सिर्फ कोयला नहीं… BCCL का बड़ा प्लान आया सामने, IPO के बाद रेयर अर्थ और सोलर सेक्टर में रखेगी कदम
IPO का मकसद BCCL की सही कीमत को पहचान दिलाना है. अब निवेशकों को साफ दिखेगा कि कंपनी क्या बनाती है और कितनी मजबूत है. IPO के बाद भी BCCL, कोल इंडिया की सहायक कंपनी बनी रहेगी. IPO से मिलने वाले फंड का इस्तेमाल कंपनी रेयर अर्थ मेटल और सोलर एनर्जी सेक्टर में एंट्री के लिए करेगी.
BCCL: देश की सबसे बड़ी कोकिंग कोल कंपनी भारत कोकिंग कोल लिमिटेड यानी BCCL इस समय चर्चा में है. वजह है इसका IPO, जिसे खुलते ही कुछ ही घंटों में पूरा सब्सक्राइब कर लिया गया. करीब 1,071 करोड़ रुपये के इस इश्यू को निवेशकों से जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला. सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक कोल इंडिया की बाकी सहायक कंपनियों को भी बाजार में उतारा जाए.
NIE की रिपोर्ट के मुताबिक BCCL के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मनोज कुमार अग्रवाल का कहना है कि यह लिस्टिंग सिर्फ फंड जुटाने के लिए नहीं, बल्कि कंपनी की असली वैल्यू सामने लाने के लिए है. आने वाले समय में BCCL सिर्फ कोयले तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि रेयर अर्थ मेटल और सोलर पावर जैसे नए सेक्टर में भी कदम रखेगी.
IPO से क्या बदलेगा BCCL में
मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा कि IPO का मकसद BCCL की सही कीमत को पहचान दिलाना है. अब निवेशकों को साफ दिखेगा कि कंपनी क्या बनाती है और कितनी मजबूत है. IPO के बाद भी BCCL, कोल इंडिया की सहायक कंपनी बनी रहेगी. IPO से मिलने वाले फंड का इस्तेमाल कंपनी रेयर अर्थ मेटल और सोलर एनर्जी सेक्टर में एंट्री के लिए करेगी. सरकार भी चाहती है कि कोल इंडिया और उसकी कंपनियां भविष्य की जरूरतों के हिसाब से खुद को बदलें.
रेयर अर्थ मेटल और ग्रीन एनर्जी पर फोकस
BCCL का फोकस अब सिर्फ कोकिंग कोल तक सीमित नहीं रहेगा. कंपनी रेयर अर्थ मेटल, ग्रेफाइट, लिथियम, कोबाल्ट, निकेल जैसे मिनरल्स में भी अवसर तलाश रही है. ये मिनरल्स बैटरी, सोलर पैनल और क्लीन एनर्जी सेक्टर के लिए बेहद जरूरी हैं. कोल इंडिया पहले ही मध्य प्रदेश में ग्रेफाइट ब्लॉक और आंध्र प्रदेश में रेयर अर्थ एलिमेंट्स की खोज के लिए कदम उठा चुकी है. BCCL भी इसी रणनीति का हिस्सा बनेगी.
GMP ट्रेंड पर डाले नजर
| तारीख | IPO Price | GMP (प्रति शेयर) | सब्सक्रिप्शन रेट | अनुमानित लिस्टिंग | अनुमानित मुनाफा |
|---|---|---|---|---|---|
| 11-Jan-2026 | ₹23.00 | ₹10.6 | 8.18x | ₹33.6 | ₹6360 (46.09%) |
| 10-Jan-2026 | ₹23.00 | ₹10.4 | 8.18x | ₹33.4 | ₹6240 (45.22%) |
प्रोडक्शन और मानसून का असर
पिछले वित्त वर्ष में भारी बारिश ने उत्पादन को प्रभावित किया. सामान्य तौर पर जहां 1,700 मिमी बारिश होती है, वहीं 2,200 मिमी से ज्यादा बारिश दर्ज की गई. इससे खदानों में काम प्रभावित हुआ और उत्पादन घटा. इसके अलावा ई-ऑक्शन में गिरावट भी एक कारण रही. कंपनी का कहना है कि कोयले की कीमतों पर उसका सीधा नियंत्रण नहीं होता, क्योंकि घरेलू और कोकिंग कोल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार, खासकर ऑस्ट्रेलिया की कीमतों से जुड़ी होती हैं.
कैपेक्स और भविष्य की योजना
BCCL हर साल करीब 1,000 करोड़ रुपये का पूंजीगत खर्च करती है. आने वाले वर्षों में भी यह खर्च लगभग इसी स्तर पर रहेगा. कंपनी झारखंड के धनबाद जिले के झरिया कोलफील्ड में स्थित अपने सबसे बड़े ई-ब्लॉक को विकसित कर रही है. इसके पूरी तरह शुरू होने के बाद सालाना उत्पादन में 15 मिलियन टन की बढ़ोतरी होगी. इससे कुल उत्पादन 54 से 55 मिलियन टन तक पहुंच जाएगा.
भंडार और लंबी उम्र का कारोबार
BCCL के पास करीब 7.9 बिलियन टन से ज्यादा का कोयला भंडार है. कंपनी का दावा है कि इस भंडार के दम पर वह अगले 100 साल तक खनन कर सकती है. सिर्फ ई-ब्लॉक में ही 300 मिलियन टन से ज्यादा का रिजर्व मौजूद है.कंपनी के एमडी का कहना है कि आने वाले समय में कोकिंग कोल की मांग में कोई बड़ी गिरावट नहीं दिखती.
स्टील बनाने के लिए अभी भी ब्लास्ट फर्नेस जरूरी हैं. इलेक्ट्रिक फर्नेस के लिए स्क्रैप स्टील की जरूरत होती है, जो भारत में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं है. इसलिए कोकिंग कोल आधारित स्टील उत्पादन लंबे समय तक चलता रहेगा.
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डिसक्लेमर: इस खबर में GMP से संबंधित जानकारी दी गई है. मनी9लाइव का GMP तय करने से कोई संबंध नहीं है. मनी9लाइव निवेशकों को यह भी सचेत करता है कि केवल जीएमपी के आधार पर निवेश पर फैसला नहीं करें. निवेश से पहले कंपनी के फंडामेंटल जरूर देखें और एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.