credit: Canva

Budget FY27 agriculture: देश की अर्थव्यवस्था में कृषि की भूमिका हमेशा से अहम रही है, लेकिन बदलते मौसम, घटती आय और सीमित उत्पादकता के बीच अब यह साफ होता जा रहा है कि पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़ना मुश्किल है. Budget FY27 से पहले कृषि क्षेत्र से जुड़े उद्योग प्रतिनिधि और विशेषज्ञ सरकार से यह मांग कर रहे हैं कि खेती को केवल कल्याणकारी क्षेत्र के रूप में नहीं, बल्कि आर्थिक विकास के मजबूत इंजन के रूप में देखा जाए. इसके लिए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लाइमेट-स्मार्ट खेती और नई तकनीकों में निवेश को सबसे जरूरी बताया जा रहा है.

कृषि की स्थिति और बजट से उम्मीदें

कृषि और इससे जुड़े क्षेत्रों में देश की करीब 45 प्रतिशत आबादी को रोजगार मिलता है, लेकिन राष्ट्रीय सकल मूल्य वर्धन (gross value added) में इसका योगदान करीब 18 प्रतिशत ही है. विशेषज्ञों का मानना है कि Budget 2026-27 इस असंतुलन को दूर करने का अवसर हो सकता है. EY India के कृषि क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ अमित वात्स्यायन का कहना है कि अब खेती को उत्पादकता, रोजगार और ग्रामीण मांग बढ़ाने वाले सेक्टर के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि केवल सहायता आधारित क्षेत्र के रूप में.

डेयरी सेक्टर की खास मांग, ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर और जल प्रबंधन

डेयरी उद्योग भी बजट से खास उम्मीद लगाए बैठा है. Heritage Foods Ltd की कार्यकारी निदेशक ब्रह्माणी नारा के अनुसार सितंबर 2025 में हुए GST सरलीकरण के बाद संगठित डेयरी उत्पादों की मांग बढ़ी है. उनका कहना है कि सरकार को पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने के लिए गुणवत्तापूर्ण चारे और उन्नत तकनीक पर सब्सिडी देनी चाहिए.

साथ ही, पशु चिकित्सकों की कमी दूर करने और महिला उद्यमियों के लिए मिनी-डेयरी यूनिट्स पर पूंजी सहायता बढ़ाने की भी जरूरत है. इसके लिए Rashtriya Gokul Mission और National Digital Livestock Mission जैसी योजनाओं को और मजबूत करने की मांग की गई है.

विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के असर से निपटने के लिए माइक्रो-इरिगेशन, वाटरशेड प्रबंधन और नवीकरणीय ऊर्जा आधारित कृषि ढांचे में निवेश जरूरी है. इससे न केवल किसानों की आय स्थिर होगी, बल्कि खाद्य सुरक्षा भी मजबूत होगी.

डिजिटल खेती की ओर कदम

एग्रीटेक स्टार्टअप MapMyCrop के सीईओ स्वप्निल जाधव का कहना है कि ड्रोन, IoT सेंसर और AI आधारित टूल्स खेती को ज्यादा सटीक और टिकाऊ बना सकते हैं. उन्होंने AGMARK-NET और e-NAM जैसे प्लेटफॉर्म्स से तकनीक को जोड़ने पर जोर दिया.

BDO India के विशेषज्ञ सौम्यक बिस्वास ने छोटे जोत आकार, पोस्ट-हार्वेस्ट नुकसान और कमजोर रिसर्च फंडिंग जैसी समस्याओं की ओर ध्यान दिलाया. उनके मुताबिक, जलवायु-स्मार्ट खेती, पशुपालन और मत्स्य जैसे सहयोगी क्षेत्रों को बढ़ावा देना जरूरी है.

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अमित वात्स्यायन का मानना है कि AGRISTACK का सही रेगुलेशन खेती के डिजिटल बदलाव की रीढ़ बन सकता है. इससे किसान डेटा, क्रेडिट, बीमा और बाजार एक ही प्लेटफॉर्म पर जुड़ेंगे और निजी निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा.